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हर पल मिले आजाद रहने का हक, खुली फिजाएं इनके लिए भी

टीम Her Circle |  August 12, 2026

आजाद रहना जरूरी है, तभी दिमाग में भी आप आजादी की बातें घर कर पाती हैं और यही वजह है कि आजाद सोच होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि हर पल आजाद ख्याल रखने का हक हर एक महिला को क्यों होना चाहिए। आइए जानें विस्तार से। 

हर पल मिले आर्थिक आजादी

आर्थिक आजादी की बात करें, तो महिलाओं को आर्थिक बाधाओं से परे जीवन से जुड़े फैसले लेने की सुविधा मिलती है, जिससे लंबे समय तक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होती है। इसलिए महिलाओं को अपनी आर्थिक स्वतंत्रता के बारे में सोचना चाहिए। एक महिला अपने कमाए पैसों को कैसे खर्च करे और कहां निवेश करे, यह पूर्ण रूप से उस महिला पर ही निर्भर होना चाहिए और आजादी का ख्याल महिला को रखना ही चाहिए। कुछ बातों का ध्यान रखना आपके लिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी पर्सनल चेकिंग और सेविंग्स अकाउंट पूरी तरह से अपने नाम पर रखें। साथ ही अलग क्रेडिट बनाएं, इसका मतलब यह है कि आप अपना क्रेडिट कार्ड लेकर अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बनाएं। साथ ही इन बातों का ख्याल रखें कि कम से कम कुछ यूटिलिटी या क्रेडिट बिल सीधे अपने पर्सनल अकाउंट से भरें। साथ ही अपने क्रेडिट पर नजर रखें और नियमित रूप से अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें। आपके पैसों का गलत इस्तेमाल अगर आपके परिवार में भी कोई कर रहा है, तो इस बात पर नजर रखें। अपने पैसों को इस्तेमाल करने के लिए घर के किसी पुरुष से बातचीत करने की या इजाजत लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपको पूरा हक़ है कि आप हर पल आजाद ख्यालों के साथ अपने पैसों का सही इस्तेमाल कर सकें।

हर पल नया सीखने का हक

एक महिला को पूरा हक़ है कि वह उम्र के जिस पड़ाव पर भी हो, जिस परिस्थिति में भी हो, उन्हें सीखने का हक है। उसे अपने मन पर भरोसा करना चाहिए कि आपका मन क्या सीखना चाहता है और बिना किसी दबाव के आपको इसे पूरा भी करना चाहिए। आपको हर दिन हर लिहाज से अपना लक्ष्य तय करके रखना चाहिए कि आपको क्या नया सीखना है। पढ़ने, ऑनलाइन क्लास या दूसरों से बात करके नई स्किल्स सीखनी चाहिए। उसे हमेशा कुछ नया जानने के लिए उत्सुक रहना चाहिए, अपने डर का सामना करना चाहिए और नए कामों की तब तक प्रैक्टिस करनी चाहिए, जब तक वह मजबूत और कॉन्फिडेंट महसूस न करे। आपको दुनिया के बारे में सवाल पूछने से कभी नहीं घबराना चाहिए और रोज उनके जवाब ढूंढने चाहिए। आप हर महीने सीखने के लिए कोई एक नई स्किल चुनें। अकेले काम करने की कोशिश करें, जैसे यात्रा करना, साथ ही ऐसे लोगों से बात करें जिन्हें सीखना और आगे बढ़ना पसंद हो। हर हफ्ते जो कुछ भी सीखें, उसे याद रखने के लिए लिख लें। समझें कि फेल होना बेहतर करने की दिशा में बस एक कदम है। अपने पैसे सुरक्षित रखें, ताकि आप आजादी से अपना रास्ता चुन सकें।

न कहने की आजादी

आपको एक चीज तो जरूर सीखनी चाहिए, जो काम आपको पसंद न हो। उस पर न कहना सीखें। ऐसा इसलिए है कि अगर आप ऐसा नहीं करेंगी तो लोग आपका फायदा उठाएंगे और वह आपको फॉर ग्रांटेड लेने लगेंगे। न कहना अपने समय और ऊर्जा को बचाने का एक साफ़ तरीका है। इसका मतलब है कि आप अपनी ज़रूरतों को भी उतना ही महत्व देते हैं, जितना दूसरों की ज़रूरतों को। जब आप किसी अनुरोध को मना करते हैं, तो आपको किसी को लंबा बहाना या झूठी कहानी सुनाने की ज़रूरत नहीं होती। आपको चिंता हो सकती है कि लोग नाराज हो जाएंगे या आपको मतलबी समझेंगे। लेकिन सच यही है कि सबको खुश रखना सम्भव भी नहीं है। गौरतलब है कि जब आप खुद को प्राथमिकता देते हैं, तो आपको बुरा लगता है, लेकिन इस कला में माहिर आपको होना ही होगा, नहीं तो एक प्रैक्टिस आप कर सकती हैं, जैसे कि तुरंत जवाब न दें। सोचने के लिए थोड़ा समय लें। फिर सीधे और सरल शब्दों में कहें, "नहीं, मैं ऐसा नहीं कर सकता या कर सकती। एक बात को अच्छे से समझ लें, आपका समय आपका है। इसे बचाने का आपको अधिकार है।

फिर से नयी शुरुआत करने का हक

एक महिला जब चाहे और जहां चाहे फिर से शरुआत कर सकें, उन्हें किसी भी तरह से जज करने की जरूरत नहीं है। नयी शुरुआत करने के लिए उन्हें किसी भी तरह से रुकावट महसूस नहीं कराना चाहिए , न ही उनका मजाक या मखौल उड़ाना चाहिए कि अरे ये कैसी शुरुआत करने की कोशिश है। इसे क्यों फिर से शुरू करना है। एक महिला अपनी जिंदगी में हर तरह से शुरुआत कर लेनी चाहिए। एक महिला को तब पता चलता है कि वह फिर से शुरुआत करने के लिए तैयार है, जब उसे लगातार अंदर से खालीपन महसूस होता है, ऐसे में रोजमर्रा की भूमिकाओं से परे उसे अपनी पहचान नहीं दिखती, या किसी नए मकसद की ओर गहरा खिंचाव महसूस होता है। चाहे वह अपनी ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू कर रही हो या करियर को, तैयार होने के संकेतों को पहचानने से उसे साफ इरादे के साथ आगे बढ़ने में मदद मिलती है। इसलिए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

विकास करने का हक



एक महिला को पूरा हक है कि वह अपने विकास के बारे में सोचें, एक महिला आत्मनिर्भरता बढ़ाकर, अपनी स्पष्ट सोच के साथ और जीवन भर सीखते रहने का संकल्प लेकर आगे बढ़ती है। विकास रोजमर्रा के फ़ैसलों से होता है, जैसे कि अपने लिए आवाज उठाना, शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना और दूसरों की मंजूरी चाहने के बजाय अपने व्यक्तिगत मूल्यों के आधार पर फैसले लेना जरूरी है। बेहद जरूरी है कि अपनी जिंदगी की पूरी ज़िम्मेदारी ली जाये, साथ ही समाज की पुरानी उम्मीदों पर सवाल उठाएं और सोच-समझकर अपने फैसले लें। साथ ही साथ अपने दिमाग को तेज और आत्मविश्वास से भरा रखने के लिए हर तिमाही में कोई नई स्किल सीखें या किसी नए नजरिए को जानें। यह भी समझें कि रोजाना छोटी-छोटी और आसान आदतों से सेहतमंद रहने की आदत डालें। साथ ही जान लें कि कब अपनी ज़रूरतों के लिए आवाज उठानी है और कब सुनना है। साथ ही यह भी जानें कि खामोशी को कमजोरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करें।


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