उत्तर प्रदेश के 37 जिलों की 57,000 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं ने स्थानीय स्वयं-सहायता समूहों के जरिए 60 करोड़ से ज्यादा गन्ने के बीजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करके खुद को आत्मनिर्भर व्यवसायी बना लिया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
जी हां, यह सच है कि ये सटीक आंकड़े आधिकारिक तौर पर उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग और गन्ना विकास विभाग द्वारा जारी किए गए थे और 26 मार्च, 2026 को गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस ने इनकी पुष्टि की थी कि उत्तर प्रदेश के 37 जिलों की 57,000 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं ने स्थानीय स्वयं-सहायता समूहों के जरिए 60 करोड़ से ज्यादा गन्ने के बीजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करके खुद को आत्मनिर्भर व्यवसायी बना लिया है। गौरतलब है कि महिलाएं हर बीज-पौधे को लगभग ₹1.30 से ₹1.50 की लागत पर तैयार करती हैं और उन्हें किसानों या चीनी मिलों को ₹3.00 से ₹3.50 में बेचती हैं, जिससे उन्हें हर पौधे पर लगभग 100 प्रतिशत सही चीजें मिली हैं, वहीं बिचौलियों और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए, राज्य की सभी सब्सिडी, ग्रांट और चीनी मिलों से मिलने वाला पेमेंट सीधे रजिस्टर्ड स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) के जॉइंट बैंक अकाउंट में जमा किया जाता है। वहीं बीज की बिक्री से लगातार होने वाली कमाई ने इन ग्रामीण महिलाओं के क्रेडिट स्कोर में जबरदस्त सुधार किया है, जिससे वे स्थानीय सूदखोरों पर निर्भर हुए बिना अपने काम को बढ़ाने के लिए बड़े फॉर्मल बैंक लोन ले पाती हैं। वाकई, यह शानदार सफलता की लकीर महिलाओं ने खींच दी है।
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