कई बार हमें पता नहीं होता है, लेकिन हमें चाय पीने के तरीकों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि यह सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाए, खासतौर से जब आप चाय की शौकीन हैं। आइए जानें विस्तार से।
खुली पत्ती वाली चाय का इस्तेमाल करें

अगर आपको अधिक चाय पीने की आदत है, तो आप टीबैग्स की जगह अच्छी क्वालिटी वाली चाय पीनी चाहिए। जी हां, हम अक्सर यह गलती कर देते हैं और खुली पत्तियों वाली चाय नहीं पीते हैं, हमें लगता है कि इतनी मेहनत कौन करेगा, लेकिन सच यही है कि हेल्दी या सेहतमंद तरीके से अगर चाय लेनी है, तो आपको खुली पत्तियों वाली चाय का ही इस्तेमाल करना चाहिए। ऑफिस में कई बार ऐसा होता है कि हम टी बैग्स इस्तेमाल कर लेते हैं, वह बिल्कुल सही नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह होती है कि टीबैग्स में अक्सर धूल या चूरा होता है, जो ज्यादा कड़वा हो सकता है और उसमें एंटीऑक्सीडेंट भी कम हो सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि टी बैग्स का इस्तेमाल कम करें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपको रिफाइंड सफेद चीनी का कम से कम इस्तेमाल करना है। इससे बचना बेहद जरूरी है। साथ ही अगर जरूरत हो, तो शहद, गुड़ या स्टीविया जैसे नैचुरल ऑप्शन का इस्तेमाल कम मात्रा में करें। चाय के लिए अगर आप दूध वाली चाय पी रहे हों, तो आपको कुछ और बातों का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जैसे अगर आपको दूध वाली चाय पसंद है, तो सैचुरेटेड फैट कम करने के लिए टोन्ड, स्किम्ड या बादाम या ओट मिल्क जैसे प्लांट-बेस्ड ऑप्शन चुनें। वहीं साथ ही साथ चाय की पत्ती डालने से पहले पानी में ताजा अदरक, इलायची, दालचीनी या हल्दी उबालकर स्वाद बढ़ाएं और एंटीऑक्सीडेंट लेवल बढ़ाए
ब्रूइंग प्रोसेस का रखें ख्याल
दरअसल, चाय को सेहतमंद बनाने का भी सही तरीका यह होता है कि पानी को सही तरीके से हमेशा इस्तेमाल करना चाहिए। जी हां, पानी का तापमान, अच्छा रहता है, तभी अच्छा रहता है। इसलिए हमेशा खौलती हुई चाय पीने की कोशिश न करें। वहीं हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि आपको ताजा और फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करना है, क्योंकि पानी को फिल्टर करने से क्लोरीन, फ्लोराइड, लेड और मरकरी जैसे केमिकल और भारी धातुएं निकल जाती हैं। ये बैक्टीरिया और पैरासाइट जैसे जियार्डिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम को भी कम करते हैं। साथ ही, कुछ फिल्टर माइक्रोप्लास्टिक, यानी पानी की सप्लाई में मौजूद प्लास्टिक के छोटे-छोटे कणों को भी हटाते हैं, जो सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसलिए एक अच्छे क्वालिटी का वॉटर फिल्टर आपकी चाय का स्वाद भी बेहतर बनाएगा। पानी की क्वालिटी, कॉफी और चाय जैसे बने हुए ड्रिंक्स के स्वाद और न्यूट्रिशनल वैल्यू दोनों पर असर डालती है। इसलिए, नल के पानी के बजाय अपनी चाय बनाने के लिए शुद्ध पानी चुनें।
मील के बीच चाय पीना सही या नहीं

एक बात का आपको और ख्याल रखना चाहिए कि आपको खाने के तुरंत पहले या बाद में चाय पीने से बचना चाहिए। दरअसल,चाय में मौजूद टैनिन और उसमें भी खासकर ब्लैक टी में पौधों से मिलने वाले नॉन-हीम आयरन को शरीर में एब्जॉर्ब होने से रोक सकते हैं। इसलिए आपको चाय पीने के लिए मील लेने के बाद दो घंटे का इंतजार जरूर करना चाहिए। साथ ही इसका सेवन कम मात्रा में करें, वहीं सुरक्षित कैफीन लिमिट में रहने और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने के लिए हर दिन 2-4 कप तक ही पिएं। इस बात का भी ख्याल रखें कि आपको खाली पेट तो हरगिज चाय नहीं पीना चाहिए। हालांकि बहुत से लोग सुबह सबसे पहले चाय पीते हैं, लेकिन कुछ लोगों को खाली पेट तेज ब्लैक टी पीने से एसिडिटी हो सकती है। अगर आपको ऐसी दिक्कत होती है, तो पहले हल्का नाश्ता करें या सौंफ या अदरक की चाय जैसे हर्बल इन्फ्यूजन चुनें।
ग्रीन टी बनाते हुए
वहीं ग्रीन टी के लिए, उबलते पानी का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि यह पत्तियों को जला सकता है और चाय को कड़वा बना सकता है। तो आपको करना यह है कि इसे डालने से पहले पानी को एक या दो मिनट के लिए ठंडा होने दें। तभी यह सही रहेगा। साथ ही इसके स्टीप करने का समय भी आपको ध्यान में रखना है। आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि ग्रीन टी को 2-3 मिनट के लिए और ब्लैक टी को थोड़े ज्यादा समय के लिए स्टीप करें। ज्यादा देर तक स्टीप करने से कड़वा स्वाद आ सकता है और ज्यादा टैनिन निकल सकता है। साथ ही इंस्टैंट टी पाउडर और क्रीमर से बचें, जिनमें अक्सर छिपी हुई चीनी और ट्रांस फैट होते हैं।
चाय अलग-अलग चुनें

अगर अलग-अलग चाय को ट्राई करने की बात करें, तो चाय की दुनिया बहुत बड़ी है, इसलिए चुनने के लिए बहुत सारे ऑप्शन हैं। ग्रीन और ब्लैक टी सबसे पॉपुलर तरह की चाय हैं, लेकिन व्हाइट या ऊलोंग चाय जैसी दूसरी वैरायटी भी ट्राई करें। व्हाइट और ग्रीन टी में कैटेचिन नाम के कंपाउंड सबसे ज्यादा होते हैं, जबकि ब्लैक टी में थियोफ्लेविन्स नाम के कंपाउंड होते हैं जिनके हेल्थ बेनिफिट्स हो सकते हैं। कुछ स्टडीज बताती हैं कि ऊलोंग चाय मेटाबॉलिज्म को थोड़ा बढ़ाती है और वजन कम करने में मदद कर सकती है। इसलिए बोतल वाली चाय पीने से बचें। और अधिकतरएक्स्ट्रा चीनी या आर्टिफिशियल स्वीटनर होते हैं और स्टडीज से पता चलता है कि उनमें घर पर बनी ग्रीन और व्हाइट टी की तुलना में बहुत कम एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। अपने कैफीन के सेवन पर ध्यान दें। ब्लैक टी में ग्रीन या व्हाइट टी की तुलना में ज्यादा कैफीन होता है। ऊलोंग टी में कैफीन की मात्रा ग्रीन और ब्लैक टी के बीच होती है। अगर कैफीन से आपको घबराहट होती है, तो व्हाइट टी आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें बाकी विकल्पों की तुलना में कम कैफीन होता है। साथ ही, यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। ग्रीन टी से भी ज्यादा अगर आपको सोने में परेशानी होती है, तो दोपहर 2 बजे के बाद ब्लैक या ऊलोंग टी पीने से बचें। यह बात कॉफी और कैफीन वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स पर भी लागू होती है।
ं।