अक्सर यह बात कही जाती है कि हम सभी को खुद के साथ वक्त जरूर बिताना चाहिए। खुद के साथ बिताया हुआ वक्त आपको अंदरूनी तौर पर खुद की पड़ताल करने का अवसर देता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि मी टाइम से अधिक यह जरूरी है कि आप खुद को एक घंटे का समय दें। यहां पर समय देने का मतलब यह नहीं है कि आप एक घंटा निकालकर आराम करें या फिर कहीं घूमने जाएं, बल्कि खुद पर एक घंटा काम करें। अपने लिए कुछ करें, कुछ सीखें और साथ ही अपने ही व्यस्त समय में से खुद को आजादी दें और खुद को आजाद हवा में सांस लेने का अवसर दें। आइए जानते हैं विस्तार से।
बिजी रहने से आजादी

खुद को एक घंटा का समय देने की सोच आपको मानसिक तौर पर सुखद अहसास दिलाती है। आप कई सारे तनाव से कई सारे कामों से खुद को दूर रखती हैं। इससे यह होता है कि आप मानसिक तौर पर शून्य की अवस्था पर जाती हैं और वहां पर रहकर खुद के लिए सोचना एक घंटे में आपको कई तरह की ऊर्जा से भर देता है। इस संबंध में काउंसलर श्वेता कहती हैं कि तनाव से दूर रहने का सबसे अच्छा तरीका खुद को समय देकर खुद की सोच की खुद के जीवन के कई सारे सवालों का जवाब भी खोजना है। आप नई चीजों को देखते हैं, अगर कोई समस्या है भी, तो एक घंटे का ब्रेक आपको किसी भी जरूरी विषय पर हर तरह से सोचने का खुद की बातों को समझने का अवसर भी देता है। आप इस दौरान मेडिटेशन कर सकती हैं, खुद के लिए डायरी लिख सकती हैं।
खुद के शरीर को दें आजादी

डायटीशियन अमिता तांबेकर का कहता है कि खुद का शरीर भी कई बार हमारे हर दिन के रूटीन से आजादी मांगता है। हम अपने शरीर को थकाते हुए काम करते हैं, लेकिन जिस तरह की देखभाल हमारे शरीर को मिलनी चाहिए, वो अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं। एक घंटे का समय लेते हुए हम अप ने शरीर को भी एक खूबसूरत माहौल का हिस्सा बना सकते हैं। इससे सभी वाकिफ हैं कि आपके हर दिन के एक घंटे में से हर दिन 30–60 मिनट की वॉक, योग या एक्सरसाइज़ ज़रूरी है? आप घर के काम के साथ भी एक्सरसाइज कर सकती हैं। लेकिन बाद हम खुद को आजाद करते हुए समय देने की कर रहे हैं, इसलिए आप अपने एक घंटे के मी टाइम में 15 मिनट एक्सरसाइज को दें।
ऊबाऊ होने से आजाद

खुद के नीरस जीवन से आजादी आपके जीवन को नए लक्ष्य और नए सपनों की तरफ लेकर जा सकती है। आप इसके लिए मोटिवेशनल स्पीकर से बात कर सकती हैं, उनके वीडियो देख सकती हैं, इससे आपको खुद का आत्मविश्वास बढ़ाने और खुद की दिलचस्पी से जड़े काम करने की सोच मिलती है। नया हुनर सीखना या पुरानी हॉबी अपनाना मानसिक संतुलन में कैसे मदद करता है। आप खुद की पहचान फिर से कायम करने की सोच सकती हैं। यह आपको फिर से क्रिएटिव तौर पर आजाद होना और खुले हला में सांस लेने का अवसर भी देता है। खुद के लिए एक घंटा निकालकर खुद के ऊबाऊ वक्त को अपने लिए दिलचस्प बना सकती हैं।
दूसरों के अधीन रहने की आजादी

यह बहुत जरूरी है कि आप किसी अन्य पर पैसे और बाकी चीजें के लिए अधीन न रहें। आपके लिए कमाना बहुत जरूरी है। जब आपके जेब में पैसे होंगे, तब आपको किसी और से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक निजी बैंक में सीनियर मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत प्रिया दीक्षित का कहना है कि अगर आपके पास पैसे रहेंगे, तो आप बचत और खर्च दोनों कर सकती हैं। आर्थिक आजादी का असर आपकी हर दिन के साथ आपके जीवन पर होता है। इसलिए एक घंटे का सेल्फ टाइम निकालकर अपने ज्ञान को बढ़ाएं। अपने जीवन को प्रगति दें।
एक घंटे की आजादी में क्या करें?
आप सबसे पहले अपने फोन को एक तरफ रख दें। इसके बाद आप 15 से 20 मिनट मेडिटेशन करें। जर्नल लिखें, संगीत सुनें, अपने शरीर की देखभाल के लिए एक्सरसाइज करें। नई भाषा या फिर नया कोर्स सीख सकती हैं। किताब पढ़ना भी इसमें शामिल है या फिर किसी तरह की कोर्स करना या फिर घर से शुरू होने वाले बिजनेस के बारे में रिसर्च करने जैसे कई सारे काम कर सकती हैं। बिना किसी अपराधबोध के अपनी पसंद का काम करना । सबसे जरूरी खुद को खुश रखना है। दोस्तों से मिलना और उनके साथ कुछ सेहतमंद कार्य करना चाहिए। इससे आपके जिंदगी में भी सकारात्मकता आएगी।