इन दिनों लगभग 11 से 12 साल की उम्र में लड़कियों को फर्स्ट पीरियड शुरू हो जा रहे हैं। जाहिर है कि पहली बार पीरियड होने पर वे भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करती हैं, लेकिन ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि उन्हें सहज महसूस कराएं। आइए जानें इस वक्त एक अभिभावक को क्या जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
सामान्य माहौल बनाएं

सबसे पहले तो आप खुद घबराएं नहीं और शोर-शराबा या फिर कुछ भी ऐसा करें, जिससे आपकी बेटी को कुछ असहजता हो और उसको यह एहसास हो कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। ऐसे कई सेलेब्स हैं, जिन्होंने खुल कर इस बारे में बताया है कि कैसे उनके अभिभावकों ने उन्हें नॉर्मल महसूस कराया है, आप उनसे प्रेरणा लें और अपनी बेटी के लिए एकदम सहज माहौल रखें। फिर धीरे-धीरे उन्हें पूरे प्रोसेस से अवगत कराएं और बार-बार इस बात को दोहराएं कि यह सब नेचुरल है। इसमें घबराना नहीं है, मुमकिन है कि फर्स्ट पीरियड में बेटी को दर्द हो, फ्लो भी अधिक हो, ऐसे में उन्हें जितना हो सके भावनात्मक रूप से प्यार दें और माहौल को नॉर्मल करें, ताकि वह अपनी परेशानी आपसे शेयर कर सकें।
पिता की है अहम भूमिका
अमूमन ऐसा कई घरों में होता है कि पिताओं को बेटियों की इस चीज से, जो कि एक नेचुरल प्रक्रिया है या तो उससे दूर रखा जाता है या फिर लड़कियों को कहा जाता है कि घर के पुरुषों से इस बारे में बात न करें, इससे फिर बेटियों के मन में ख्याल आता है कि यह कोई शर्म वाली बात है और उन्हें इस बात से और अधिक रोना आता है, जबकि जिस घर के पुरुष अपनी बेटियों से या अपनी बहनों से पीरियड के बारे में बात करें, उन्हें समझाएं कि ये कैसे होता है और क्यों होता है और समय पर इसका हो जाना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए पिता से यह बात छुपाये नहीं। अभिनेत्री भूमि पेडनेकर के पापा ने इस बात का जश्न मनाया था कि बेटी को पहला पीरियड आया है और फिर अपने बीच सहजता रखा कि बेटियां खुल कर उनसे बातें शेयर कर सकें। भाइयों को बहनों को संबल और स्नेह देना चाहिए कि बहन कभी अलग-थलग न महसूस करें।
अलग-थलग बिल्कुल नहीं

किसी भी तरह की दकियानूसी सोच में पड़ कर अपनी बेटी के साथ अजीब सा व्यवहार न करें, नहीं तो उन्हें भावनात्मक रूप से चोट पहुंचेगी, उन्हें लगेगा कि उन्हें अब किसी भी चीज में शामिल नहीं किया जायेगा या उनसे कोई गलती हो गई है, उन्हें एकदम सामान्य रहने दें। एक बात बिल्कुल अच्छी तरह से याद रखें कि पहले पीरियड का बुरा अनुभव आने वाले सालों तक लड़कियों के अपने शरीर के बारे में नजरिए को बदल सकता है। इससे उन्हें अकेलापन महसूस हो सकता है, वे मदद मांगने से कतरा सकती हैं और यह समझने में मुश्किल हो सकती है कि अपने पीरियड्स को हाइजीनिक तरीके से कैसे मैनेज करें। इससे इन्फेक्शन, चिंता और परेशानी हो सकती है। यह बेहद जरूरी है कि पीरियड्स से जुड़ी कई गलतफहमियां और टैबू हैं, इसलिए अपनी बेटी से इस बारे में आसान और सही तरीके से बात करना जरूरी है। पीरियड्स के बारे में साइंस ने क्या कहा है, सिर्फ उसको समझें और मानें। साइंस के बारे में खुद पढ़ें, ताकि आप उसे समझा सकें कि पीरियड्स क्या होते हैं और लड़कियों को ये क्यों होते हैं, और वह जो भी सवाल पूछे, आप उनका आत्मविश्वास से और सही जवाब दे सकें। बच्ची के किसी भी सवाल से निराश नहीं हों, वह खुल कर बात करेगी, तो अच्छा महसूस करेगी।
प्यूबर्टी के बारे में जल्दी बात
एक बात आपको और समझनी और करनी है कि आपको अपनी बेटी से बातचीत शुरू करनी चाहिए। उनको यह बताना होगा कि हर लड़की अलग हैं, वह अपनी दोस्त से तुलना न करें और स्कूल को भी चाहिए कि वह लड़की के साथ कोई सौतेला व्यवहार न करें, बल्कि सबको इसके बारे में बताएं, सैनेटरी नैपकिन कैसे इस्तेमाल करना है, इसके बारे में बताएं। हर लड़की का शरीर अलग होता है, लेकिन लड़कियों को 9 से 15 साल की उम्र के बीच कभी भी पहला पीरियड होना आम बात है। इसलिए लड़कियों को पीरियड शुरू होने की औसत उम्र लगभग 12 साल होती है। आमतौर पर, लड़कियों को पीरियड उनके ब्रेस्ट बढ़ने के लगभग 2 साल बाद शुरू होते हैं। इसे लेकर किसी स्त्री रोग स्पेशलिस्ट से भी मिलें और अपनी सारी संदेह को दूर कर दें।मैच्योर तरीके से बात करें
इस बार का ख्याल आपको ही रखना है कि वह जो भी इमोशनल रिएक्शन दे, उसे लेकर मैच्योर रहें। हो सकता है कि वह डरी हुई हो या शॉक में हो, टूट जाए, या अचानक हुए बदलाव से उसे ट्रॉमा हो जाए—खासकर अगर उसे पूरी जानकारी न हो या वह तैयार न हो। दूसरी ओर, हो सकता है कि वह इसे बहुत अच्छे से ले ले या आखिरकार पीरियड आने पर खुश हो जाए। यह जान लें कि ये सभी रिएक्शन बराबर सही हैं, और हर टीनएजर का एडजस्ट करने का अपना तरीका होता है। धैर्य रखें, और उसे यकीन दिलाएं कि जैसा वह महसूस कर रही है, वैसा महसूस करना ठीक है। आप अपनी पहली पीरियड की कहानी शेयर करके भी माहौल को हल्का-फुल्का बना सकती हैं।
पैम्पर करें

ऐसे कई राज्य हैं, जो फर्स्ट पीरियड होने पर जश्न मनाते हैं और अपनी बेटियों को गिफ्ट देते हैं, ऐसी खबरों का आपकी बेटियों के कानों तक पहुंचना जरूरी है, आप अपनी बेटी को जिस भी तरीके से पैम्पर कर सकती हैं, इस दौरान आपको करना चाहिए। इस बात का भी ध्यान आपको ही रखना है कि उससे यह उम्मीद न करें कि वह टीनएज स्टीरियोटाइप से मैच करने के लिए अपनी लाइफस्टाइल और व्यवहार में बहुत ज्यादा बदलाव करे। उसे फिजिकल एक्टिविटी या खेलकूद में हिस्सा लेने से मना न करें। उसे बताएं कि इसे आदत बनने में समय लग सकता है और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उसे सावधान रहना पड़ सकता है, लेकिन उसे भरोसा दिलाएं कि वह अभी भी वह सब कुछ कर सकती है, जो वह पहले करती थी। पीरियड प्रॉब्लम्स पर अधिक ध्यान नहीं दें। उनके साथ सारे सकारात्मक खबरें शेयर करें। साथ ही बॉडी पॉजिटिविटी की बात करें।
सेलिब्रेशन
आपको उस दिन रोना गाना नहीं करना है, बल्कि सेलिब्रेट करके उसे उसके मुश्किल दिन से राहत दें। परिवार के लोगों को बताएं और छोटे-छोटे तरीकों से सेलिब्रेट करें जिससे उसे खुशी मिले। आप उसे पीरियड किट गिफ्ट कर सकते हैं, उसे स्टोर के सैनिटरी पैड सेक्शन में मज़ेदार ट्रिप पर ले जा सकते हैं और उसे प्रोडक्ट्स के बारे में बता सकते हैं, मूवी देख सकते हैं, उसके लिए एक छोटी-सी पार्टी रख सकते हैं या गले लगाने जैसी कोई छोटी सी चीज़ भी काफी होगी। यह दिखाता है कि भले ही अब तक यह थोड़ा अप्रिय रहा हो, पीरियड्स उसकी जिंदगी के एक शानदार समय में एक स्वागत योग्य बदलाव हो सकते हैं।