आपकी मां आपके साथ ताउम्र रहे या न रहे, उनकी रेसिपी बुक, जो उन्होंने खुद से अपने जीवन में तैयार की है, वह जरूर आपके साथ रहती है। आइए जानें, क्यों वे बुक सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि उसमें कई सारे इमोशंस जुड़े होते हैं और जिंदगी के महत्वपूर्ण फलसफे भी।
प्यार ही है जीवन

मां की रेसिपी बुक, सबसे पहले तो यही सिखाती है कि सहेजना जीवन में कितना जरूरी है, कितना जरूरी है कि आप चीजों को सहेजें, सिर्फ आज में विश्वास करके, नहीं बल्कि आगे भी आज की वे चीजें काम आएंगी और इन सबके साथ काम आएगा आपका प्यार। वह सिखाती है कि खाने में सबसे ज्यादा मसाला 'प्यार' होता है। और जब आप मां बनेंगी, तब भी मां के हाथ का स्वाद अलग होता है, क्योंकि इसमें परिवार की सेहत और खुशी की फिक्र होती है।
बचत में है समझदारी
आपने गौर किया होगा, तो मां की रेसिपी बुक में कई जगह आपने महसूस किया होगा कि मां ने कुछ सामान की अनुपस्थिति में भी दूसरे किसी अन्य सामान से काम चलाया है, साथ ही वह बताती हैं कि किचन में कितना किफायती होकर चलने की जरूरत होती है। गौर करें, तो मां की डायरी में आपको 'बची हुई चीजों, जिसे आजकल लेफ्ट ओवर फूड कहा जाता है, उसे कितने शानदार तरह से अलग-अलग तरह के डिश बनाना भी लिखा होता है। यह सिखाता है कि कम संसाधनों में भी कैसे बेहतरीन तरीके से घर चलाया जा सकता है। साथ ही सबकुछ फेंकना नहीं है, उसका इस्तेमाल सही तरीके से करना है। आपने गौर किया होगा, हर पर्व त्यौहार और खासतौर से घरेलू पर्व से जुड़ी सारी रेसिपीज के बारे में किताब में लिखा गया है, यह समझना जरूरी है कि वह बुक सिर्फ रेसिपीज नहीं, बल्कि परिवार की विरासत है। वह बेटी को अपनी जड़ों से जुड़े रहना और अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक ले जाना सिखाती हैं। इसलिए कभी परंपराओं के तार को जोड़ने के लिए, मां की रेसिपी बुक को पढ़ना बेहद जरूरी है।
अपने दिल की सुनें

मां अपनी रेसिपी बुक में सिर्फ रेसिपीज की विधि नहीं बताती, बल्कि वे टिप्स भी लिख कर रखती हैं कि अगर आपने कुछ गलतियां हो भी जाएं, तो उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है। जैसे कि चुटकी भर नमक या अंदाज से मसाले डालना यह सिखाता है कि अपनी काबिलियत और खुद पर भरोसा कैसे करना है। कैसे दिल की सुनने की कोशिश करना है और किसी की बातों को दिल पर नहीं लगाना है।
घरेलू नुस्खा
मां भी दादी की तरह कई नुस्खों को अपनी रेसिपी बुक में लिख जाती हैं, जैसे कि कौन सी बीमारी में कौन सा काढ़ा देना है या त्योहार पर क्या खास बनाना है, यह डायरी सिखाती है कि अपनों का ख्याल कैसे रखा जाता है। साथ ही खास की किसी भी बीमारी का इलाज सिर्फ दवाई नहीं है, किचन में कई सारी जड़ी बूटियां और साधन हैं, जिनसे बीमारी ठीक हो सकती है।
परंपराओं से जुड़े तार

आपने गौर किया होगा, हर पर्व त्यौहार और खासतौर से घरेलू पर्व से जुड़ी सारी रेसिपीज के बारे में किताब में लिखा गया है, यह समझना जरूरी है कि वह बुक सिर्फ रेसिपीज नहीं, बल्कि परिवार की विरासत है। वह बेटी को अपनी जड़ों से जुड़े रहना और अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक ले जाना सिखाती हैं। इसलिए कभी परंपराओं के तार को जोड़ने के लिए, मां की रेसिपी बुक को पढ़ना बेहद जरूरी है।