होम गार्डनिंग न केवल आपके घर में सकारात्मकता लाता है बल्कि आपके जीवन को एक सेहतमंद लाइफस्टाइल भी देता है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि घर छोटा हो या बड़ा हर किसी के घर की खिड़की के पास अपना एक खास छोटा गार्डन एरिया जरूर होता है। भले ही एक पौधा क्यों न हो, गार्डनिंग आपके घर के साथ आपके मन की भी वाइब को खुशनुमा कर देती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे आप होम गार्डनिंग के आसान और सीक्रेट टिप्स के जरिए अपने घर को प्रकृति के और भी करीब पहुंचा सकती हैं।
होम गार्डनिंग के लिए सही मिट्टी जरूरी

जाहिर सी बात है कि नींव मजबूत होने पर ही घर की दीवार में मजबूती आती है। सही मिट्टी के साथ ही आपके अपने घर के गार्डन को मजबूती और सदाबहार बना सकती हैं। अच्छी मिट्टी मतलब स्वस्थ्य पौधे होते हैं। परफेक्ट मिट्टी मिक्स करने के लिए 40% गार्डन सॉयल, 30% कम्पोस्ट या गोबर खाद, 20% रेत, 10% कोकोपीट का इस्तेमाल करना चाहिए। मिट्टी लगाने का भी सीक्रेट टिप है। इसके लिए मिट्टी लगाने से पहले 2 से 3 दिन धूप में मिट्टी को फैला दें। इससे यह होता है कि अगर मिट्टी में कोई भी कीट या फंगस होता है, तो वह कम हो जाता है। साथ ही आपको धूप की सही मात्रा भी समझनी होगी। हर पौधे की धूप अलग होती है। आपको यह जानना होगा कि कौन से पौधे को धूप की जरूरत है और कौन से पौधे को नहीं। टमाटर, मिर्च और तुलसी को धूप पसंद है। मनी प्लांट और स्नैक प्लांट को कम रोशनी की जरूरत होती है। पालक और धनिया को आधी धूप की जरूरत होती है। धूप को लेकर सीक्रेट टिप यह होती है कि सुबह की 4 से 6 घंटे की धूप ज्यादातर सब्जियों और फूलों के लिए काफी होती है।
पौधे को पानी देना और बीज बोने का तरीका

पौधे को पानी देने का भी एक तरीका है। पानी कब देना है और कैसे देना है, यह भी ध्यान देने वाली बात है। पौधे को ज्यादा पानी देना सबसे आम गलती होती है। सुबह जल्दी या शाम को पानी दें। पानी देने से पहले पहले मिट्टी को चेक करें। आपको यह ध्यान देना है कि अगर मिट्टी की ऊपरी परत सूखी हो तभी पानी दें। पौधे को पानी देने की सीक्रेट टिप यह भी है कि उंगली एक इंच अंदर डालकर मिट्टी चेक करें। पौधे को पानी देने से पहले बारी आती है, बीज बोने की। पौधे में बीज बोने का सही तरीका यह है कि छोटे बीज को गहराई में न दबाएं। दूरी तरफ बड़े बीज को एक या दो इंच गहराई पर लगाएं। बीज बोने का सीक्रेट टिप यह है कि कुछ बीजों को 6 से 8 घंटे लगातार भिगोकर लगाने से अंकुरण तेजी से होने लगता है।
किचन वेस्ट से बनाएं खाद

यह आपको ध्यान देना है कि घर का कचरा भी आपके पौधे को लंबी लाइफ दे सकता है। आप घर के कचरे को जैसे कि सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती और फल के छिलके से भी खाद बना सकती हैं। किसी भी खाद को तैयार होने में 30 से 45 दिन का समय लगता है। खाद बनाने के लिए हरा गीला कचरा जैसे कि सब्जियों और फलों का छिलका, चाय की पत्ती , बासी रोटी और अंडे के छिलके का उपयोग कर सकती हैं। सूखा कचरा बनाने के लिए सूखे पत्ते, कटा हुआ कागज, नारियल का बुरादा, आरी का बुरादा इस्तेमाल कर सकती हैं। कंपोस्ट बनाने के लिए ढक्कन वाली प्लास्टिक या मिट्टी की बाल्टी का उपयोग करें। बाल्टी में नीचे छोटे छेद और सूखे और पत्ते या कागज का इस्तेमाल करें। खाद बनाने की प्रक्रिया यह है कि बाल्टी के तले में सूखे पत्तों की परत बिछाएं। उस पर किचन वेस्ट डालें, फिर ऊपर से सूखे पत्तों या फिर कागज की परत डालें। इसी तरह परतें बनाते रहना है। हर तीन से चार दिन में लकड़ी से थोड़ा हिलाएं ताकि हवा मिलती रहे। खाद तैयार होने के बाद गमलों या फिर बगीचे की मिट्टी में थोड़े अनुपात में मिलाएं। आपको पौधों की जड़ों से थोड़ा दूर डालें
पौधों के लिए प्राकृतिक कीटनाशक अपनाएं
आपको पौधों के लिए प्राकृतिक कीटनाशक को ही अपनाना है। पौधों के लिए केमिकल से बचना है। प्राकृतिक तौर पर कीटनाशक अपनाने के लिए नीम तेल,पानी और थोड़ा साबुन मिलाकर स्प्रे करें। आप प्राकृतिक कीटनाशक के लिए लहसुन और मिर्च का भी घोल तैयार कर सकती हैं। यह काफी असरदायक होता है। आप कीटनाशक का उपयोग सप्ताह में एक बार स्प्रे करने से कीट नहीं पनप पाते हैं। पौधों में नमी बनाए रखने के लिए सूखी पत्तियां या घास मिट्टी के ऊपर से बिछाएं। इसका यह फायदा पौधों को मिलता है कि पौधों को पानी कम देना पड़ेगा, खरपतवार कम उगते हैं और पौधों की जड़ें भी सुरक्षित रहती हैं।
सही गमला और छटाई
पौधों की सही देखभाल के लिए सही गमला और छटाई भी जरूरी होती है। मनी प्लांट और स्पाइड प्लांट के लिए 4 से 5 इंच का गमला पर्याप्त होता है। आप इसके लिए हल्का प्लास्टिक या सिरेमिक का गमसला ले सकती हैं। गमले के नीचे छेद का होना जरूरी है। फूल वाले पौधे के लिए जैसे कि गुलाब और गेंदा के लिए 8 से 12 इंच गहराई वाला गमला लें। इसके लिए मजबूत और भारी वाला गमले का चुनाव करें। टमाटर और मिर्च यानी कि सब्जी वाले पौधे के लिए कम से कम 12 इंच गहरा गमला लें। आपको हमेशा यह ध्यान देना है कि गमला पौधे की जड़ से 2 से 3 इंच बड़ा होना चाहिए। पौधे के लिए बहुत बड़ा गमला भी ठीक नहीं है। इससे मिट्टी ज्यादा गीली रहती है। बालकनी के गमले के लिए हमेशा हल्के प्लास्टिक या ग्रो बैग का इस्तेमाल करें। छत के लिए मजबूत गमलों का इस्तेमाल करें।