रक्षाबंधन का मौका एक ऐसा मौका है, जब हमें जरूर याद करना चाहिए कि आखिर वे कहानियां क्या-क्या रही हैं, जब भाई और बहन ने एक दूसरे के लिए अपनी जिंदगी भी न्यौछावर की है। आइए जानते हैं विस्तार से।
कुछ यादगार किंवदंतियां

अगर हम कृष्ण और द्रोपदी की कहानियों की बात करें, तो एक युद्ध के दौरान, भगवान कृष्ण की उंगली उनके घूमते हुए सुदर्शन चक्र से कट गई। खून देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और उसे कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। उनकी इस देखभाल से प्रभावित होकर कृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया। और उन्होंने एक ऐसा वादा किया, जिसे उन्होंने सालों बाद महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण (सार्वजनिक अपमान) के समय पूरा किया। और भी कई मौके पर कृष्ण द्रौपदी के लिए तैनात रहे। इसलिए कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते से सीख लेनी चाहिए कि भाई हमेशा अपनी बहन के लिए खड़ा होगा।बता दें कि सुभद्रा को अपने भाइयों, कृष्ण और बलराम से बहुत प्यार और स्नेह मिला। साथ ही यह भी जानें कि कृष्ण ने पांडव राजकुमार अर्जुन से शादी करने के उनके फैसले का समर्थन किया था और उनकी खुशी को सबसे ज्यादा अहमियत दी। इससे भी यह बात स्पष्ट होती है कि बहन की खुशियों से बढ़ कर कुछ भी नहीं। एक और किंवदंती बेहद लोकप्रिय है कि नदी की देवी यमुना ने लंबे समय तक अलग रहने के बाद अपने जुड़वां भाई यम (मृत्यु के देवता) की कलाई पर एक पवित्र धागा बांधा। उनके प्यार से प्रभावित होकर, यम ने उन्हें अमरता का वरदान दिया और घोषणा की कि जो भी भाई अपनी बहन से सच्चे मन से धागा बंधवाएगा, उसे लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलेगा।
इतिहास में भाई बहन का प्यार

एक कहानी यह भी लोकप्रिय है कि मध्यकालीन भारतीय इतिहास में, जब चित्तौड़ की रानी कर्णावती पर गुजरात के बहादुर शाह ने हमला किया, तो उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी वाला पत्र भेजकर मदद मांगी। धार्मिक और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, हुमायूँ ने भाई के नाते इस रिश्ते का सम्मान किया और उनकी मदद के लिए अपनी सेना भेजी। यह प्रमाण है कि बात जब भाई बहन के रिश्ते की आती है, तो धर्म या जात-पात से ऊपर सिर्फ एक इंसानियत और प्यार को महत्व दिया जाता है। इसलिए भाई बहन के रिश्ते को बहुत पवित्र रिश्ता माना जाता है। यह संदर्भ भी हमेशा याद किया जाना चाहिए कि अंग्रेजों द्वारा बंगाल के विभाजन के समय, नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बड़े आयोजन के लिए राखी के धागे के विचार का इस्तेमाल किया। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों को सांप्रदायिक सद्भाव, आपसी सुरक्षा और अटूट एकता के प्रतीक के तौर पर एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधने के लिए प्रोत्साहित किया। यह किस्सा आज भी प्रासंगिक ही माना जाता है और यादगार ही माना जाता है। भाई बहन के रिश्ते को दर्शाती यह अद्भुत कहानी है।
छोटा-सा साथ भी काफी है
इस रक्षाबंधन में कोशिश करें कि आप भाई-बहन के प्यार उदाहरण बनाएं कि लोग आपकी मिसालें दें, इसके लिए आपको कोई बड़ा काम या कारनामा नहीं करना है, बहनों को किसी तोहफे से अधिक कुछ आंतरिक और मानसिक साथ और सपोर्ट दिखाने की कोशिश करें और यकीन मानिए, यह उतना कठिन नहीं है। जैसे कि चाहे उसके करियर का चुनाव हो, कपड़ों का या दोस्तों का, उसे अपने फैसले खुद लेने दें। उसके विचारों को 'बचकानी' कहकर न खारिज करें। उसे कभी यह महसूस न होने दें कि वह लड़की है इसलिए कोई काम नहीं कर सकती। चाहे गाड़ी चलाना हो, बैंक का काम हो, या घर का भारी सामान उठाना, उसे हर चीज के लिए प्रोत्साहित करें। एक बात का खास ख्याल रखें कि उसे सुरक्षित रखने के नाम पर पिंजरे में बंद न करें। आपका यह छोटा सा साथ भी उसे जिंदगी में उड़ान भरने का मौका दे सकता है।
परवाह है तो जताइए

कई बार हमें लगता है कि हमें अपने लोगों को प्यार जताने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन यह सही बात नहीं है, हमें आपको को प्यार तो जताना ही चाहिए। जी हां, एक भाई को अपनी बहन की बात को ध्यान से सुनना चाहिए, जब वह अपने कॉलेज, ऑफिस या दोस्तों की बातें शेयर करे, तो फोन साइड में रखकर उसे पूरा ध्यान दें। यह उसे महसूस कराएगा कि उसके विचार और भावनाएं मायने रखती हैं। ज्यादा नहीं थोड़ा-थोड़ा ही लेकिन घर के कामों में हाथ बटाएं, याद रखें असली फेमिनिज्म की शुरुआत घर से होती है। चाय बनाना, बर्तन धोना या कमरा साफ करना, यह केवल उसकी जिम्मेदारी नहीं है। जब आप उसके साथ काम शेयर करेंगे, तो उसे बराबरी का अहसास होगा। एक बात और समझें कि उसकी वित्तीय समझ को बढ़ाने में मदद करें और उसे निवेश, बैंक अकाउंट्स, टैक्स और पैसों के प्रबंधन के बारे में सिखाएं या साथ मिलकर सीखें। आर्थिक रूप से जागरूक होना फेमिनिज्म का सबसे बड़ा स्तंभ है। याद रखें कि अगर उसे आपकी सलाह की जरूरत है, तो बस उससे कहें, मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम जो भी फैसला लोगी मैं सपोर्ट करूंगा। इससे उसका आत्मविश्वास बहुत बढ़ेग
समझें उनकी मन की बात
कोशिश करें कि उसे कुछ भी साबित करने की जरूरत न पड़े। और उन्हें आपको कुछ चीजें समझानी हैं, उन्हें समझाना है, तो उन्हें न कहना सिखाएं और उसका सम्मान करें, साथ ही अगर वह किसी चीज के लिए मना करती हैं, तो उनकी बात को तुरंत स्वीकार करें, क्योंकि इस बात को मानें कि घर में जब उनकी न का सम्मान होगा, तो वह बाहर की दुनिया में भी अपने हक के लिए बिना डरे 'ना' कह पाएगी। इनके अलावा, उन्हें अपनी बॉडी इमेज को लेकर सहज बनाएं। उन्हें महसूस कराएं कि उनकी बुद्धिमत्ता, उनकी प्रतिभा और उनका स्वभाव ही उसकी असली पहचान हैं। इनके अलावा, इमरजेंसी स्किल्स सिखाएं, जी हां, उन्हें केवल घर संभालना नहीं, बल्कि गाड़ी का टायर बदलना, बेसिक प्लंबिंग, फ्यूज ठीक करना या तकनीकी गैजेट्स को संभालना सिखाएं। यह चीजें उसे अहसास दिलाएंगी कि वह किसी पर निर्भर नहीं है।ा।