मैटरनिटी लीव से पहले तक बच्चे को संभालना थोड़ा आसान होता है ,लेकिन मैटरनिटी लीव खत्म होने के बाद बच्चे, परिवार और ऑफिस को बैलेंस करना आसान नहीं होता है। जरूरी है कि इन सब जिम्मेदारियों के बीच में अपना ध्यान रखना न भूलें, क्योंकि जब आप स्वस्थ होंगी, तभी बच्चे की देखभाल के साथ बाकी सारी जिम्मेदारियां निभा पाएंगी। आइए जानते हैं विस्तार से कि मैटरनिटी लीव के बाद वर्किंग मां किस तरह से अपना ख्याल रख सकती हैं।
खाने को महत्व

जब शारीरिक रूप से फिट रहने की बात आती है, तो अच्छा खाना उतना ही जरूरी है जितना कि एक्सरसाइज। इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि आपके पास स्वस्थ भोजन के विकल्प मौजूद हों, और अपने भोजन और नाश्ते की प्लानिंग एक दिन पहले से बना लें। जब आपके पास समय की कमी हो, तो अपने भोजन और नाश्ते को पहले से तैयार करने से आपको जल्दी में लेकिन ऐसे खाने से खुद को बचा सकती हैं, जो आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं हैं। अपने आहार में बहुत सारे ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कम कैलोरी वाले डेयरी उत्पाद शामिल करें। जंक फूड या बाहर के खाने से परहेज करें।यदि बच्चे का ख्याल रखते हुए आपको ज्यादा खाना खाने की आदत हो गई है, तो कोशिश करें अब थोड़े-थोड़े अंतराल पर कम-कम मात्रा में भोजन करें। कम मात्रा में भोजन करने से कैलोरी को अच्छे से विभाजित करता है और कैलोरी को शरीर में फैट के रूप में जमा करने से रोकेगा। इससे आपका मेटाबोलिज्म भी अच्छा होता है।
इन चीजों के खानपान में न करें शामिल
मैटरनिटी लीव के बाद अपनी हेल्थ का ध्यान रखते हुए आपको कैफीन से भी दूरी बनानी होगी। यदि आपको नींद को भगाने या थकान दूर करने के लिए एक कप कॉफी पीने की आदत है, तो इसे छोड़ दें। ये आपके वजन को कम नहीं होने देगी और आपकी सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। अगर आपको खुद को तरोताजा करने के लिए किसी ड्रिंक की जरूरत है तो ग्रीन टी या नींबू पानी का विकल्प चुनें।
एक्सरसाइज को अपने जीवन का भाग बनाएं

मैटरनिटी लीव के तुरंत बाद आप इंटेंस वर्कआउट शुरू नहीं करना चाहती हैं ,तो वॉकिंग एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह एक आसान वर्कआउट है, जिसे आप बिना किसी परेशानी के कर सकती हैं। आप पहले शुरुआत धीरे-धीरे टहलने से करें फिर कुछ दिनों के बाद थोड़ा तेज चलना शुरू करें। हफ्ते में 5 दिन कम से कम 15 मिनट के लिए टहलें और फिर धीरे-धीरे यह समय बढाएं। बच्चे को स्ट्रॉलर में बिठा कर उसे भी टहलाने ले जाएं और साथ-साथ खुद भी टहलें। अगर आप बच्चे के साथ वाकिंग में सहज नहीं है, तो बच्चे से पहले उठे और कम से कम 25 मिनट के लिए ही सही वाकिंग पर जाएं। वॉकिंग के साथ कम्फर्टेबल होने के बाद आप एक्सरसाइज करें और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग लें।अपनी मसल्स को टाइट करने के लिए स्क्वाट्स, सिट-अप्स, ब्रिस्क वॉक और पेट की एक्सरसाइज कर सकती हैं।
योग और नींद को जोड़ना होगा फायदेमंद
मैटरनिटी लीव के खत्म होने के बाद सबसे पहले आपको अपनी बॉडी पोस्चर को ठीक करना होगा। गर्भ में जब बच्चा घूमने की प्रक्रिया करता है तो इससे आपकी रीढ़ पर स्ट्रेस पड़ता है। इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद उसे नर्सिंग के लिए लगातार उठाने से आपकी गर्दन और कंधों पर भी जोर पड़ता है। योग से इन सभी समस्याओं को हल किया जा सकता है, यह आपकी मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत करता है, इससे आपका पोस्चर पहले से भी ज्यादा बेहतर हो जाता है।आपको रेगुलर बेसिस पर यह एक्सरसाइज करनी चाहिए, ताकि आपका शरीर वापस पहले जैसा हो सके। मम्मीज सुपरहीरो होती हैं। जो एक साथ कई कामों को कई घंटों तक कर सकती हैं, लेकिन साइंस की मानें तो सुपरहीरोज को भी नींद की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि मां को एक आम एडल्ट की तरह ही रात में 7 से 9 घंटे की ही नींद की जरूरत होती है। यह नींद एक मां को सेहतमंद बनाता है. काम और बच्चे को एक साथ संभालना कठिन है इसलिए जितना संभव हो भरपूर नींद लें।इससे आप अपने बच्चे के साथ -साथ अपना भी केयर कर सकती हैं।
खुद को रखें हाइड्रेटेड

दिन भर हाइड्रेटेड रहें। हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन एक मां के लिए हाइड्रेटेड रहने का महत्व बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि नई मां अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना नजरअंदाज कर देते हैं. दरअसल नयी मायें इस बात से अनजान होती हैं कि डिहाइड्रेशन एक गंभीर समस्या हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप कुछ गंभीर परेशानियां हो सकती है, डिहाइड्रेशन से चक्कर आना, सिरदर्द और मुंह सूखना जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं। नतीजतन, जीवन के इस नाज़ुक दौर में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए कुछ छोटे-छोटे कदम उठाना जरूरी है। अगर आप नई मां हैं और स्तनपान भी करवा रही हैं, तो आपको दिन भर खुद को हाइड्रेट रखना होगा। इस दौरान पानी और वाटर बेस्ड फूड्स को प्राथमिकता दें।
रात के समय बच्चे को खुद फीड करवाएं

मैटरनिटी लीव के बाद ऑफिस के कामों की वजह से आप दिन भर बच्चे से दूर रहती हैं । ऐसे में बच्चे को पैंपर करने के लिए और ब्रेस्ट फीडिंग या बोतल से फीडिंग के लिए रात का समय चुनें। इससे बच्चा मन मुताबिक दूध पीकर गहरी नींद सो जाता है। इससे बच्चे को स्लीपिंग पैटर्न अपने आप बनने लगता है। साथ ही लंबे वक्त तक सोना बच्चे की ग्रोथ में भी मददगार साबित होता है। बच्चे के साथ रात में समय बिताने से यह आपके दिन भर के गिल्ट को भी कम करता है. वर्किंग मदर को अक्सर ऐसे गिल्ट की शिकायत होती है.
प्लान 'बी' हमेशा रखें

मैटरनिटी लीव के बाद आपने अपने बच्चे के लिए किसी अच्छे डे केयर की व्यवस्था कर ली है। घर पर ही एक अच्छे केयर टेकर को रख लिया है लेकिन कभी भी पूरी तरह से इन पर ही निर्भर ना रहे।हमेशा अपने साथ प्लान बी लेकर चलें क्योंकि कितनी भी अच्छी प्लानिंग क्यों ना हो. वह कभी भी बदल सकती हैं. आपके बच्चे की तबियत खराब हो सकती है या बेबीसिटर ही बीमार पड़ सकती हैं. इसलिए आप हमेशा प्लान बी तैयार रखें। जिसका उपयोग आप कभी भी कर सकती हैं। जिसमें आपका दोस्त, परिवार या अन्य कोई बेबी की जिम्मेदारी को आपकी प्लानिंग फेल होने और आपके ऑफिस में होने पर निभा सके.
सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल

क्या मैटरनिटी लीव के बाद बच्चे को दूध के बजाय ठोस आहार दिया जा सकता है ?
चाइल्ड केयर एक्सपर्ट के मुताबिक पहले छह महीनों तक बच्चे को पूरी तरह से ब्रेस्ट फीडिंग पर रखने की सलाह दी जाती है, ताकि उसे सभी जरूरी पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। उसके बाद बच्चे के डाइट प्लान में ठोस आहार को शामिल किया जाता है। इससे बच्चे को पेट आसानी से भर जाता है। अगर आप काम काजी महिला हैं और ब्रेस्ट फीड नहीं करवा पा रही हैं, तो छह महीनों के बाद डॉक्टरी सलाह से मील में फ्रूट्स, दाल का पानी और दलिया देना आरंभ कर सकती है।
शरीर को पुराने आकार में लाने में कितना समय जा सकता है ?
बच्चे को जन्म देने के बाद शरीर को पहले जैसा होने के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता है, लेकिन आप खुद को छह से नौ महीने का समय दें. यह याद रखें कि आपने अपने शरीर के अंदर एक शिशु को रखा था और उसे दुनिया में लाया था, इसलिए आपका शरीर अचानक से पहले जैसा नहीं हो सकता है,लेकिन अपनी कोशिश जारी रखें। आप हेल्दी लाइफस्टाइल और अनुशासन से धीरे -धीरे ही सही अपना पुराना आकार वापस पा सकती हैं। वैसे शारीरिक प्राथमिकता के साथ -साथ आपको अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि आप परेशानी महसूस कर रही हैं या लंबे समय तक उदासी का अनुभव कर रहे हैं, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें।