प्यारी मां,
शादी के बाद हर लड़की की तरह मुझे भी तुम्हारी हर दिन याद आती, खासकर अपने पसंदीदा खाने के समय, घर देरी से आने के समय तुम्हारी फ्रिक से भरी आवाज की याद आती। मेरे जन्मदिन पर तुम सामने न होती, लेकिन तुम्हारा मैसेज या फोन जरूर आता और तुम कहती कि अपने लिए कुछ अच्छा बनाकर खा लेना। लेकिन सच कहूं तो, पहले तुम याद आती थी और मां बनने के बाद अब तुम समझ आने लगी हो। खासकर एक बेटी की मां बनने के बाद, जो चिंता की लकीरें मैं तुम्हारे माथे पर अपने लिए देखा करती थी, वो अब मुझे मेरे माथे पर महसूस होने लगी है। जून में तुम्हारी नातिन(नतिनी) को 2 साल हो जायेंगे। एक मां बनने के सफर में, मैंने और तुम्हारी नातिन ने 2 साल पूरे कर लिए हैं। आप जानती हैं मां ! जब बेटी के साथ मेरा पहला साल था, तो उस वक्त मां की जिम्मेदारी अधिक थी और एक वर्किंग महिला होने की जवाबदेही मैंने कम उठाई। हालांकि दूसरे साल ऐसा न रहा। जैसे-जैसे आपकी नातिन अपने पैरों पर चलने लगी, तो मेरी मां बनने की जिम्मेदारी उसके जमीन पर पड़ते हुए कदमों की ताल की तरह बढ़ने लगी और मुझे याद आयी तुम। मैं सोचती रही कि किस तरह आखिर कैसे तुमने हम तीन-भाई बहनों को बड़ा किया होगा। मुझे याद है कि तुम कहा करती थी कि कई बार भाई को स्कूल से लाने के लिए, तुम हम दोनों बहनों को घर में बंद करके ताला लगाकर जाती या फिर पड़ोस की आंटी के पास छोड़ जाती। मेरे लिए अब यह पड़ोसी वाली सुविधा नहीं है मां, अब पहले जैसे लोग और पहले जैसी दुनिया नहीं रही। मैंने तुम्हारी नातिन को डे-केयर भेजने का फैसला लिया। आज वो बीते 1 साल से डे-केयर जाती है। वहां उसका ध्यान अच्छे से रखा जाता है। लेकिन दफ्तर में लैपटॉप पर उंगलियां घुमाते हुए भी मेरा ध्यान घड़ी की सुई की तरह बेटी पर रहता है। आपने तो, हमें शादी के बाद विदा किया। लेकिन मैंने अपनी बेटी को 1 साल की उम्र के बाद ही विदा किया। एक वर्किंग मां के लिए अपने बच्चे को किसी और के हाथ में सौंप कर आने का फैसला, हर दिन एक दर्द भरी दुविधा बन जाता है। आप जानती हैं, बेटी हर रात को सोने से पहले मेरी गोदी में आकर एक ही बात बोलती है, मां स्कूल नहीं जाना, मैं पूछती कि कहां जाना है, तो कहती मां के पास रहना है। एक मां और बेटी का रिश्ता ऐसा ही होता है, चाहे कितनी उम्र बीत जाए, मां के पास रहने का सुखद एहसास एक बेटी और मां का रिश्ता ही समझ सकता है। मुझे याद है जब आप गांव जाती, तो मैं रास्ते पर जाकर बैठ जाती। भाई मुझे यह कहकर रोज बहलाता कि मां आज आएगी और मैं सुबह से शाम तक रास्ता देखती रहती और तुम नहीं आती। एक मां बनने के बाद मुझे तुम और अधिक समझ आने लगी, जब बेटी की पसंद का खाना मेरा बन गया, उसके लिए बनाई गई बिना नमक की दाल खिचड़ी मेरे भी टिफिन का हिस्सा बन गई। मां आपको याद है कि एक बार मुझे पापा ने कहा कि या तो पिकनिक का पैसा मिलेगा या फिर मेरी पसंद की गुड़िया और रोते हुए मैंने दोनों लिया और आपने मुस्कुराते हुए मुझे दोनों दिया। बेटी से भी रोज पूछती हूं फोन पर कि क्या लेकर आऊं, तो कहती है मां, चॉकलेट चाहिए। जहां पहले मेरे शॉपिंग लिस्ट में खुद के लिए कपड़ों और सामानों की लिस्ट रहती थी, तो वहीं अब खिलौनों का खजाना रखा है। सच कहूं, तो इस खत को लिखने से पहले मैं कुछ देर सोचती रही कि एक मां बनने के बाद मुझे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और मैंने किस तरह के समझौते किए हैं। लेकिन असल मायने में मुश्किल और समझौते से अधिक बेटी ने मुझे हिम्मत और खुशी दी। शाम को जब दफ्तर से लौट कर उसकी पहली झलक का इंतजार करना मेरे लिए मुश्किल हो जाता है। जब भी उस तक पहुंचने में शाम को रास्ते में मुझे देरी होती, तो दिल की धड़कन तेज और आंखों के आगे उसका चेहरा घूमने लगता। मां बनने के बाद मुझे तुम्हारी हर बात और हर फ्रिक का अहसास हुआ। जब तुम कहती कि बच्चे खुश रहते हैं, तो मां खुश रहती है, तो मैं इस बात को सुन कर भूल जाया करती या फिर हंसी में उड़ा देती। अब इस मां वाली खुशी का एहसास होता है, मां। हां, यह भी सच है कि तुम साथ होती, तो उसे संभालने में मेरी चिंता न के बराबर रहती। जब भी तुम्हारे पास मायके आती हूं, तो घर में पैर रखते ही मैं यह भूल जाती हूं कि मैं मां हूं और फिर से बेटी बन जाती हूं और मेरी बेटी आपकी बेटी बन जाती है। जहां आप मुझे प्लेट में हलवा निकालकर खाने के लिए देती, तो अपनी नातिन के पीछे भागकर आप उसे हलवा खिलाती। मेरे माथे पर पड़ने वाली चिंता की लकीरें मां तेरी दहलीज पर आकर मिट जाती। अब, तो वह बोलती है, कहती है, मां ऑफिस नहीं जाना, मेरे साथ रहना और सच मानिए दिल टूट-सा जाता है। आंखें भर आती है और फिर सबसे ज्यादा मां तेरी याद आती है।