पानी जांचना भी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का जरिया बन सकता है। जी हां, उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत महिलाएं यह कार्य कर रही हैं। जाहिर सी बात है कि बदलते समय के साथ पानी के दूषित होने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में उसकी गुणवत्ता हमारे हर दिन के जीवन के लिए काफी अहम हो गई है। फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए यह महिलाएं कार्य कर रही हैं। इसके जरिए जल से जुड़ी हुई बीमारियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही हैं।
राज्य सरकार के जल जीवन मिशन के जरिए प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाएं टेस्टिंग किट के जरिए पानी की गुणवत्ता जांचने का काम कर रही हैं। इससे गांवों की महिलाओं को खुद को आर्थिक तौर पर खड़ा करने का जरिया भी मिल गया है। हालांकि बढ़ती हुई बीमारियों को देखते हुए राज्य सरकार और जिला स्तर पर गांव की सफाई और पानी की स्वच्छता पर अधिक जोर दिया जा रहा है। एक तरफ जहां इसके जरिए सेहत के प्रति सुधार और सावधानी बरती जा रही है, वहीं एक बड़े स्तर पर गांव के लोगों को आमदनी का भी रास्ता सशक्त बन रहा है।
पानी सखी बनने के लिए गांव की महिलाओं को एक खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है और उसी के तहत यह महिलाएं पूरा कार्यभार संभालती हैं। प्रशिक्षित महिलाएं गांव के स्तर पर पाइपलाइन, ट्यूबवेल और अन्य जगहों से पानी के नमूने लेकर उसकी जांच खुद करती हैं और पानी साफ है या नहीं इसकी जांच करती हैं। एक जांच के पीछे उन्हें 30 से 50 रुपए का भुगतान किया जाता है। इसी के साथ महिलाओं को पानी जांचने वाली दीदी के नाम से पहचान भी मिल रही है। गांव में महिलाएं नियमित तौर पर खराब पानी की पहचान कर रही हैं।