बच्चों को कई बार ऐसा होता है कि ब्लोटिंग की समस्या हो जाती है। आइए जानें ऐसा होने पर क्या करें।
बच्चों में गैस और पेट फूलना आम पाचन संबंधी समस्याएं हैं, जो माता-पिता के लिए असुविधा और चिंता का कारण बन सकती हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में ये हानिरहित और अस्थायी होते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षण अपच, एसिडिटी या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों जैसी कई समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।
जानें मुख्य लक्षण

गैस और पेट फूलने के कारण को समझना, लक्षणों को पहचानना और पेट फूलने से राहत दिलाने के तरीके जानना बच्चों को जल्दी ठीक होने में मदद कर सकता है। जैसे कि हवा निगलना, कई बार ऐसा होता है कि छोटे बच्चे दूध पीते समय या रोते समय अक्सर हवा निगल लेते हैं। वहीं बड़े बच्चे जल्दी-जल्दी खाना खाने, स्ट्रॉ से पीने या बात करते हुए खाने के कारण हवा अंदर ले जाते हैं, जो गैस और ब्लोटिंग का कारण बनती है। फिर गलत खान पान भी एक बड़ी वजह बनते हैं, क्योंकि कई बार ऐसा भी होता है कि अत्यधिक तली-भुनी चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा और बहुत ज्यादा मीठा खाने से पेट में गैस बनती है और हमें पता नहीं चलता है। इसके अलावा, गोभी, बीन्स और दालें भी कुछ बच्चों में ब्लोटिंग पैदा करती हैं।
अन्य कारण
ऐसा भी कई बार होता है कि जब पेट साफ नहीं होता, तो इंटेस्टाइन में जमा मल गैस पैदा करता है, जिससे पेट फूला हुआ और भारी महसूस होता है। वहीं कई बार बच्चों में फूड इनटॉलेरेंस की समस्या आ जाती है और कई बच्चों को दूध या गेहूं ठीक से नहीं पचता, जिससे पेट में सूजन और गैस हो सकती है। वहीं शारीरिक गतिविधि की कमी भी हो जाती है, तो कई बार कई बच्चे स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताते हैं। कम चलने-फिरने या खेल-कूद न करने से पाचन धीमा हो जाता है। इससे भी परेशानी होती है। यह भी होता है कि कभी-कभी पेट में कीड़े होने की वजह से भी बच्चों का पेट अक्सर फूला रहता है। वहीं बच्चों में ब्लोटिंग के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जो उनकी उम्र और खाने की आदतों पर निर्भर करते हैं। जैसे कि बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाना।भोजन करते समय बहुत ज्यादा बातें करना। या फिर स्ट्रॉ (Straw) से ड्रिंक्स पीना या च्युइंग गम चबाना। शिशुओं में, रोते समय या फीडिंग के दौरान गलत तरीके से पकड़ने पर भी पेट में हवा भर जाती है।
जानें यह भी

कुछ खाद्य पदार्थ पेट में गैस पैदा करते हैं जिससे ब्लोटिंग होती है, जैसे कि बीन्स, ब्रोकोली, गोभी और प्याज जैसी चीजों से परेशानी होती है, तो वही सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा चीनी वाले स्नैक्स भी सही नहीं रहते हैं। साथ ही फाइबर का असंतुलन हो जाता है और अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना या बहुत कम फाइबर लेना, दोनों ही पाचन में समस्या पैदा कर सकते हैं। वहीं अगर तनाव और चिंता भी रहे, तो स्कूल या घर में मानसिक तनाव भी बच्चों के पाचन पर असर डालता है और ब्लोटिंग का कारण बन सकता है। साथ ही मेडिकल स्थितियां भी परेशान करती है, इसे कभी-कभी पेट फूलना IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), एसिड रिफ्लक्स (GERD) या पेट के कीड़ों का संकेत भी हो सकता है।
बच्चों में गैस और पेट फूलने को समझना
पेट या इंटेस्टाइन में अतिरिक्त हवा या पाचन गैस जमा होने पर गैस और पेट फूलना होता है। इससे पेट में सूजन, बेचैनी या ऐंठन हो सकती है। बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, जिससे वे आहार में बदलाव और कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशील होते हैं। अधिकांश मामलों में, पेट फूलना और गैस अस्थायी होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बार-बार ऐसा होना अपच, खराब आंत स्वास्थ्य, एसिडिटी या लैक्टोज इन्टॉलरेंस को समझना भी जरूरी होता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) या सीलिएक रोग जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों का संकेत हो सकता है। साथ ही माता-पिता को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए ताकि गैस और पेट फूलने से बच्चे के विकास, पोषण और समग्र स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े।
तुरंत राहत पाने के उपाय

इससे निजात पाने के लिए बच्चों को कुछ-कुछ एक्टिविटी में शामिल करना चाहिए और इसके लिए आपको साइकिल लेग्स जैसी एक्सरसाइज करनी चाहिए, अपने बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और धीरे-धीरे उनके पैरों को साइकिल की तरह पेट की ओर घुमाएं, ताकि फंसी हुई गैस बाहर निकल सके। वहीं अपने बच्चे के पेट को घड़ी की दिशा में धीरे-धीरे मालिश करें। यह इंटेस्टाइन के नेचुरल के फ्लो को ठीक करता है और गैस के बुलबुले को आगे बढ़ाने में मदद करता है। वहीं मांसपेशियों को आराम देने और ऐंठन को शांत करने के लिए उनके पेट पर एक गर्म (बहुत गर्म नहीं) तौलिया या हीटिंग पैड रखें। वहीं पेट के बल लेटना अच्छा होता है, साथ ही शिशुओं के लिए, कुछ समय के लिए देखरेख में पेट के बल लेटने से हल्का दबाव पड़ता है, जो स्वाभाविक रूप से गैस निकालने में मदद करता है।
ये पानी करेंगे असर
ऐसे कुछ खास पानी हैं, जो आपको काफी अच्छे से मदद करेंगे, जैसे कि सौंफ का पानी, कुछ सौंफ के दानों को पानी में उबालें, ठंडा होने दें और फिर बच्चे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाएं। इनके अलावा, जीरा का पानी भी अच्छा रहता है, जो एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे पेट फूलना कम होता है। अगर जीरे की बात करें, तो एक चम्मच जीरा को पानी में उबालें और गुनगुना होने पर बच्चे को पिलाएं। इनके अलावा, अजवाइन पेट दर्द और गैस के लिए एक पुराना घरेलू नुस्खा है। यह पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और फंसी हुई गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। वहीं अदरक और नींबू का पेय अच्छा होता है, यह थोड़े से अदरक का रस, नींबू और एक चुटकी काला नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और पेट फूलना कम होता है। वहीं नारियल पानी जो होता है, इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और मैग्नीशियम होते हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पेट फूलने से बचाते हैं। वहीं छाछ जो होता है, उसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं और गैस से राहत दिलाते हैं। वहीं पुदीने की चाय हर्बल चाय होती है, जो पेट की मांसपेशियों को आराम देती हैं और गैस से होने वाले दर्द को कम करती हैं। बच्चों के लिए हल्की और कैफीन रहित चाय का चुनाव अवश्य करें। इस बात का ध्यान रखें कि आपको सबकुछ अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही करना है, अपने मन से नहीं।