ना बोलने की कला हर किसी को नहीं आ सकती है। जी हां, अक्सर देखा जाता है, तो जो व्यक्ति अपने जीवन में ना बोलने की पॅालिसी को अपनाता है, वो दूसरों के नजर में तीखा बनता है लेकिन खुद के जीवन को कई तरह के बोझ से दूर रखता है। महिलाओं में यह खूबी कम देखने को मिलती है। हालांकि यह बात समझना जरूरी है कि ना बोलना किसी बात को ठुकराना नहीं है। हमारे जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब हमें ना बोलना जरूरी होता है, लेकिन किसी ना किसी संकोच के कारण हम ना नहीं बोल पाते हैं। कई महिलाएं सामाजिक दबाव और रिश्तों की चिंता के कारण ना कहने में संकोच करती हैं। ऐसा करना मानसिक विकास के लिए सही नहीं है। महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि कब और कहां ना बोलना चाहिए और इसके पीछे की कला क्या है। आइए जानते हैं विस्तार से।
अपना महत्व समझना

एक प्राइवेट बैंक की कर्मचारी प्रिया दीक्षित बताती हैं कि न बोलना आसान नहीं होता है। लेकिन कई बार न बोलना हमें हमारा महत्व को समझाता है। मेरी निजी जीवन में भी कई बार न बोलना मुझे जरूरी लगता है, लेकिन किसी ना किसी वजह से ऐसा हो नहीं पाता है। लेकिन मेरा मानना है कि न बोलना काफी जरूरी होता है। ना बोलना विरोध को नहीं दिखाता है, बल्कि आप अपनी बात रखते हुए भी किसी को ना कह सकती हैं। इससे यह भी होता है कि वक्त के साथ आपको अपना महत्व समझाता है।
संयम से प्रतिक्रिया देना

हाउसवाइफ कविता दुबे का मानना है कि ना बोलना आसान नहीं होता है। ना बोलने की भी एक कला होती है। इस कला को अपनाते हुए आपको ना बोलना चाहिए। साथ ही अगर आपको जिसे भी ना बोलना है, पहले उसकी पूरी बात को सुनें और फिर उसके बाद आपको संयम के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए। इससे आप अपनी बात भी रख पायेंगे और साथ ही सामने वाले व्यक्ति को आपका बताव बुरा भी नहीं लगता है। संयम से प्रतिक्रिया देना आपको मानसिक तौर पर भी संतुष्ट रखता है। साथ ही आपकी सोचने की क्रिया को भी कीमती बनाता है। आप बेकार की बातों का हिस्सा नहीं बनती हैं।
'जाने दो' सबसे जरूरी

लेखक संजू पांडे का मानना है कि चीजों को जाने देना भी हमारे लिए जरूरी है। अगर आपसे कोई काम नहीं हो रहा है या फिर आपका कोई काम करने का मन नहीं कर रहा है, तो आपको जाने दो की पॅालिशी को अपना चाहिए। किसी काम के ना होने पर या फिर ना बोलने के बाद अगर सामने वाले व्यक्ति का स्वभाव आपको अटपटा लग रहा है या फिर उसका असर आप पर हो रहा है, तो आपको खुद से जाने दो कहना चाहिए। छोटी बात हो या बड़ी किसी भी चिंता में नहीं पड़ना चाहिए। जाने दो की सोच आपके जीवन से भारीपन हो हटा देती है।
अपनी बात पर कायम रहना

पत्रकार साधना सिंह का कहना है कि हमारे जीवन में अपनी बात पर कायम रहना बहुत जरूरी है। अगर हम अपनी बात पर कायम रहते हैं, तो इसका मतलब यह होता है कि हम अपने मन का काम कर रहे हैं, ऐसा काम कर रहे हैं, जो कि मानसिक तौर पर हमें खुश रखता है। किसी चीज को या फिर किसी काम को नहीं करने का मन करता है , तो अपनी बात पर अपने फैसले पर कायम रहें। यह आपके जीवन को सही तरह से आगे बढ़ाता है।
अपनाएं यह तरीका

ना बोलने के लिए महिलाएं कई तरीके भी अपना सकती हैं। अगर आपको सीधे ना कहना ठीक नहीं लगता है, तो ऐसे वाक्य अपनाएं, जो आपके ना को सपोर्ट करती हैं। जैसे कि अभी मैं यह नहीं कर पाऊंगी, यह मेरे लिए मुमकिन नहीं है, या फिर धन्यवाद, लेकिन मैं यह काम नहीं कर सकती हूं।