काली मिर्च और पीपल के सेवन करने के एक नहीं कई फायदे हैं। बच्चों से लेकर बढ़ों तक हर किसी के लिए काली मिर्च सेहत से जुड़े कई सारे फायदे लेकर आता है। काली मिर्च और पीपल में सेहत के लिए कई सारे गुण होते हैं। काली मिर्च से जुड़ें कई सारे पोषक तत्व होते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से काली मिर्च और पीपल से जुड़े फायदे।
काली मिर्च में मौजूद पोषक तत्व

काली मिर्च सिर्फ मसाला नहीं है, बल्कि पोषक तत्वों का अच्छा जरिया माना जाता है। इसमें एक नहीं कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। काली मिर्च में पाइपरिन, चविसिन, वोलेटाइल तेल प्रमुख तौर पर पाया जाता है, जो कि स्वाद और तीखेपन के साथ एंटीबैक्टीरियल गुण से भरपूर होता है। इसके साथ काली मिर्च में विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ए और कुछ मात्रा में विटामिन बी भी पाया जाता है। इन सभी विटामिन के जरिए इम्यूनिटी बढ़ती है, हड्डियों के लिए लाभकारी होने के साथ आंख और त्वचा के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसके साथ आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, मैंगनीज, जिंक भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह खून बढ़ाने में सहायक होता है। हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के लिए भी अच्छी तरह से काम करता है। मेटाबॉलिज्म में भी सहायक होता है।
पीपल में जुड़े पोषक तत्व और फायदे

पीपल को आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। आप इसे काली मिर्च की बड़ी बहन मान सकती हैं। पीपल में पिप्पली, पाइपिन, एसेंशियल ऑयल्स, रेजिन और एल्कलॉइड होता है। इन सभी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। विटामिन की बात की जाए, तो इसमें विटामिन सी, विटामिन ए भी पाए जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी होता है। कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम ,पोटेशियम होता है जो कि हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होने के साथ दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
बच्चों से बड़ों तक के लिए इस्तेमाल सीमित

काली मिर्च और पिपली का इस्तेमाल बच्चों से बड़ों तक सीमित मात्रा में करना चाहिए। यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है। इसके इस्तेमाल से गैस, अपच और पेट फूलना कम करते हैं। बच्चों में हल्की पाचन समस्या में उपयोगी होता है, अगर इसका इस्तेमाल कम मात्रा में किया जाना चाहिए। सर्दी-जुकाम और खांसी में भी राहत देता है। यह बलगम कम करते हैं। गले की खराश को कम करता है। यह फेफड़ों को भी मजबूत बनाता है। इसे शहद के साथ थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करना लाभकारी होता है। एंटीऑक्सीडेंट गुण संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव करता है। शरीर की थकान कम करने में सहायक होता है। आयुर्वेद में टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता है। आप काली मिर्च का सेवन कई तरह से कर सकती हैं। काली मिर्च को हल्दी दूध, सूप या शहद के साथ सेवन कर सकती हैं। काढ़े में मिलाकर भी इसका सेवन किया जा सकता है।
पीपल का सेहत के लिए फायदा और सेवन

पीपल के लिए सेहत के कई सारे फायदे हैं। पीपल एक तरह से आयुर्वेदिक औषधि है। यह खासतौर पर पाचन तंत्र को सही रखने का कार्य करती है। खासतौर पर गैस, अपच और कब्ज में राहत के साथ भूख बढ़ाने में भी सहायक होती है। पेट में कीड़े कम करने में भी मददगार साबित होती है। खांसी और दमा में भी लाभदायक बताई गई है। बलगम को पतला करके बाहर निकालने में सहायता करती है। पुरानी खांसी में भी लाभदायक मानी गई है। गले की खराश में भी आराम देती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में सहायक होती है। मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से भी बचाव करती है। लीवर के लिए भी काफी मददगार मानी गई है। कमजोरी और थकान को भी दूर करती है। जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाती है। पीपल का सेवन करने का सही तरीका यह है कि आधा पीपल पाउडर को आधा चम्मच शहद में मिलाकर इसका सेवन करें। सर्दी में आप इसका काढ़ा भी बनाकर पी सकती हैं। आप गुनगुने पानी के साथ सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकती हैं। इससे जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां भी हैं। अल्सर या ज्यादा एसिडिटी में सावधानी रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। छोटे बच्चों को बहुत ही कम मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए।
काली मिर्च से जुड़ी सावधानी

ज्यादा सेवन से पेट में जलन, एसिडिटी और गैस हो सकती है। मुंह और गले में जलन महसूस हो सकती है। जिनको गैस्ट्रिक अल्सर, एसिड रिफ्लक्स या ज्यादा जलन की समस्या है, वे सीमित मात्रा में लें या डॉक्टर से पूछें। सामान्यतः 4–5 दाने या ¼ चम्मच पाउडर प्रतिदिन पर्याप्त है। अधिक देने से पेट में परेशानी हो सकती है।काली मिर्च में मौजूद पाइपरिन कुछ दवाओं के असर को बढ़ा सकता है। अगर आप नियमित दवाइयां (ब्लड प्रेशर, शुगर, खून पतला करने की दवा) लेते हैं तो डॉक्टर से सलाह लें