एक बात आपको जरूर समझनी चाहिए कि बच्चे बच्चे होते हैं, उन्हें जीनियस बनाने की कोशिश में जल्दबाजी और कठोर नियम तय करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपना बचपन जीने दें। आइए जानते हैं विस्तार से।
आनंद लेना है जरूरी

बचपन का आनंद लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह दिमाग की उस बुनियादी बनावट को तैयार करता है, जो लंबे समय तक अच्छी सेहत, सीखने और सफलता के लिए जरूरी है। गौरतलब है कि जब किसी बच्चे पर जीनियस बनने का दबाव डाला जाता है, तो वे अक्सर उन अनुभवों से वंचित रह जाते हैं, जो उन्हें असल रूप में बुद्धिमान बनाते और मजबूती को बढ़ावा देते हैं।
खेलना है बच्चे के लिए दिमागी कसरत
खेलना दिमाग के लिए बेहद जरूरी चीज है, दरअसल, न्यूरल कनेक्शन के लिए खेल जरूरी है और खेल हजारों न्यूरल रास्ते बनाता है, जो बाद में जिंदगी में मुश्किल सोच-विचार में मदद करते हैं। खेल के जरिए ही बच्चे गणित, विज्ञान और भाषा अपने आप सीखते हैं। साथ ही इस बात को भी समझना जरूरी है कि रचनात्मकता और समस्या-समाधान भी जरूरी है कि बिना किसी रोक-टोक के खेला जाने वाला खेल डाइवर्जेंट थिंकिंग सिखाता है और एक ही समस्या के कई हल ढूंढने की काबिलियत भी, इसलिए बच्चों को कभी भी खेलने से न रोकें। गौरतलब है कि अगर आप दबाव में रहेंगे तो असल में इस रचनात्मक सोच को खत्म कर देगा।
इमोशनल बॉन्डिंग

अगर हम इमोशनल बॉन्डिंग की बात करें, तो मानसिक स्वास्थ्य के जोखिम का मुख्य कारण माता-पिता का बहुत ज्यादा दबाव देना होता है और फिर बच्चों में चिंता, डिप्रेशन और कम आत्म-सम्मान जैसी भावनाएं जागृत हो जाती हैं। साथ ही जब बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता उन्हें सिर्फ उनकी उपलब्धियों की वजह से प्यार करते हैं, तो उन्हें स्वस्थ रिश्ते बनाने में मुश्किल होती है और वे बड़े होने से पहले ही बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकावट का शिकार हो सकते हैं। गौरतलब है कि जिन बच्चों को खेलते समय गलतियां करने की आजादी होती है, वे असफलता का सामना करना सीख जाते हैं। इससे वे उन बच्चों की तुलना में ज्यादा फ्लेक्सिबल बनते हैं, जो असफलता बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
समझें इस बात को भी
रिसर्च से पता चलता है कि बहुत ज्यादा IQ होना, ज़िंदगी में क्रिएटिव सफलता की गारंटी नहीं है। जी हां, काफी स्मार्ट होने के साथ-साथ, ज्यादा इमोशनल इंटेलिजेंस और जुनून होना, अक्सर बड़े होने पर मिलने वाली सफलता का ज्यादा बेहतर संकेत होता है। इसलिए जुनून को बनाए रखना जरूरी होता है, बहुत से लोग जो आगे चलकर जीनियस बनते हैं, वे बचपन में कोई विलक्षण प्रतिभा वाले बच्चे नहीं होते हैं, बल्कि उन्होंने बस एक ऐसा क्षेत्र ढूंढ लिया होता है, जिससे उन्हें प्यार था और वे उसी रास्ते पर चलते रहे। दबाव, सीखने को एक फर्ज बना देना बच्चों से उनकी खुशी छीन लेना है, इसलिए ऐसा करने से पूरी तरह से बचें।
सामाजिक और जीवन कौशल

एक बात की समझ आपको और होनी चाहिए कि सामाजिक बुद्धिमत्ता भी बच्चे में खेल-खेल के ही आती है, जी हां, जब वह अपने तरह के अन्य बच्चों के साथ खेलता है या मिलता है, तो सरल खेलों के माध्यम से बच्चे बातचीत, सहानुभूति और संघर्ष समाधान सीखते हैं। उन्हें जल्दबाजी में उच्च शिक्षा में धकेलने से वे सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ सकते हैं या अपने हम उम्र साथियों से जुड़ने में असमर्थ हो सकते हैं। गौरतलब है कि स्वतंत्रता भी बच्चों के लिए बेहद जरूरी होती है। बच्चों के नेतृत्व में खेले जाने वाले खेल स्वायत्तता और निर्णय लेने के कौशल का विकास करते हैं। दबाव और अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम बच्चों को वयस्कों की स्वीकृति पर अत्यधिक निर्भर बना सकते हैं।