पहली कमाई। पहला विश्वास। सफलता की पहली सीढ़ी। सपनों की पहली उड़ान। पहली कमाई का इंतजार नौकरी के पहले दिन से शुरू होता है। महीने की अंतिम तारीख को पहली कमाई का चेक मिलने की खुशी और अकाउंट में पहली कमाई का आना, आपको एक दिन में अमीर होने की खुशियां दे जाता है। दोस्तों के लिए पार्टी। परिवार के लिए तोहफे। पहली कमाई का आधा से अधिक हिस्सा खर्च हो जाता है। एक महिला के लिए पहली कमाई और पहला चेक कितना मायने रखता है। यह एक महिला से अच्छा कोई और नहीं जान सकता है। पहली कमाई एक महिला के लिए आत्मनिर्भरता का आकाश लेकर आती है, जो यह बताती है कि आप अपने लिए काफी हो। आप हर उस जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं, जिससे आपने खुद को दूर रखा है।
प्राइवेट बैंक में नौकरी कर रहीं, प्रिया दीक्षित बताती हैं कि पढ़ाई के साथ उन्होंने हमेशा नौकरी करने की ठान ली थी। शादी के साथ भी उनकी यह शर्त रही है कि वह लगातार नौकरी करती रहेंगी। उन्होंने यह किया भी। प्रिया कहती हैं कि एमबीए फाइनेंस में पूरा करने के पहली पगार भगवान के सामने रखीं और फिर अपने पिता के हाथ में दी और उन्होंने यह सिलसिला जारी रखा और हर महीने की सैलरी पिता को दिया करती थी और इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।
हाउसवाइफ कविता पांडे के लिए भी पहली कमाई अपनों का प्यार बन कर सामने आई। कविता का कहती हैं कि फिलहाल मैं हाउसवाइफ हूं और घर से ही काम करती हूं। लेकिन अपने पहले पे चेक के साथ मैंने अपनी मां और परिवार के लिए कई चीजें खरीदीं। इसे खरीदते हुए मुझे बहुत खुशी महसूस हुई और अपनी हर बार की सेलरी से मैं अपने परिवार के लिए कुछ न कुछ जरूर लेकर जाती। कंटेंटे राइटर आस्था श्रमा कहती हैं कि मेरी पहली पगार से मैंने अपनी मां के लिए साड़ी खरीदी और खुद के लिए कपड़े। मेरी पहली पगार 8 हजार थी और इसी से मैंने अपनी मां के लिए साड़ी खरीदी।
उल्लेखनीय है कि इन महिलाओं के विचार से यही मालूम होता है कि पहली कमाई जहां एक महिला के लिए आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की कभी न खत्म होने वाली शुरुआत लेकर आती है। ठीक इसी तरह पहली पगार परिवार के साथ और महत्व को भी दिखाती है।