महाराष्ट्र के एक गांव की रहने वाली सविता डाकले से मिलिए, जिन्होंने अपने सपनों के लिए संघर्ष किया और अब पूरे भारत में 10 लाख से ज़्यादा महिला किसानों को ट्रेनिंग देती हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
एक महिला जो इस बात की परवाह नहीं करती है कि वह जहां रहती है, वहां जलवायु परिस्थिति हर वक़्त अनुकूल नहीं है। फिर भी वह यही कोशिश करती है कि मेहनत करे और आगे बढ़े और अपने राज्य के लिए भी आगे बढ़े, इसलिए उन्होंने तय किया कि वह इसकी तस्वीर बदलेंगी और उन्होंने ऐसा किया भी। जी हां, एक शानदार मिसाल बन चुकीं सविता डाकले की बात कर रहे हैं। महाराष्ट्र के एक गांव की रहने वालीं सविता ने अपने संघर्ष को पूरा किया और 10 लाख से भी ज्यादा महिला किसानों को ट्रेनिंग दी। दरअसल, सविता डाकले महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर में रहने वालीं एक जानी-मानी प्रगतिशील किसान और एग्री-एंटरप्रेन्योर (कृषि-उद्यमी) हैं। खास बात यह है कि उन्होंने पूरे भारत में 10 लाख से ज्यादा महिला किसानों को जोड़ने वाला एक ऑनलाइन नेटवर्क बनाया है। गौरतलब है कि पहले केवल 400 महिलाएं ही थी, जो सविता के साथ थीं लेकिन फिर धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया, बनता गया। सविता ने खेती में इंटर्न से लेकर सस्टेनेबल खेती तक के गुरों को सीखा है और अब उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की लीडर बनने तक का सफर तय किया है। उनके बारे में बता दें कि उन्होंने कभी भी आर्थिक स्थिति को अपने अपना कमजोर रूप नहीं बनाया, बल्कि सविता ने परिवार की मदद के लिए 10वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया और 15 साल की उम्र में एक फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया। लेकिन उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी शादी हो गई, क्योंकि उनकी शादी एक किसान परिवार में हुई थी। उन्होंने वहां ही शुरू में काम किया। शुरुआत में तो उन्हें खेतों में काम करने के बारे में कुछ नहीं पता था। लेकिन उन्होंने काम सीखने के लिए दिहाड़ी बनना मंजूर किया। फिर धीरे-धीरे उन्होंने कपास की खेती में महारत हासिल की और अपनी कपास की कटाई की क्षमता को 10 किलोग्राम से बढ़ाकर 80 किलोग्राम प्रति दिन कर लगौरतलब है कि वर्ष 2004 में, वह 'सेल्फ-एम्प्लॉयड विमेंस एसोसिएशन' (SEWA) से जुड़ीं। इस एसोसिएशन ने उन्हें कम्युनिटी लीडरशिप, पब्लिक स्पीकिंग और टिकाऊ खेती के तरीकों की ट्रेनिंग दी। वहीं एक साधारण स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके, उन्होंने हजारों स्थानीय महिलाओं को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना सिखाया।
नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2017 में, उन्होंने फ़ेसबुक कम्युनिटीज, जिसमें "Women in Agriculture" भी शामिल है, इसकी शुरुआत की, जो अब 10 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को आपस में जोड़ती हैं। उन्होंने हजारों महिलाओं को सीधे ट्रेनिंग दी है और उन्हें स्वतंत्र रूप से जैविक खेती करने के लिए तैयार किया है। बता दें कि उनके ऑनलाइन ग्रुप्स अब मुफ्त में सलाह केंद्र की तरह काम करते हैं, जहां महिला किसान फसल की बुआई, कटाई के तरीकों और बाजार में कीमत तय करने की रणनीतियों पर रियल-टाइम सलाह साझा करती हैं। बता दें कि डिजिटल साक्षरता और एग्रीबिजनेस (कृषि-व्यवसाय) में उनके काम को बड़े प्लेटफॉर्म्स ने मान्यता दी है। साथ ही उन्होंने कृषि उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग को बेहतर बनाने के लिए U.S. कॉन्सुलेट की 'एकेडमी फ़ॉर विमेन एंटरप्रेन्योर्स' (AWE) से ट्रेनिंग ली।
वाकई, उन्होंने शानदार काम किया है और सिर्फ खुद को नहीं, वह अन्य महिलाओं को भी इसकी ट्रेनिंग दे रही हैं और उन्हें साक्षर बना रही हैं। इसलिए उनकी तरह और भी महिलाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि वे इस क्षेत्र में शानदार पहचान बना सकें।*Image used is only for representational purpose.