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आयुर्वेदिक तरीके से है संभव पीसीओडी का इलाज

टीम Her Circle |  January 30, 2026

पीसीओएस और पीसीओडी जैसी परेशानियों को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक तरीका चुनना सबसे अच्छा रहता है। आइए जानें विस्तार से। 

क्या है ये 

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं को होने वाली एक बीमारी है जिससे पीड़ित होने पर महिलाओं के प्रजनन काल में हार्मोन असंतुलन देखने को मिलता है। पीसीओएस से प्रभावित महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और ओवरीज में एक से ज्यादा सिस्ट बन जाते हैं। आमतौर पर यह समस्या मोटापा या आनुवांशिक कारणों से होती है। तनाव या अवसाद या टेंशन भी इसका मुख्य कारण बन सकते हैं। पीसीओएस 14-40 वर्ष तक की महिलाओं को प्रभावित कर सकता है।

शतावरी है फायदेमंद 

पीसीओएस में शतावरी काफी हद तक फायदेमंद साबित होता है और उसकी वजह यह है कि इसमें काफी कुछ होता है, जो मदद करता है, जैसे इसमें विटामिन ए, विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन-सी, विटामिन-ई, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, खनिज और फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि शतावरी एंटीऑक्सीडेंट का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह महिलाओं की प्रजनन प्रणाली की रक्षा करने के साथ-साथ डायबिटीज विरोधी गुणों के कारण होने वाले इंसुलिन की संवेदनशीलता को भी बेहतर और नियमित बनाने में मदद करता है। इतना ही नहीं, शतावरी एक ऐसा आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जो पीसीओएस का प्रभावशाली तरीके से इलाज करने के साथ-साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। 

शिलाजीत अच्छा है 

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में शिलाजीत का नाम काफी मशहूर है। शिलाजीत का इस्तेमाल ढेरों समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। उन्हीं में से एक पीसीओएस भी है, जो महिलाएं पीसीओएस से परेशान हैं, वे आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करने के बाद शिलाजीत का सेवन कर सकती हैं। शिलाजीत बहुत ही प्रभावशाली रूप से पीसीओएस के लक्षणों को कम करता है। शिलाजीत एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं, जिसके कारण महिलाओं की प्रजनन प्रणाली फिर से पहले की तरह मजबूत और बेहतर हो जाती है। 

हल्दी है सदा के लिए 

हल्दी ढेरों गुणों से भरपूर है और इसका इस्तेमाल तरह-तरह की परेशानियों और बीमारियों को कम एवं दूर करने के लिए किया जाता है। यह महिलाओं की इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ-साथ उनकी प्रजनन प्रणाली को बेहतर बनाता है और पीसीओएस के लक्षणों को बहुत ही प्रभावशाली तरीके से दूर करने में मदद करता है। हल्दी की मदद से पीसीओएस और इससे जुड़ीं समस्याओं को बहुत ही आसानी से खत्म किया जा सकता है। 

गिलोय अच्छे से खाना चाहिए

गिलोय को इस तरीके से जाना जाना चाहिए कि गिलोय बहुत मदद करता है पीसीओएस में दिखता है। पीसीओएस के आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में गुडुची का नाम भी शामिल है। यह शरीर में ब्लड शुगर को रेगुलेट करने का काम करता है। यह महिलाओं के इम्यूम सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसलिए जरूरत के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए। 

नीम जैसा कोई नहीं 

नीम में ढेरों औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीडायबिटिक शामिल हैं। हल्दी की तरह ही नीम का इस्तेमाल भी ढेरों तरह के उत्पादों का निर्माण करने के लिए किया जाता है। नीम त्वचा के लिए बहुत ही बेहतरीन माना जाता है। पीसीओएस से पीड़ित होने पर महिलाओं के चेहरे पर बाल और मुंहासे आने लगते हैं। इन सबसे बचने के लिए नीम का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

अश्वगंधा है तो मुमकिन है

यह जानना बेहद जरूरी है कि अश्वगंधा तनाव और कोर्टिसोल में कमी करता है और पीसीओडी का संबंध उच्च तनाव से है, तो अश्वगंधा कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर की तनाव प्रतिक्रिया शांत होती है। साथ ही यह हार्मोनल संतुलन को बनाता है और यह एलएच, एफएसएच और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोनों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, जिससे पीरियड चक्र में मदद मिलती है और आपका पीरियड अधिक नियमित हो जाता है। वहीं यह इंसुलिन संवेदनशीलता के लिए भी काम करता है, मसलन यह शरीर द्वारा इंसुलिन के उपयोग को बेहतर बना सकता है, जो पीसीओडी में एक आम समस्या है और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। वहीं थायरॉइड में सहायक साबित होता है, जी हां, पीसीओडी से पीड़ित कई लोगों को थायरॉइड की समस्या भी होती है, और अश्वगंधा थायरॉइड के कार्य में सहायक हो सकता है। वहीं साथ ही यह सूजन कम करता है और इसके सूजनरोधी गुण हार्मोनल असंतुलन के मूल कारण को दूर करने में मदद करते हैं, दरअसल, हार्मोन विनियमन और ओव्यूलेशन में सुधार करके, यह प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

डायट हो कुछ ऐसा

पीसीओडी की परेशानियों को दूर करने के लिए अपने खान-पान का ध्यान रखना भी जरूरी है, सो जरूरी है कि आप पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और बीज जैसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें। ब्राउन राइस, ओट्स और दाल जैसी कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खाएं। साथ ही अदरक और हल्दी जैसे सूजन कम करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। चीनी, तले हुए खाद्य पदार्थ, शीतल पेय का सेवन न करें। इनसे आपकी पीसीओडी की समस्या और बढ़ जाएगी। पीसीओडी को ठीक करने के लिए एक सरल आहार बनाएं, जिसमें तीन नियमित भोजन और पौष्टिक स्नैक्स शामिल हों। साथ ही साथ खूब पानी पिएं। साथ ही घर का बना खाना ही खाएं। इसके अलावा, खाने में अलसी या दालचीनी मिलाना अच्छा होता है और साथ ही पीसीओडी के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दैनिक खान-पान की आदतें ही सबसे महत्वपूर्ण हैं, खासकर जब आयुर्वेदिक पीसीओएस आहार चार्ट का पालन किया जाए, जो सात्विक भोजन, मौसमी फलों और आंतों के लिए फायदेमंद मसालों के माध्यम से हार्मोनल संतुलन पर केंद्रित हो।







 


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