वाराणसी की ग्रामीण महिलाएं काले चावल से सेहतमंद उत्पाद बना रही हैं। इस तरह से कई सारी महिलाएं खुद को आर्थिक तौर पर प्रबल कर रही हैं। महिलाओं ने कहीं न कहीं एक सेहतमंद जीवनशैली और पोषण की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। महिलाओं को उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान इरी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र से इन सभी महिलाओं को तकनीकी सहयोग मिल रहा है। आइए जानते हैं विस्तार से।
इरी और साईं इंस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट के बीच इसे लेकर करार हुआ है। इसी की तरफ से महिलाओं को चावल से उत्पाद बनाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और भी कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। महिलाओं को इसके जरिए ब्लैक राइस और अन्य चावल के उत्पादों से वैल्यू और हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स जैसे न्यूट्री बार, नूडल्स , हेल्दी स्नैक्स, कुकीज, इंस्टेट डाइट मिक्स आदि बनाने का प्रशिक्षण मिलेगा।
इतना ही नहीं महिलाओं को पैकेजिंग, ब्राडिंग और डिजिटल मार्केटिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे महिलाएं एक अच्छा उत्पाद बना सकती हैं और बाजार में अपनी पैठ जमा सकती हैं। ज्ञात हो कि इन महिलाओं को बीते 6 महीने से अधिक इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। जहां पर महिलाओं को ब्राउन राइस और ब्लैक राइस से सेहतमंद फूड प्रोडक्ट्स जैसे कि कुकीज, पोहा, खिचड़ी मिक्स आदि के लिए खासतौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ऐसा पाया गया है कि बीते कई सालों में सेहतमंद फूड की मांग बाजारों में बढ़ी है। ब्लैक राइस सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है, ऐसे में उससे बनने वाले फूड आटम भी सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत वर्तमान में 3 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर होकर अपनी और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। दिलचस्प है कि इन सभी महिलाओं को पुराने वस्तुओं का फिर से उपयोग करने के लिए भी ट्रेनिंग दी जा रही है। महिलाएं फुलों से नेचुरल अगरबत्ती, धूप कोन, स्टिक और हवन कप जैसे उत्पाद भी तैयार कर रही हैं।