सस्टेनेबल पेरेटिंग करना सबसे आसान पर्याय है। इसके लिए आपको अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं। केवल कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना है और आप आसानी से अपने साथ-साथ अपने बच्चे की जीवनशैली को भी बदल सकती हैं। यह न केवल आपके बच्चों को पर्य़ावरण का महत्व सिखाता है, बल्कि यह आपे घर के माहौल को भी किफायती बनाता है। सस्टेनेबल पेरेटिंग का यह अर्थ होता है कि आप किस तरह अपने बच्चे के लिए एक ऐसा पर्यावरण बनाते हैं, जहां पर फिर से सामान का इस्तेमाल करना। लकड़ी के उत्पादन का इस्तेमाल करना और कम चीजों के साथ अच्छे वातावरण में जीना जीवन के लिए सबसे जरूरी है, यह सीख मिलती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर सस्टेनेबल पेरेटिंग को आप कैसे अपने बच्चे के टाइम टेबल में शामिल कर सकती हैं।
बच्चों की फटी हुई किताबों से प्रोजेक्ट बनाना

स्कूल में बच्चों को शुरुआती समय में कई सारे प्रोजेक्ट बनाकर लेकर जाने होते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप बाहर से कोई सामान नहीं खरीदें। घर में मौजूद बच्चों की पुरानी फटी हुई किताबों और कवर से साथ ही कवर और किताबों में मौजूद फोटो का इस्तेमाल करते हुए प्रोजेक्ट तैयार कर सकती हैं। यह आपको काफी कम खर्च में एक अच्छा रिजल्ट देता है और बच्चों को अपने साथ प्रोजेक्ट करने के लिए बिठाएं। इससे बच्चों को भी समझ आएगा कि किस तरह फटी हुई किताबों और कवर का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए करना है। आप बिना किसी प्रोजेक्ट के भी बच्चों के साथ वीकेंड या फिर हर दिन डेली कई तरह की क्रिएचिव चीजें बना सकती हैं। इससे आपके बच्चों का ध्यान टीवी और मोबाइल से दूर जाता है और बच्चे कुछ अच्छा करना सीख पाते हैं।
पेंसिल का इस्तेमाल करना बच्चों के लिए

आप बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पेंसिल का इस्तेमाल करना सिखाए। पेंसिल से लिखना आसान होता है और गलती होने पर उसे मिटाया जा सकता है। इससे बच्चों के हाथों की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। पेंसिल से साथ लिखा हुआ मिटाया जा सकता है। ऐसे में बच्चों को पेंसिल के साथ जीवन की यह सीख मिलती है कि आप अपनी गलतियों को भी मिटा सकती हैं। पेसिंल काफी लंबी होती है, पूरी तरह से खत्म होने तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए लंबे समय तक इसका उपयोग किया जा सकता है। पेंसिल के छिलकों से भी आप किसी न किसी तरह की एक्टिविटी कर सकती हैं।
कागज और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना

जितना हो सके, बच्चों को कागज और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना सिखाएं। आप हल्दी, बीट और पालक के साथ कई तरह के रंग तैयार कर सकती हैं और बच्चे इन रंगों के साथ अपने सोच की दुनिया को पन्नों पर उतार सकते हैं। यह भी ध्यान दें कि प्राकृतिक रंगों में हानिकारक रसायन कम होते हैं, इसलिए वे बच्चों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प हैं। बच्चे चित्रकारी, हस्तकला और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपनी कल्पनाशक्ति विकसित कर सकते हैं। आप भी इस क्रिया में बच्चों का साथ दें और इससे आपको भी मानसिक तौर पर आराम मिलता है। चित्रकारी और हस्तकला आपके दिमाग को कहीं न कहीं शांत करने का काम आसानी से करती है।
पर्यावरण से दोस्ती कराना

बच्चों को अधिक से अधिक फूलों और पत्तों को दिखाएं और उन्हें स्पर्श करने दें। बच्चों को इनकी अहमियत बताएं। इसके लिए अपने घर में बालकनी गार्डन बनाएं। आप खुद भी बच्चों को बाहर गार्डन में लेकर जा सकती हैं। बाजार से फूल लाकर माला बना सकती हैं। कई तरह की चीजें फूलों से बना सकती हैं। इस तरह आप बच्चों से पर्यावरण की दोस्ती करा सकती हैं। बच्चों को फूलों और पेड़ों की कहानी सुनाएं। यह भी बच्चों को पर्यावरण से जोड़ती हैं। पेड़ न काटना , पेड़ और पौधा लगाने जैसी कई कहानियां आप सुना सकती हैं।
फिर से इस्तेमाल करने की सीख

घर में पुरानी बोतल, डिब्बे या कपड़ों का दोबारा उपयोग करें ताकि बच्चे देखकर सीखें, पुराने कार्डबोर्ड, अखबार या डिब्बों से खिलौने, ग्रीटिंग कार्ड या क्राफ्ट बनवाएं।· खिलौना या किताब खराब हो जाए तो उसे फेंकने के बजाय ठीक करने की कोशिश करें। · छोटे हो चुके कपड़े, किताबें और खिलौने ज़रूरतमंद बच्चों को देने के लिए प्रेरित करें। जब बच्चा किसी वस्तु का दोबारा उपयोग करे, तो उसकी तारीफ़ करें। इससे वह इस आदत को अपनाने के लिए प्रेरित होगा