ठंड के मौसम में साग-सब्जियों की बहार आ जाती है। इनमें अधिकतर सब्जियां ऐसी भी होती हैं, जो न्यूट्रिशियस होने के साथ-साथ ठंड के दौरान आपके शरीर को भी गर्म रखती हैं। आइए जानते हैं ठंड के मौसम में मिलनेवाली गर्म तासीरवाली ऐसी ही 5 हरी पत्तेदार सब्जियों के बारे में।
एकमात्र चौलाई में पाया जाता है सोना

न्यूट्रशनिस्ट शिल्पा जैन बताती हैं कि विटामिन सी और आयरन के साथ औषधीय गुणों से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जी चौलाई सर्दियों के मौसम में मिलनेवाली गर्म तासीरवाली सब्जियों में से एक है। छोटी चौलाई, बङी चौलाई, पूसा कीर्ति, पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण और मोरपंखी नामक इतने किस्मों में चौलाई पूरे भारत में पाई जाती है। आयुर्वेद के अनुसार चौलाई को विषदन भी कहा जाता है, क्योंकि इसके रस या जड़ के क्वाथ में काली मिर्च मिलाकर पीने से चूहे, बिच्छू, संखिया, जैसे विषों का नाश होता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि इसमें सोना धातु पाया जाता है जो किसी और साग-सब्जियों में नहीं पाया जाता। औषधि के रूप में चौलाई के पंचाग यानि पांचों अंग- जड, डंठल, पत्ते, फल, फूल काम में लाए जाते हैं। विशेष रूप से पत्तियों के साथ इसके डंठल में विटामिन ए और सी के साथ प्रोटीन और मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। हरे चौलाई के अलावा लाल चौलाई का साग एनीमिया में काफी लाभदायक है।
सरसों का साग है स्वाद के साथ सेहत से भरपूर

स्वाद और सेहत से भरपूर सरसों का साग न सिर्फ पोषक तत्वों का खजाना है, बल्कि सर्दियों में मिलनेवाली गर्म तासीरवाली सबसे स्वादिष्ट सब्जियों में से एक है। यूं तो मक्के की रोटी के साथ सरसों के साग का स्वाद पूरे विश्व में मशहूर है, लेकिन प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और कई विटामिन्स से भरपूर सरसों का साग सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। सरसों के साग में फोलेट अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे दिल तंदुरुस्त रहता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है। सरसों के साग में फाइबर की मात्रा भी काफी अधिक होती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और डाइजेशजन भी दुरुस्त रहता है। वजन घटाने के लिए डाइट में आप सरसों का साग शामिल कर सकती हैं। विटामिन-ए के कारण यह आपके फेफडो़ं और आंखों की रोशनी के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं। सरसों के साग में कैल्शियम और पोटैशियम अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है। सिर्फ यही नहीं इसमें मौजूद सल्फर और एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को निकालने में भी मददगार हैं।
न्यूट्रिएंट्स का खजाना है मेथी

स्वाद में थोड़ी सी कड़वी लगनेवाली मेथी की सब्जी, गर्म तासीर के साथ कई न्यूट्रिएंट्स का खजाना है। पूरे भारत में कहीं थेपले, तो कहीं रोटी, कहीं पराठा, तो कहीं इसकी सब्जी बनाकर खाई जाती है। फाइबर से भरपूर मेथी न सिर्फ आपके डाइजेशन को दुरुस्त करती है, बल्कि आपको कॉन्स्टिपेशन, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाती है। मेथी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, आपके मेटाबॉलिज़्म को बेहतर बनाते हुए फैट बर्न को आसान बनाती है और आपको वजन घटाने में मदद मिलती है। मेथी में मौजूद विटामिन और मिनरल्स आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए सर्दियों में सर्दी-ज़ुकाम, खांसी, या अन्य इंफेक्शन से आपका बचाव करते हैं। विशेष रूप से यदि आपको डायबिटीज है, तो इसका रस निकालकर पीने से आपका शुगर कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा सर्दियों में अपनी स्किन पर चमक लाने के लिए आप चाहें तो इसकी पत्तियां पीसकर अपने चेहरे पर लगा सकती हैं।
पोषक तत्वों का पावर हाऊस है बथुआ

सर्दियों के दौरान अपनी डाइट में बथुआ को शामिल करके आप न सिर्फ अपने शरीर को गर्म रख सकती हैं, बल्कि बहुत सारी बीमारियों से भी छुटकारा भी पा सकती हैं। न्यूट्रशनिस्ट शिल्पा जैन यह भी कहती हैं कि बथुआ में फाइबर और पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जिससे डाइजेशन सही रहता है और कॉन्स्टिपेशन से राहत मिलती है। बथुआ में मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस आपकी हड्डियों को मजबूती देते हैं। बथुआ में विटामिन सी, विटामिन बी2, विटामिन बी3, विटामिन बी5, आयरन, मैग्नीशियम, मिनरल, आयरन, पोटैशियम और सोडियम जैसे तत्व होते हैं, जिससे ब्लड क्लियर होने के साथ आपके चेहरे पर निखार आता है और आपके बाल मजबूत बनते हैं। बथुआ खाने से शरीर गर्म रहता है और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। बथुआ खाने से न सिर्फ इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, बल्कि पेट के कीड़े भी खत्म होते हैं।
शलजम के साथ उसका साग भी है गुणकारी

शलजम और इसका साग दोनों ही न्यूट्रिएंट्स का पावर हाउस हैं। गर्म तासीरवाले शलजम का साग कैल्शियम, विटामिन सी, आयरन, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। शलजम में मौजूद नाइट्रेट, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। शलजम में मौजूद फाइबर, डाइजेशन को बेहतर बनाता है और कॉन्स्टिपेशन से छुटकारा दिलाता है। इसके अलावा शलजम में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स जहां आपकी स्किन में ग्लो लाते हैं, वहीं विटामिन के, आपके दिल को स्वस्थ रखता है। यही नहीं शलजम में मौजूद ल्यूटिन नामक तत्व मोतियाबिंद, मैक्यूलर डिजनरेशन जैसी समस्याओं से भी आपका बचाव करता है। शलजम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं और आयरन, खून की कमी को दूर करते हुए हेमोग्लोबिन का स्तर बनाए रखते हैं। शलजम में मौजूद पोटैशियम, शरीर से सोडियम को बाहर निकालकर उन्हें धमनियों में फैलने में मदद करता है, जिससे आपका ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रहता है।