खेती को सस्टेनेबल तरीके से करने का तरीका पर्यावरण की सुरक्षा करता है। ऐसे में कई सारे तरीके हैं, जिससे सस्टेनेबल खेती को प्रमोट किया जा सकता है। इसके लिए शिक्षा से लेकर डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा सकता है। कोर्स, शिक्षा और ट्रेनिंग के माध्यम से प्रभावी तरीके से बढ़ावा दिया जा सकता है। आइए जानते हैं विस्तार से।
जीरो से शुरूआत
सस्टेनेबल खेती को लेकर सबसे जरूरी है कि शिक्षा के जरिए जीरो से शुरुआत की जाए। जी हां, स्कूल में बच्चों को शुरू से सस्टेनेबल खेती के फायदे बताने चाहिए। कृषि को खास विषय बनाकर मिट्टी का सरंक्षण, जल प्रबंधन, कचरे से खाद बनाने जैसे कई सारे कार्य बताए जाते हैं। उसका महत्व बताया जाता है। साथ ही बच्चों को सस्टेनेबल खेती के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए और इसकी बारीकी समझाने के लिए फील्ड विजिट कराना चाहिए। इसके साथ एक्सपर्ट की खास क्लास भी होन चाहिए। इससे बच्चों को सस्टेनेबल खेती के बारे में हर तरह की जानकारी मिलेगी। साथ ही उनकी दुविधा भी दूर होगी।
किसानों के लिए प्रशिक्षण जरूरी
किसानों को सस्टेनेबल खेती से जोडने के लिए भी कई तरह के कार्य किए जा सकते हैं। गांव जाकर कैंप लगाया जा सकता है और इसके साथ ही छोटे-छोटे प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा सकते हैं और किसानों को प्रोजेक्ट के जरिए या फिर लाइव टास्क के जरिए सस्टेनेबल खेती के बारे में बताया जा सकता है। साथ ही आप कई सारे उदाहरण देकर भी सस्टेनेबल खेती के महत्व को समझा सकती हैं। स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण सामग्री और प्रदर्शन (डेमो) उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे भी काफी लाभ होगा। वर्कशाप के जरिए सफल किसानों के अनुभव साझा किए जा सकते हैं।
डिजिटल दुनिया का सहयोग
सस्टेनेबल खेती के लिए डिजिटल दुनिया का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। मोबाइल ऐप, वीडियो और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से किसान कहीं से भी सीख सकते हैं। इसके साथ ही छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाए जाएं, इसका यह फायदा होग ताकि किसान अपनी सुविधा के अनुसार सीख सकते हैं। इससे उनके समय भी उपयोग सही तरीके से होता है।
प्रमाणपत्र से मिलेगा हौसला
एक तरह की ट्रेनिंग का आयोजन किया जा सकता है। इसका यह फायदा होगा कि 10 दिन या फिर एक सप्ताह के कोर्स के लिए या फिर 3 दिन की ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों और युवाओं को प्रमाणपत्र दिए जा सकते हैं। इससे उनका हौसला बढ़ता है। साथ ही रोजगार मिलने के अवसर भी मिलते हैं।