पाचन तंत्र को सही रखने का अर्थ यह होता है कि आप अपने संपूर्ण शरीर को भी सेहतमंद रख सकती हैं। लेकिन इसके लिए आपके पास इस चीज की जानकारी होनी चाहिए कि आपको अपनी फूड हैबिट में सुधार लाना है या नहीं। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है। अगर आपका पाचन ठीक रहता है तो गैस, कब्ज, एसिडिटी और थकान जैसी समस्याएं कम होती हैं। यहां जानिए 5 आसान फूड हैबिट्स जो आपके पाचन को बेहतर रख सकती हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
फाइबर से भरपूर आहार लेना

आपके लिए बहुत जरूरी है कि फाइबर से भरपूर आहार लेना चाहिए। फाइबर युक्त आहार आपके आंत की सेहत को सही तरीके से चलाने में सहायक होती है। फाइबर एक तरह से आपके आंतों की सफाई करता है, साथ ही कब्ज से भी राहत देता है। आंतों की सफाई के लिए साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां , फल में सेब, पपीता और नाशपाती का सेवन करना चाहिए दालें और बीन्स का सेवन भी अधिक मात्रा में करना चाहिए। दाल में मसूर दाल, चना दाल,राजमा और मूंग दाल का सेवन करना चाहिए। आप सब्जियों में गाजर,पालक,ब्रोकली, लौकी, शिमला मिर्च का इस्तेमाल कर सकती हैं। अलसी के बीज, चिया सीड्स, बादाम और मूंगफली का भी सेवन करना चाहिए। जानकारों के अनुसार बड़े लोगों को 25 से 25 ग्राम फाइबर का सेवन हर दिन करना चाहिए।
पाचन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी

पाचन के लिए सही मात्रा में पानी पीना जरूरी है। यह एक तरह से भोजन को नरम करता है। जिससे पेट और आंत आसानी से पचा सकते हैं। पानी के कारण ही विटामिन और खनिज शरीर में सही तरह से पहुंचते हैं। मल को नरम रखता है। इससे कब्ज में राहत मिलती है। सामान्यतः वयस्कों को रोज़ 2–3 लीटर (8–10 गिलास) पानी पीना चाहिए। गर्म मौसम, व्यायाम या बीमारी में जरूरत बढ़ सकती है। सुबह उठते ही 1 गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए। इसके अलावा भोजन से 30 मिनट पहले पानी का सेवन करना चाहिए। फाइबर युक्त भोजन के साथ पर्याप्त पानी जरूर लें।
प्रोबायोटिक फूड को खाने की थाली में शामिल करना

प्रोबायोटिक फूड को खाने की थाली में शामिल करना पाचन तंत्र और आंतों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। प्रोबायोटिक्स “अच्छे बैक्टीरिया” होते हैं जो आंतों का संतुलन बनाए रखते हैं। प्रोबायोटिक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पाचन को सुधारता है। इसके साथ गैस और कब्ज कम करने में मदद करता है। इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है, एंटीबायोटिक के बाद आंतों का संतुलन बहाल करते हैं। अपने खाने की थाली में दही, छाछ, इडली डोसा या फिर ढोकला को शामिल करें। रोज 1 कटोरी ताजा दही इस्तेमाल करें। दोपहर के भोजन में छाछ बनाएं। हालांकि प्रोबायोटिक फूड को लेकर आपको कुछ सावधानी भी बरतनी है। इसमें सबसे पहले बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड या ज्यादा मीठे “फ्लेवर योगर्ट” से बचना चाहिए।
खाने को चबा कर खाना जरूरी

आपको हर बार अपने खाने को चबा कर खाना चाहिए। खाने को चा कर खाना पाचन की परली और सबसे प्रमुख प्रक्रिया है। चबाने से यह होता है कि मुंह में लार (सलाइवा) निकलती है, जिसमें एंजाइम होते हैं जो भोजन को तोड़ना शुरू कर देते हैं। अच्छी तरह चबाया गया खाना पेट और आंतों को ज्यादा मेहनत नहीं करवाता। बड़े टुकड़ों में खाना निगलने से गैस, भारीपन और एसिडिटी हो सकती है। धीरे-धीरे और चबा कर खाने से दिमाग को “पेट भर गया” का संकेत समय पर मिल जाता है, जिससे ओवरईटिंग कम होती है। जानकारों का मानना है कि हर निवाले को 20 से 30 बार चबाना चाहिए। खाने को जल्दी जल्दी खाने से बचना चाहिए। खाते समय मोबाइल से दूरी बना कर रखें। हमेशा छोटा-छोटा निवाला खाना चाहिए। आपको जंक फूड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अत्यधिक तला-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड पाचन को खराब कर सकता है। जंक फूड से कहीं न कहीं दिल की सेहत पर असर पड़ता है। ब्लड प्रेशर और शुगर को भी बढ़ाता है। कब्ज और पाचन की समस्या होती है।साथ ही वजन बढ़ाने का भी खतरा होता है। चिप्स,समोसा, पकोड़ा,बर्गर ,पिज्जा, पैकेट वाली नमकीन,कोल्ड ड्रिंक से खुद को दूर रखें।
पाचन क्रिया को बेहतर करने के लिए जरूरी टिप्स

पाचन क्रिया सही रहे तो शरीर को पूरा पोषण मिलता है और गैस, कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। पाचन बेहतर करने के लिए ये जरूरी और आसान टिप्स अपनाएं। सुबह उठकर 1 गिलास गुनगुना पानी पिएं। चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू या शहद मिला सकते हैं। इससे मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है और आंतों की सफाई में मदद मिलती है। रोज़ 20–30 मिनट वॉक या हल्का योग करें। पाचन सुधारने के लिए पवनमुक्तासन और वज्रासन फायदेमंद माने जाते हैं। आपको यह भी ध्यान रखना है कि ज्यादा तनाव से पाचन बिगड़ सकता है। ध्यान, गहरी सांस या प्राणायाम अपनाएं। अगर लंबे समय तक कब्ज, एसिडिटी या पेट दर्द बना रहे तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
पाचन तंत्र के लिए इसे न करें अनदेखा
अगर कई दिनों तक कब्ज, पेट फूलना या भारीपन बना रहे तो इसे सामान्य समझकर टालें नहीं। यह आंतों की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।लगातार जलन या खट्टे डकार आना पेट की समस्या या एसिड रिफ्लक्स का संकेत हो सकता है। समय रहते खानपान सुधारें और जरूरत पड़े तो डॉक्टर से सलाह लें। अनियमित खान-पान से खुद को बचाना है। देर रात खाना नहीं खाना चाहिए। लंबे समय तक भूखे नहीं रहना चाहिए। बहुत अधिक जंक या तला-भुना भोजन न करें।