ग्रामीण महिलाएं खुद के रोजगार के नए अवसर तलाश करती रहती हैं। ऐसे में रसोई उनके जीवन में खास भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की भी महिलाएं इस तरफ अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। बुरहानपुर जिले के एक छोटे से गांव में महिलाओं ने 40 हजार की लागत के साथ कैफे की शुरुआत की, जो कि अब हर साल लाखों की कमाई कर रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
स्वयं सहायता समूह से प्रेरणा लेकर बुरहानपुर जिले के गांव की महिलाओं ने अपने हाथों के हुनर को पहचान देने का फैसला लिया। दीदी कैफे की सफल शुरुआत की। हालांकि दीदी कैफे का शुरुआती समय उतार-चढ़ाव भरा रहा है। लेकिन वक्त के साथ उनके इस कैफे ने अपनी रफ्तार को आगे बढ़ाया और कई निजी और सरकारी कार्यक्रमों में खाना बनाने के आर्डर मिलने लगे।
निंबोल गांव की इन महिलाओं को दीदी कैफे की शुरुआत करने के लिए 40 हजार रुपए मिले थे। वर्तमान में इस कैफे के जरिए साल भर में 3 से 5 लाख की कमाई आसानी से की जाती है। इस महिला ग्रुप के एक सदस्य ने बताया कि पहले उनका काम केवल घर तक सीमित था, लेकिन बाद में चार अन्य महिलाओं के साथ मिलकर इस कैफे का काम शुरू किया। यहां पर खासतौर पर शाकाहारी खाना बनाया जाता है। इन महिलाओं के हुनर कोm देखकर यही लगता है कि अगर आपके पास कोई भी कला है, तो आप अपनी आजीविका का रास्ता खोज सकती हैं।