पारंपरिक हुनर हमेशा से ग्रामीण महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। जी हां, ग्रामीण इलाकों में कई सारी ऐसी महिलाएं मौजूद हैं, जो कि पारंपरिक कला से अपने जीवन को आर्थिक तौर पर बल दे रही हैं। मध्य प्रदेश के भरतपुर की महिलाएं खुद दो आर्थिक तौर पर मजबूत करने का कार्य सतत कर रही हैं। यहां की महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। साथ ही एक अच्छी आय भी अर्जित कर रही हैं।
यहां की महिलाएं चीनी मिट्टी से आकर्षक बर्तन और सजावट का समाना बनाने का काम करती हैं। साथ ही अपने बनाए हुए चीजों को सड़कों के किनारे लगाकर उसे बेचने का भी काम करती हैं। सुंदर डिजाइन और पारंपरिक तरीके से सजाया गया मिट्टी का बर्तन लोगों को काफी आकर्षित भी लगता है। इस तरह की बर्तनों की बाजार में मांग भी अधिक है। इस काम से महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त भी बनाता है और साथ ही उनके लिए रोजगार के माध्यम को भी मजबूत करता है।
एक तरह से इस तरह का कार्य महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत भी करता है और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का कार्य करता है। इन महिलाओं के द्वारा बनाए गए उत्पाद पूरी तरह से चीनी मिट्टी के बने होते हैं। इससे उनकी गुणवत्ता भी बनी रहती है। खासतौर पर त्योहार के मौके मिट्टी के बनाए गए बर्तनों के कारण आमदनी अच्छी होती है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो ग्रामीण महिलाओं ने हमेशा से ही देश की परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है, जो कि उन महिलाओं के लिए खासतौर पर बड़ी उपलब्धि लेकर आता है।