कई बार ऐसा होता है कि हम जिन दोस्तों के साथ एक समय में सबसे अधिक समय बिताते हैं, उन्हें फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं और कई बार उनके कॉल्स हम मिस कर देते हैं या मेसेज का जवाब नहीं देते कि बाद में बात कर लेते हैं, लेकिन कई बार काफी देर भी हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि हम दोस्ती के रिश्तों में भी प्राथमिकता को महत्व दें। आइए जानें विस्तार से।
व्यस्त हैं फिर भी समय निकालें

सच यही है कि व्यस्त इन दिनों हर कोई हैं, लेकिन हम इतने भी व्यस्त नहीं होते हैं कि दोस्त के लिए दस मिनट का समय नहीं निकाल सकें, गौर करें, तो उस समय को मोबाइल में स्क्रॉलिंग कर लेते हैं, लेकिन अपने दोस्त से बातें करने के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं और यही हमसे सबसे बड़ी चूक हो जाती है। इसलिए दोस्तों के लिए समय निकालने के बारे में हमेशा सोचें। वरना, कई बार ऐसा होता है कि हम सोचते रह जाते हैं और देर हो जाती है और हम बातें जहां पहुंचनी चाहिए, वहां पहुंचा नहीं पाते हैं। इसलिए बेहद जरूरी है कि हम व्यस्त होने के बावजूद समय निकालें और बातें करें, क्योंकि दोस्तों में बातों का होना बेहद जरूरी है।
कॉलबैक करें
इस बात का ध्यान हम कभी नहीं रख पाते हैं और कॉलबैक करना भूल जाते हैं। साथ ही मेसेज के जवाब में भी सोचते हैं कि बाद में जवाब दे देंगे, लेकिन उस जवाब को देने का समय कई बार पूरी तरह से बीत जाता है, इसलिए बेहद जरूरी है कि आपको जब भी मौका मिले, आपको कॉल बैक कर लेना चाहिए या फिर मेसेज का जवाब दें, रिस्पॉन्स दें, हो सकता है कि कई बार देरी हो जाती है और फिर परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप इन बातों का ध्यान रखें और इस बारे में गंभीरता से सोचें, हो सकता है कि आपका दोस्त है और आप यह सोचें कि कोई खास बात नहीं, तो उन्हें फौरन कॉल या मेसेज की जरूरत नहीं, लेकिन ऐसा नहीं है जरूरत होती है और आपको भी इस बारे में सोचते रहना चाहिए।
तुम ठीक हो पूछने में कोई हर्ज नहीं

जिस दोस्त के साथ हर दिन हमारा उठना और बैठना होता है, हम उन्हें भी कई बार फॉर ग्रांटेड ले लेते हैं। अगर दो चार दिन वह कॉल न करें या किसी भी ग्रुप में एक्टिव नहीं है, तो यह मान कर न बैठें कि सब ठीक ही है, उन्हें कॉल करके उनके मन की बात जानने की कोशिश करें। फोन उठा कर इतना ही पूछ लेना कि सब ठीक है न ! इतना पूछ लेना भी काफी होता है, ताकि आपके दोस्त को भी एहसास हो कि अगर आप नहीं होंगे, तो उनके लिए खालीपन आएगा और आपकी कमी खलेगी, इसलिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें। एक बात याद रखें, जब सुनने या मदद करने जैसे प्रयासों को अनदेखा किया जाता है, तो दोस्त अक्सर उपेक्षित महसूस करते हैं। यह चुप्पी उन्हें अंदर ही अंदर खाती जाती है और यह नाराजगी को जन्म देती है, जो एक आम लेकिन भयंकर स्थिति हो जाती है, जो लंबे समय के रिश्तों की नींव को भी कमजोर कर देती है। जबकि आपके जो सच्चे दोस्त होते हैं, वह अच्छे श्रोता होते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में मदद करने वाले, बहुत कम मिलते हैं। एक बार ये लोग दूर हो जाएं, तो इनकी जगह लेना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए उन्हें अपनी जिंदगी में शामिल करके जरूर रखना चाहिए।
दोस्त को कभी विकल्प नहीं समझें
एक दोस्त को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती है कि उन्हें विकल्प के रूप में देखा जाये और ऐसा सोचना भी नहीं चाहिए कि दोस्त को विकल्प के रूप में देखा जाये। दरअसल, दोस्ती आमतौर पर तब तक नहीं टिकती जब उसे हल्के में लिया जाता है। अगर किसी दोस्त को लगता है कि वह सिर्फ एक विकल्प है, प्राथमिकता नहीं, तो वह स्वाभाविक रूप से भावनात्मक रूप से दूरी बनाना शुरू कर सकता है। इसलिए दोस्त को कभी किसी भी रूप में विकल्प बनाने की कोशिश न करें, क्योंकि अच्छे दोस्त थेरेपी की तरह होते हैं और जो समय आने पर परेशानियां कम कर देते हैं, इसलिए दोस्तों को हमेशा अपने इर्द-गिर्द रखें और प्यार से रखें। जब किसी मित्र को लगता है कि उसकी सराहना नहीं की जा रही है और उसके साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है, तो वह दूर हो सकता है, जिससे भावनात्मक दूरी पैदा हो सकती है।
दोस्त को एहसास कराएं उन्हें रिप्लेस नहीं किया जा सकता

याद रखें कि सपोर्टिव फ्रेंडशिप होना और किसी और को वह जगह देना मुश्किल होता है और इसे स्थायी मान लेने के बजाय संजोकर रखना चाहिए, चाहे कुछ भी किया जाए, क्योंकि जब किसी मित्र को लगता है कि उसकी सराहना नहीं की जा रही है और उसके साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है, तो वह दूर हो सकता है, जिससे भावनात्मक दूरी पैदा हो सकती है।
स्पेशल महसूस जरूर कराएं
हर इंसान स्पेशल महसूस करते रहना चाहता है, फिर चाहे वह आपका जिगरी यार ही क्यों न हो, आपको हर किसी मौके पर उन्हें स्पेशल फील कराने का मौका कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब भी मौका मिले, फिर चाहे उनका जन्मदिन हो या न हो या फिर कुछ भी आपको उन्हें स्पेशल फीलिंग देने की कोशिश करनी चाहिए और इससे उन्हें अच्छा महसूस होता है और होगा। तो हमेशा यह जरूरी नहीं है कि हम बड़ी-बड़ी योजनाएं ही बनाएं और इसलिए उन्हें संभालना भी जरूरी है। कई बार प्लान बनाना रैंडम हो, तब भी दोस्त को स्पेशल फीलिंग आ ही जाती है। छोटे-छोटे वॉइस मैसेज, 5 मिनट का हालचाल पूछना या बस एक साधारण सा मैसेज भेजकर बताना कि आप उनके बारे में सोच रहे हैं, इन चीजों से भी आपके रिश्ते को मजबूती मिलती है , साथ ही दोस्तों के साथ समय-समय पर मिलना, समय निकालना भी जरूरी है। दरअसल, इन्हें अपने कैलेंडर में जरूरी अपॉइंटमेंट की तरह मानें, ताकि रोजमर्रा के कामों में उलझकर ये छूट न जाये। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर कामकाज और दोस्तों के साथ समय बिताने का तालमेल बिठा पाएं, तो इससे अच्छा कुछ नहीं होगा और अगर आपके पास समय कम है, तो किसी दोस्त को अपने साथ उन गतिविधियों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करें, जो आप पहले से ही कर रहे हैं, इससे भी आप दोनों को एक दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा।