शाकाहारी मीट का इन दिनों चलन तेजी से बढ़ा है। जमशेदपुर के बहरागोड़ा में महिलाएं बटन जंबो मशरूम की खेती कर रही हैं और खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं। यह भी जान लें कि कम मेहनत में शाकाहारी मीट की खेती से महिलाओं को काफी लाभ भी हो रहा है। बहरागोड़ा के इस गांव में 20 अधिक महिलाएं मिलकर बटन जंबो मशरूम की खेती कर खुद को आर्थिक तौर पर आजाद कर रही हैं। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि चाय और नाश्ते की दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट में भी मशरूम की डिमांड बढ़ी है। गांव से लेकर शहर तक खान से लेकर सूप तक में मशरूम का उपयोग अधिक किया जाता है। इसलिए मशरूम की खेती पर अधिक बल दिया जा रहा है।
दिलचस्प यह है कि मशरूम की खेती करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह की आवश्यकता नहीं पड़ती है। आप अपने घर के खाली कमरे या फिर बरामदे का उपयोग किया जाता है और आसानी से मशरूम की खेती हो जाती है। इस कार्य से जुड़ी हुई महिला किसान लक्ष्मी के अनुसार मशरूम की खेती करने के लिए और उसे उगाने के लिए उन्हें 165 रुपए प्रति बैग के हिसाब से मिलते हैं। इस बैग में उन्हें भूसा, धान और मशरूम का बीज मिलता है और इसी की सहायता से खेती आसान तरीके से हो जाती है। इस बैग को केवल ठंडी और साफ जगह पर टांग देना है और हर दिन इस बैग पर पानी का छिड़काव करना होता है।
इतना करने के साथ केवल 20 दिन के भीतर मशरूम तैयार हो जाता है। एक छोटे से बैग से 3 किलो मशरूम की पैदावार होती है। इसके बाद स्थानीय बाजार में या फिर मशरूम की मांग होने पर इसे 250 रुपए प्रति किलो के दाम में दे दिया जाता है। इस तरह एक बैग के साथ महिलाओं को कई गुना का मुनाफा बिना अधिक मेहनत किए हो जाता है। हर दिन केवल आधा घंटा की देखभाल महिलाओं के जीवन को आर्थिक तौर पर बल देने का काम करती है। मशरूम में कई तरह के विटामिन्स होते हैं इस वजह से इसे शाकाहारी मीट कहा जाता है।