फग , नोएडा में रहने वालीं एकता नाहर ने अपने जीवन की एक कठिन परिस्थिति से खुद को निकाला खुद को कला और प्रकृति के करीब लाकर। आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से।
डिप्रेशन में थी

एकता कहती हैं कि एक व्यक्तिगत परेशानी की वजह से मैं डिप्रेशन में आयी और उसके बाद कई सालों तक मैं डिप्रेशन में ही जिंदगी गुजार रही थी। मैंने लंबे समय तक अपने घर में किसी को भी नहीं बताया था मेरी परेशानी के बारे में। मैं अकेले एकदम छोटे से घर में रहती थी। जॉब छूट गई थी मेरी और जिंदगी में वहां से आगे कैसे बढूं, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। जाहिर है कि मैं मेरे घर वालों को परेशान नहीं करना चाहती थी उस वक़्त। मैं सोशल मीडिया से भी हट गई थी, सबसे डिस्कनेक्ट हो गई थी। मेरे दिमाग में सच कहूं, तो उस वक्त सुसाइड (आत्महत्या) करने का भी ख्याल आने लगा था। लेकिन उस दौर में एक उम्मीद की किरण जगी और मेरी जिंदगी में एक दोस्त का आगमन हुआ, जिन्होंने सिर्फ मुझे पॉजिटिविटी के साथ आगे बढ़ने का हौसला दिया और मेरी जिंदगी नयी तरह से शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
जिन्दगी फिर से शुरुआत करने का नाम है
एकता कहती हैं कि इन सबके बीच मेरी जिंदगी में आशीष आये और उन्होंने मुझे कलर्स गिफ्ट किया और मुझसे कहा कि अपनी जिंदगी में रंग भरो और क्रिएटिव कामों में खुद को शामिल करो, फिर मेरी जिंदगी में मेरा पेट ( पालतू जानवर) कॉफी आया और इन सबके साथ, मैंने दुनिया को नए नजरिये से देखना शुरू किया। धीरे-धीरे DIY चीजें बनाने लगी मैं। घर सजाने की चीजें, मैंने अपने ही घर को सजाना शुरू कर दिया, मुझे यह सब अच्छा लगने लगा था। लेकिन फिर भी इस पूरी प्रक्रिया में मुझे पांच साल लगे। लेकिन आशीष और मैंने तय किया था, हम मेडिसिन और डॉक्टर के बिना इसे ठीक करने की कोशिश करेंगे और इस तरह से सबकुछ ठीक होता गया और मेरी जिंदगी में नए रंग आए। फिर मैंने धीरे - धीरे इसे बिजनेस का रूप दिया। खास बात यह रही कि सोशल मीडिया पर लोगों का रिस्पॉन्स बहुत अच्छा मिला। मैंने बीटेक किया हुआ है, लेकिन अब नौकरी नहीं करती हूं, इसको ही बिजनेस का रूप दिया है और काफी खुश हूं। प्रकृति और रंगों के पास आकर। मैंने अपने ब्रांड 'रंगसाजी' की शुरुआत इसी सोच से शुरू किया कि ज़िन्दगी को खत्म करना नहीं, बल्कि नए तरीके से जीना ही जिंदगी है। मेरे ब्रांड की खूबी यह है कि यह सस्टेनेबल होने के साथ-साथ कस्टमाइज्ड और परसनलाइज्ड है, लोग इससे इमोशन और कनेक्ट महसूस करते हैं, क्योंकि मैं किसी भी प्रोडक्ट को सजाती भी उसी तरह से हूं।
लड़कियां खुल कर बात करें

एकता कहती हैं कि मेरा मानना है कि कई लड़कियां यह सोच कर कि लोग उन्हें जज करने लगेंगे, उन्हें समाज क्या कहेगा, अपने अंदर का दर्द छुपा कर रखती हैं, जबकि ऐसे विषयों पर खुल कर बातचीत करना बेहद जरूरी है। लड़कियों को चुप नहीं होना चाहिए, बातचीत करनी चाहिए, क्योंकि हल उससे ही निकलता है, मन उससे ही हल्का और शांत होता है। वह कहती हैं कि कला मेरे लिए और ईंधन का काम करती हैं, और यह भी मानती हैं कि लोग जज करते हैं, तो करें, लड़कियों को खुद को खोलना जरूरी है, ताकि आपकी जिंदगी आपके लिए एक मोटिवेशन बनें। आपको सबसे पहले खुद पर गर्व होना चाहिए और खुद को कोसना बंद करना चाहिए।
अन्य महिलाओं से शेयर करें महिलाएं

एकता कहती हैं कि वे जहां अपने होम टाउन में रहती थी, वहां काम खत्म करने के बाद दोपहर या शाम में महिलाएं आपस में जरूर बातचीत करने के लिए बैठती हैं और एक-दूसरे की खुशियां और दुःख सुनती हैं, गांव में भी होता है और यह होते रहना चाहिए, क्योंकि महिलाओं का शेयर करना जरूरी है, ताकि मन में बात भर कर वे कोई और गलत कदम न उठाएं। उनके जीवन में उन्हें जिनका भी साथ अच्छा लगता है, उनसे बातचीत करनी चाहिए। मेट्रो में यह चलन कम है , लेकिन इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए और सबसे पहले अपने बारे में और अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में सोचना चाहिए। नहीं तो फिर कोई भी काम नहीं आता है। एकता मेंटल हेल्थ को लेकर कई तरह के वर्कशॉप लेती हैं और महिलाओं को जागरूक करती हैं और उन्हें संतुष्टि मिलती है, जब उन्हें कई मेसेज आते हैं कि एकता ने उनकी जिंदगी में बदलाव किया।
प्रकृति से जुड़ीं, जगी नई उम्मीद
एकता बताती हैं कि वह जहां नोएडा में रहती हैं, वहां हाई राइज बिल्डिंग होने के बावजूद, उन्होंने बालकनी को अपनी कलाकारी से इस तरह से सजाया है कि वहां 200 से अधिक चिड़िया आती रहती हैं। एकता कहती हैं कि ये सारी चीजें करके उन्होंने खुद के लिए एक नयी और रंग-बिरंगी दुनिया खोज निकाली और वे आगे भी ऐसे ही रंग और प्रकृति से जुड़ कर अन्य महिलाओं की जिंदगी को संवारना चाहती हैं।
All Pictures credit : @ektanahar