प्रेग्नेंसी में एनीमिया न हो, इसे लिए खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। आइए जानें विस्तार से।
जानें वजह

तो यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि अगर प्रेग्नेंसी में एनीमिया हो जाये, तो परेशानी का सबब बन सकता है, क्योंकि आपको खून की कमी हो जाती है और यह बात सही तो नहीं होती है। हालांकि यह एक आम परेशानी भी हो जाती है, क्योंकि यह तब होता है जब शरीर की बढ़ती जरूरतों के कारण खून में ऑक्सीजन ले जाने के लिए पर्याप्त हेल्दी रेड ब्लड सेल्स नहीं होते हैं, अक्सर आयरन या विटामिन की कमी के कारण भी ऐसा हो जाता है, जिससे थकान, पीलापन, चक्कर आना और सांस लेने में दिक्कत होती है, लेकिन इसे आयरन/फोलेट सप्लीमेंट्स, विटामिन सी और आयरन और विटामिन से भरपूर डायट से मैनेज किया जा सकता है, जिससे समय से पहले जन्म और कम वजन वाले बच्चे के जन्म जैसे जोखिमों को रोका जा सकता है। आपको यह बात समझनी होगी कि प्रेग्नेंसी के दौरान आपको एनीमिया हो सकता है, अगर कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) सही नहीं है, तो क्योंकि इससे ही पता चलता है कि आपकी रेड ब्लड सेल्स, जो आपके शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं, वह जितनी जरूरत है, उतनी है या नहीं या फिर कम है। इससे आपको थकान, चक्कर आना, ठंड लगना और सांस फूलने जैसा महसूस हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया के ज्यादातर मामलों में, अपनी डायट में कुछ बदलाव करके आप सही रास्ते पर आ सकती हैं।
क्या होता है यह
एनीमिया तब होता है, जब आपके शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं होते हैं। जब आपके शरीर को खून से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती है, तो वह ठीक से काम नहीं कर पाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान जिस व्यक्ति को एनीमिया होता है, उसे एनीमिक माना जाता है। रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में हीमोग्लोबिन नाम का एक जरूरी प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन ऑक्सीजन को पकड़ता है और आपके रेड ब्लड सेल्स को आपके फेफड़ों से आपके शरीर तक ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है। यह कार्बन डाइऑक्साइड को आपके शरीर से आपके फेफड़ों तक ले जाने में भी मदद करता है, ताकि आप उसे सांस से बाहर निकाल सकें। RBCs और हीमोग्लोबिन बनाने के लिए, आपके शरीर को आयरन और विटामिन की लगातार सप्लाई की जरूरत होती है। उस सप्लाई के बिना, आपका शरीर आपके अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाएगा। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में एनीमिक होना आम बात है, क्योंकि उनमें आयरन और दूसरे विटामिन की कमी होती है।
प्रेग्नेंसी में एनीमिया

दरअसल, पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान, आपके शरीर में खून की मात्रा 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ऐसे में इसका यह मतलब है कि आपके शरीर को ज्यादा रेड ब्लड सेल्स के लिए ज्यादा आयरन की जरूरत होती है और प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया का खतरा ज्यादा हो सकता है अगर आप एक से ज्यादा बच्चों की मां बनने वाली हैं और पर्याप्त आयरन नहीं ले रही हैं या फिर ज्यादा गैप के कारण लगातार प्रेग्नेंट हो रही हैं। या फिर प्रेग्नेंसी से पहले पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होती थी। या फिर मॉर्निंग सिकनेस की वजह से बार-बार उल्टी हो रही है।
बच्चे को कैसे प्रभावित करता है
दरअसल, अगर विकसित हो रहे भ्रूण को पर्याप्त आयरन, विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड के लिए आप पर निर्भर रहना पड़ता है। एनीमिया भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है, खासकर पहली तिमाही में।
अगर एनीमिया का इलाज नहीं किया जाता है, तो आपके बच्चे को जन्म के बाद एनीमिया होने का खतरा ज्यादा होता है, जिससे विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही, एनीमिया समय से पहले बच्चे को जन्म देने और कम वजन वाले बच्चे के जन्म का खतरा भी बढ़ाता है।
प्रेग्नेंट महिलाओं को किस तरह के एनीमिया होते हैं
एनीमिया 400 से ज्यादा तरह के होते हैं। लेकिन प्रेग्नेंसी में ज्यादातर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया। फोलिक एसिड की कमी से होने वाला एनीमिया और विटामिन B12 की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे अधिक होता है।
क्या हो सकते हैं उपाय

तो इस बात को समझना भी बेहद जरूरी है कि अगर आपके डॉक्टर आमतौर पर इसका इलाज रोजाना प्रीनेटल विटामिन या आयरन सप्लीमेंट से करेंगे, तो अच्छा रहेगा और साथ ही इससे आपके शरीर को आयरन, विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड सही मात्रा में मिलते हैं। वहीं आपको ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत भी पड़ सकती है। इसके अलावा, डॉक्टर आपको आपको पर्याप्त आयरन, बी12 और फोलिक एसिड खाने की सलाह देंगे, साथ ही हर दिन एक प्रीनेटल विटामिन लेने की भी। साथ ही आप अपने हेल्थकेयर प्रोवाइडर से बात करें कि वे कौन-सा प्रीनेटल विटामिन लेने की सलाह देते हैं। जहां तक बात खाने में बदलाव की है, तो आपको ऐसा खाना खाना चाहिए, जिसमें आयरन ज्यादा हो, जैसे पालक और ऐसी चीजें, जिनमें ऐसे विटामिन ज्यादा हों और जो आपके शरीर को आयरन सोखने में मदद करते हैं (जैसे विटामिन-सी, इनके अलावा खट्टे फल, टमाटर और शिमला मिर्च जैसे खाद्य-पदार्थ को शामिल करना जरूरी है। इसके अलावा, दूध और आयरन युक्त भोजन करें और आयरन युक्त भोजन के साथ दूध न पिएं, क्योंकि कैल्शियम आयरन की कमी को पूरा करता है। साथ ही साथ चीनी की जगह गुड़ या शहद का सीमित मात्रा में सेवन करें, इनमें आयरन होता है। साथ ही केल, मेथी, मसूर, छोले, राजमा, सोयाबीन,खजूर, किशमिश, अंजीर, बादाम, पिस्ता और चुकंदर, शकरकंद और फोर्टिफाइड अनाज खाएं।
