इन दिनों हम जब भी घूमने जाते हैं, हमारी कोशिश यही होती है कि उस जगह की तस्वीर ले ली जाये, फिर चाहे घूमना-फिरना कम भी हो, लेकिन सोच कर देखें कि जब आप कभी लौट कर आएंगी या कई वर्षों तक बच्चों को अपनी मेमोरी यानी याददाश्त में याद रहे। इसलिए बेहद जरूरी है कि बच्चों को यात्राओं की मेमोरीज सहेजना सिखाएं। आइए जानते हैं विस्तार से।
बच्चे याद रखेंगे अच्छी यादें

यात्राओं का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि बच्चों को नए अनुभव होते हैं और वे नयी चीजों को एक्सप्लोर करते हैं। ऐसे में इस दौर में जब केवल बच्चों पर सोशल मीडिया हावी है, आपको कोशिश करनी चाहिए कि उन्हें उस दौर में ले जाया जाये, जिसे ओल्ड स्कूल तो कहा जाता है, लेकिन वे चीजें आपके पास हमेशा रहती हैं। जैसे आपके बच्चे को सिखाएं कि वह एक डायरी रखे, उसमें चीजों को लिखे, उसे क्या अच्छा लगा क्या नहीं, किसी पहाड़ी जगह के खट्टे-मीठे अनुभव, तो अलग-अलग तरह की यादें, ये यादें बच्चों को समृद्ध बनाएंगी, इसलिए कोशिश करें कि इन्हें शामिल जरूर करें। डायरी के ज़रिए यात्रा की यादों को ताजा करना एक जबरदस्त विकास का जरिया है, जो बच्चों को एक मजबूत निजी पहचान बनाने और मुश्किल भावनाओं को समझने में मदद करता है। सिर्फ यादों को सहेजने से कहीं बढ़कर, बच्चे और माता-पिता के साथ बिताये पलों को याद करते हैं और बारीकियों को याद करते हैं, वहीं यह बच्चे के दिमाग में लॉन्ग टर्म मेमोरी में सक्रिय रूप से मजबूत बनाता है।
एक्टिव रिट्राइवल
खास बात यह भी है कि जब आप डायरी लिखने की कला या कोई भी मेमोरी को किसी भी रूप में सहेजने का तरीका बताएंगी, तो इससे बच्चे का एक्टिव रिट्राइवल होता है, दरअसल, लिखने या चित्र बनाने के लिए बच्चे को अपने मन से जानकारी निकालनी पड़ती है, ऐसे में न्यूरोसाइंस के अनुसार, याददाश्त को बनाए रखने के लिए यह तरीका डिजिटल टाइपिंग की तुलना में ज्यादा असरदार होता है। डायरी में अक्सर टिकट के टुकड़े, सूखे फूल या रेत जैसी छूकर महसूस की जा सकने वाली यादगार चीजें शामिल होती हैं। ये चीजें आपको या आपके बच्चों को उसी जगह के होने का एहसास कराती हैं, बच्चे सहेजने की कला सीखते हैं। यह एक तरह से बच्चों के मस्तिष्क को फायदे पहुंचाती हैं, जिनकी मदद से बच्चे सालों बाद भी उन गुजर चुके पलों को फिर से जी पाते हैं।
इमोशनल समझ

आपके बच्चे अगर मेमोरीज को सहेजना सीखेंगे, तो वे बच्चे लिखना सीखेंगे, खुद की फीलिंग को महसूस करना सीखेंगे, जर्नल लिखना बच्चों को अपनी निराशा निकालने या अलग-अलग संस्कृतियों के बीच के उलझाने वाले अंतरों को समझने के लिए एक सुरक्षित जगह देता है, जिससे उनका तनाव कम होता है। वहीं या तरीका बच्चों को थोड़ी धीमी गति से बढ़ने में मदद करता है और दुनिया को ज्यादा बारीकी से देखने के लिए प्रेरित करता है, वहीं रंगों, खुशबू और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना, जिन्हें वे शायद आम तौर पर नजरअंदाज कर देते हैं, इन पर भी फोकस करता है।
नैरेशन या बातों को गढ़ने की कला सीखेंगे
इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि जब यात्राओं पर बच्चे मेमोरीज सहेजना सीखेंगे, तो बच्चे सीखेंगे कि घटनाओं को क्रम से कैसे व्यवस्थित किया जाए और वर्णनात्मक भाषा का उपयोग करके दूसरों को वह सब दिखाया जाए, जो उन्होंने देखा। वहीं दिन भर की गतिविधियों पर विचार करने से बच्चों को अपने मन को साफ करने और उन्हें आने वाली किसी भी समस्या का तर्कसंगत तरीके से विश्लेषण करने में मदद मिलती है। साथ ही यह लंबे हवाई सफर या बस यात्रा जैसी खाली समय की स्थितियों में, डिजिटल उपकरणों के बजाय एक उपयोगी स्किल डेवलप की निशानी होती है।
आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता

जब कोई बच्चा अपनी यात्रा को दस्तावेज के रूप में दर्ज करता है, तो इससे इस बात को बल मिलता है कि उसका दृष्टिकोण और विचार मायने रखते हैं। यह उसे अपनी कहानी पर स्वामित्व का एहसास कराता है। और भविष्य में हो सकता है कि उसकी यही रूचि उन्हें इसी क्षेत्र में ले जाये, जहां वे डॉक्यूमेंट्री बनाएं या ट्रैवल से संबंधित कुछ काम शुरू कर दें या इसे ही अपना करियर चुन लें।