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परीक्षा के मौसम में बच्चे नहीं पेरेंट्स करें ये तैयारी

टीम Her Circle |  February 13, 2026

हर तरफ परीक्षा का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में बेहद जरूरी है कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि पेरेंट्स बेफिजूल बच्चों के पीछे न पड़ जाये। आइए जानें विस्तार से कि कैसा हो पेरेंट्स का रिश्ता। 

बनें दोस्त 

यह बेहद जरूरी है कि परीक्षा के मौसम में, आपकी भूमिका निर्देशक से बदलकर एक सुविधादाता और भावनात्मक सहारा बन जाए और आपका प्राथमिक लक्ष्य एक स्थिर, तनावमुक्त वातावरण प्रदान करना है,जो आपके बच्चे को बिना किसी हिचकिचाहट के अच्छा माहौल दे और ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाये। इसलिए आपको एक शानदार पेरेंट्स बनने से ज्यादा एक दोस्त बनने की कोशिश करना है, न कि कोई महान इंसान बनने की कोशिश करना है। एक अभिभावक के रूप में आपको बिना किसी शर्त के अपने बच्चे के साथ बैठना होगा, उनसे बात करनी होगी और उनसे पूछना होगा कि वे अपनी आगामी परीक्षाओं के बारे में कैसा महसूस करते हैं, खुलकर बात करें और उन्हें भी खुलकर अपनी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चे की स्थिति और अनुभव को समझना और स्वीकार करना परीक्षा के तनाव से निपटने का पहला कदम है।

बनाएं माहौल 

घर का माहौल बच्चे के लिए बहुत मायने रखता है, आप बतौर पेरेंट्स किस तरह रहते हैं, किस तरह का माहौल बच्चे के आस-पास है, इन बातों का ख्याल रखें। साथ ही टीवी की आवाज धीमी रखें, मेहमानों को घर में लाने से बचें और लंबी, शोरगुल वाली फोन कॉल कम करें। साथ ही कोशिश करें कि किसी को भी घर में न बुलाएं, जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, क्योंकि माहौल को बेहतर रखना बेहद जरूरी है, साथ ही कोशिश करें कि कभी भी हाइपर न बनें और परेशान न हो, नहीं तो यदि आप शांत नहीं रहेंगे, तो बच्चे भी शांत नहीं रहेंगे और अपने तनाव को नियंत्रित करने के लिए 7-7-7 नियम 7 सेकंड तक सांस अंदर लें, 7 सेकंड तक रोकें, 7 सेकंड तक सांस बाहर छोड़ें का उपयोग करें। दरअसल, आपको यह समझना होगा कि आपको खुद की भी तैयारी रखनी होगी, सिर्फ बच्चे नहीं उनके पेरेंट्स को भी रेडी होना चाहिए, दिमागी रूप से। इसके लिए यह भी चाहिए कि आप छोटी-मोटी बातों पर ध्यान देना बंद करें और कमरे की गंदगी या घर के अधूरे कामों जैसी छोटी-मोटी समस्याओं को फिलहाल नजरअंदाज कर दें, यह बेहद जरूरी है। यह वो वक़्त भी नहीं कि आप बेवजह उन पर साल भर न पढ़ने को लेकर ताने कसें, बल्कि बेहद जरूरी है कि आप इस समय उन्हें समझाएं कि बहुत घबराने की जरूरत नहीं है, साथ ही बहुत अधिक किसी बच्चे से कॉम्पटीटिव बनाने की कोशिश न करें, नहीं तो वह इसका प्रेशर ले लेगा और उसे बहुत भारीपन का एहसास हो जायेगा। इसलिए बेहद जरूरी है कि आप अपने बच्चे के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करें।

शारीरिक एवं पोषण तैयारी भी है जरूरी 

जी हां, आपको अपने बच्चों को इस बात के लिए तैयार करना है कि वह अधिक तनाव परीक्षा के शुरू होने के कुछ दिन पहले तक नहीं लें और नींद को प्राथमिकता दें, क्योंकि उन्हें 8-10 घंटे की नींद मिलनी भी जरूरी है और साथ ही अच्छी तरह से आराम किया हुआ आपने दिमाग में देर रात की पढ़ाई से थके हुए दिमाग की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन करता है। इसलिए इस बात का आपको ख्याल रखना ही है। साथ ही आपको 

बेहतर आहार खाने की कोशिश करनी जरूरी है और साथ ही प्रोटीन और ताजे फलों से भरपूर पौष्टिक भोजन दें। अधिक चीनी वाले स्नैक्स, कैफीन (कॉफी/एनर्जी ड्रिंक्स) और जंक फूड से बचें, क्योंकि इनसे ऊर्जा में कमी और चिड़चिड़ापन हो सकता है। उन्हें पानी और ताजे जूस पिलाकर हाइड्रेटेड रखें, ताकि वे सतर्क रहें। बच्चे को हर वक्त बस पढ़ो-पढ़ो कहना या करना जरूरी नहीं है। बच्चे को थोड़ा ब्रीथिंग स्पेस लेने दें, उन्हें एन्जॉय करने का थोड़ा मौका दिया करें, ताकि वह अपना मूड फ्रेश करके फिर से पढ़ना शुरू करें। इसलिए उन्हें ऐसा करने का मौका दें।

अध्ययन में सहायता

एक बात का ख्याल आपको और रखना है कि आपको व्यवस्थित योजना बनाना है और उन्हें एक व्यावहारिक पुनरावलोकन कार्यक्रम बनाने में मदद करें, जिसमें हर 2 घंटे में 20 मिनट का ब्रेक शामिल हो। साथ ही उन्हें यह भी समझाएं कि परीक्षा रूम में एंटर करने से पहले उन्हें क्या करना चाहिए। साथ ही साथ परीक्षा समाप्त होने के बाद, गलतियों की गहन चर्चा करने से बचें। इसके बजाय, उन्हें आगे बढ़ने और तुरंत अगले विषय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करें। अपने बच्चे के साथ मिलकर एक व्यावहारिक अध्ययन कार्यक्रम बनाएं। पढ़ाई के सत्रों को छोटे-छोटे अंतरालों में बांटें और बीच-बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लें, ताकि थकान से बचा जा सके। प्राथमिकता तय करने और योजना बनाने का महत्व सिखाएं, ताकि आखिरी समय में रट्टा मारने से बचा जा सके, क्योंकि इससे तनाव बढ़ सकता है।

भावनात्मक मार्गदर्शन

इस बात का भी आपको ख्याल रखना है कि अंकों से ज्यादा मेहनत को महत्व देने की कोशिश करें और विशिष्ट ग्रेड लक्ष्य निर्धारित करने के बजाय उनकी मेहनत और प्रगति की सराहना करें। उन्हें याद दिलाएं कि परीक्षाएं उनकी यात्रा का केवल एक हिस्सा हैं, न कि उनका पूरा भविष्य, इसलिए उन्हें इस बारे में कोशिश करनी चाहिए कि किस तरह से हमें अपना बेस्ट देना है, वह अपने जीवन के लक्ष्यों पर बात करें, दूरदर्शी बनें, उन्हें नंबर्स तक सीमित करने की कोशिश न करें। एक बात का और ध्यान रखें अत्यधिक तनाव के शारीरिक लक्षणों जैसे सिरदर्द, पेट दर्द या अचानक अलगाव पर नजर रखें और जरूरत हो तो चिकित्सा करें। साथ ही साथ सकारात्मक प्रोत्साहन देने की कोशिश करें छोटी-छोटी सफलताओं का जश्न मनाएं, जैसे किसी कठिन अध्याय को पूरा करना, पसंदीदा भोजन करना या साथ में थोड़ी देर टहलना, इन चीजों से वे मोटिवेट होंगे और आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। 





 



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