क्या आपने कभी बीज के गोले के बारे में सुना है? जी हां छिंदवाड़ा गांव की महिलाएं अपने जमीन को हरा-भरा बनाने के लिए बीज के गोले तैयार करने का काम सफलता पूर्वक करती हैं। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि महिलाएं अपने हाथों से जादू कर रही हैं और पर्यावरण की रक्षा का कार्य बखूबी संभाल रही हैं। जाहिर सी बात है कि देश में कई जगहों पर घटते जंगलों और बंजर धरती बढ़ती चली जा रही है। ऐसे में पंजरा गांव की महिलाओं ने यह फैसला किया कि ऐसा कुछ कार्य किया जाए, जहां पर पर्यावरण की रक्षा के साथ खुद की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया जाए और इसके लिए उन्होंने एक अनोखे गोले को बनाने का काम शुरू किया।
खेत से लाई हुई मिट्टी , चूल्हे की राख और गाय के गोबर मिलाकर एक खास तरह का गोला तैयार किया जाता है। उपरोक्त बताई गई सभी सामग्री को मिलाकर लड्डू तैयार किया जाता है और फिर इसे अच्छी तरह से सुखाया जाता है। हालांकि इन गेंदों को बनाने के लिए महिलाओं को थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि इन गोलों को खेतों में बोते हुए जमीन को हरा-भरा बनाया जा सकता है।
महिलाएं इस तरह की खास गेंद बनाने के लिए 2 महीने से अधिक का समय लेती हैं। मिली जानकारी अनुसार महिलाओं ने वर्तमान में इमली, अपराजिता और बबूल के पेड़ों के बीजों के सहारे 10 हजार से अधिक बीजों की गेंद तैयार की है। इन बीजों की गेंद को बनाने का सबसे अधिक फायदा यह होता है कि उन्हें कहीं भी फेंककर पौधे उगाए जा सकते हैं। साथ ही इससे मिट्टी की भी सेहत बनी रहती है। खासतौर पर बारिश से पहले इन बीजों को जमीन में बो दिया जाता है या फिर दबा दिया जाता है। पहली बारिश आने पर बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाते हैं।