80 के दशक के दौरान जहां पर महिलाएं वकील या फिर डॅाक्टर बनती या फिर घर की चारदीवारी में रहकर घरेलू महिला बनने का सफर पूरा कर रही थीं, उस दौरान भाग्यश्री थिप्से के पिता ने घर में ही शतरंज का ऐसा माहौल बनाया कि बेटी को शतरंज से प्यार हो गया और उन्होंने इसमें ही खुद का करियर बनाने का फैसला लिया और इसी के साथ भाग्यश्री ने इतिहास लिख दिया उन्होंने पांच बार भारतीय महिला चैंपियनशिप जीती और इसी के साथ एशियाई महिला चैंपियनशिप भी जीती है। फिर, करते हैं, एक छोटी सी मुलाकात भाग्यश्री थिप्से के साथ और समझते हैं शतरंग का गणित।