झारखंड के लातेहार की घरेलू महिलाओं ने कमाल कर दिखाया है। वे खुद अपने इलाकों के लिए रोल मॉडल बन रही हैं। खुद अपने लिए स्वरोजगार के अवसर ढूंढ रही हैं। आइए जानें विस्तार से।
यह उल्लेखनीय है कि रोजगार के अवसरों की कमी के बीच, लातेहार की ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्योगों के जरिए रोजगार पैदा कर रही हैं और समाज को एक नया रास्ता दिखा रही हैं। जी हां, ग्रामीण इलाकों में, बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्योग लगाकर स्वरोजगार कर रही हैं। इससे न सिर्फ महिलाओं की आमदनी बेहतर हुई है, बल्कि उनके परिवार के पुरुष भी इन व्यवसायों में मदद कर पाते हैं, जिससे काम के लिए पलायन करने की परेशानी से बचा जा सकता है। दरअसल, इस इलाके में पुरुषों के लिए भी रोजगार के विकल्प कम रहे हैं। ऐसे में घरेलू महिलाएं अपनी सूझ-बूझ और सीमित संसाधन में भी उम्मीद की किरण जगाई हैं। बता दें कि लातेहार जिले के बालूमाथ ब्लॉक के ओकेया गांव की रहने वाली नीतू देवी ने अपने घर में तेल मिल और आटा चक्की लगाकर एक छोटा उद्योग शुरू किया है। नीतू देवी स्वरोजगार कर रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। मीना देवी ने फिर कुछ अन्य महिलाओं के साथ मिलकर अपने घर में मुरमुरे बनाने का व्यवसाय शुरू किया। बता दें कि लातेहार के गांवों में, जो महिलाएं पहले घर संभालने में खुश थीं और परिवार चलाने के लिए अपने पतियों पर निर्भर थीं, अब वे खुद का बिजनेस कर रही हैं। इस प्रक्रिया में वे दूसरी महिलाओं को अपने बिजनेस में रोजगार देकर उनकी मदद भी कर रही हैं। इन बदलावों में सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHGs) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जिन्होंने एक सांस्कृतिक और आर्थिक बदलाव लाया है। छोटे उद्योगों के माध्यम से इन महिलाओं को माइक्रो-फाइनेंसिंग सहित सभी पहलुओं में ट्रेनिंग दी जा रही है और उन्हें आर्थिक आजादी के साथ-साथ सम्मान भी मिल रहा है। वाकई, यह उल्लेखनीय कोशिश है और इसकी चर्चा होनी ही चाहिए।