अलीगढ़ में महिलाएं कचरे से नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऑर्गेनिक खाद बना रही हैं और अपनी रोजी-रोटी कमा रही हैं। आइए जानें विस्तार से।
यह वाकई सराहनीय बात है कि अलीगढ़ के टप्पल ब्लॉक के भरतपुर गांव में, कचरे को बेशकीमती बना रही हैं महिलाएं। जी हां, इसका श्रेय टप्पल समृद्धि महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को जाता है, जो वर्ष 2022 में स्थापित एक महिला-संचालित किसान उत्पादक संगठन (FPO) है। इस संस्था ने अब तक 1,000 से ज्यादा महिला किसानों को एक साथ जोड़ा है। और उल्लेखनीय है कि सिर्फ दो सालों में, इसने 'लाइटहाउस FPO' का दर्जा हासिल कर लिया है। यहां महिलाएं रोजा कचरा इकट्ठा करती हैं, जैसे गाय का गोबर, किचन का कचरा और फसल के अवशेष। इस कचरे को IIT कानपुर द्वारा विकसित नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऑर्गेनिक खाद में बदला जाता है। इससे मिट्टी ज्यादा सेहतमंद होती है, जिससे कम लागत में मजबूत और ज्यादा फसल उपजाया जा रहा है। गौरतलब है कि अलीगढ़ में एक मुख्य फोकस केंचुओं का इस्तेमाल करके ऑर्गेनिक पदार्थ (जैसे गाय का गोबर) को रिच खाद में बदलना है, यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे सरकारी पहलों और स्थानीय विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त है। बता दें कि किसान प्रयोगों में देखा गया है कि इससे बनने वाले ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की उर्वरता और फसल की क्वालिटी में सुधार करते हैं, जिससे नुकसानदायक केमिकल खाद पर निर्भरता कम होती है। ICAR की रिसर्च के अनुसार, यह खेती और जानवरों के कचरे को मैनेज करने का एक सफल मॉडल है, जो इसे कीमती, इनकम देने वाले प्रोडक्ट्स में बदल देता है। बता दें कि इंटरनेशनल जर्नल ऑफ करंट रिसर्च एंड एकेडमिक रिव्यू के अनुसार इन प्रोजेक्ट्स को लागू करने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और ट्रेनिंग देने में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (भारत सरकार) की अहम भूमिका रही है।