मूर्ति बनाना एक खास कला है और इस कला को बारीकी से करने का काम मेरठ की महिलाएं कर रही हैं और इससे खुद को आर्थिक तौर पर बल भी दे रही हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित नगली गांव में 50 से अधिक महिलाएं मूर्ति बनाने का कार्य सफलता से कर रही हैं और इसे अपनी आजीविका को भी पूरा कर रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं खुद को आर्थिक तौर पर प्रबल बनाने का कार्य सतत जारी रख रही हैं। इसी फेहरिस्त में एक नाम मेरठ के नगली गांव की महिलाओं का है। जहां पर महिलाएं कई प्रकार की मूर्तियां बनाते हुए अपने बेहतर भविष्य की तलाश कर रही हैं। हालांकि इसके लिए सबसे पहले महिलाओं को ट्रेनिंग मिल रही है।
मूर्तियों के बिजनेस में शामिल में एक महिला मूर्तिकार ने बताया कि गांव के करीब महिलाओं ने मूर्ति को बनाने से संबंधित प्रशिक्षण हासिल किया और इसके बाद उन्होंने मूर्ति बनाने का काम शुरू किया। इस समय महिलाएं मूर्ति का प्रशिक्षण भी ले रही हैं और इससे जुड़ा हुआ बिजनेस भी कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि मूर्ति बनाने के साथ परिवार को संभालने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।
घर के करीब होने से महिलाएं समय निकालकर घर और परिवार के साथ अपने मूर्ति बनाने के कारोबार भी सफलता से पूरा कर रही हैं और महीने में अच्छी कमाई भी कर रही हैं। महिलाएं अपने काम में इतनी निपुण हैं कि केवल 20 मिनट में मूर्ति तैयार कर लेती हैं।
इस मूर्ति से साल भर में लाखों का कारोबार भी हो रहा है। इसके साथ ही प्रशिक्षण लेने के बाद 6 महीने तक महिलाओं के काम को बारीकी से निगरानी रखी जाती है। ज्ञात हो कि घर के डेकोरेशन के लिए इस तरह की मूर्ति को सबसे अधिक पसंद किया जाता है।