इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट की मांग बाजारों में बढ़ी है। इस तरह से कहीं न कहीं महिलाओं को इससे रोजगार भी मिल रहा है और महिलाएं अपने समय और बचत के अनुसार खुद को आर्थिक तौर पर संपन्न कर पा रही हैं। ऐसा ही कार्य उत्तराखंड की महिलाएं भी कर रही हैं। यहां पर महिलाएं प्लास्टिक मुक्त शहर बनाने के लिए कई सारे सराहनीय कार्य कर रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाकर एक तरफ पर्यावरण की सुरक्षा कर रही हैं, तो वहीं अपने लिए आजीविका के रास्ते भी खोल रही हैं। महिलाएं अपने इलाके में मौजूद स्वयं सहायता समूह से खुद को जोड़कर खेती के साथ हस्तशिल्प और बेकरी से जुड़े कामों की ट्रेनिंग ले रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत तकरीबन 6 हजार महिलाओं को इस मिशन से जोड़ा गया है।
एक तरह का खास ट्रेनिंग समूह महिलाओं के लिए बनाया गया है। इन समूहों के जरिए महिलाओं को वित्तीय सहायता के साथ व्यवसाय करने के अवसर भी दिए जा रहे हैं। खासतौर पर खेती पर भी विशेष लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं बागवानी, सब्जी उगाने का काम भी सीख रही हैं। इन सभी कामों को सीखने के साथ महिलाएं हर महीने 10 से 12 हजार रुपए तक की कमाई करती हैं। दिलचस्प है कि महिलाओं का काम केवल स्थानीय बाजारों तक नहीं टिका हुआ है, बल्कि महिलाएं अपने बनाए हुए उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी भेजने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही मल्टीग्रेन और मिलेट्स की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए बिस्किट के साथ अन्य सेहतमंद खाद्य पदार्थों को बनाने और बेचने का कार्य भी कर रही हैं। कुल मिलाकर देखा जाए, तो उत्तराखंड की महिलाएं इस तरह से खुद को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं।