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बनारस की देवरानी-जेठानी ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, ज्वेलरी से करोड़ों कमाई

टीम Her Circle |  December 30, 2025

कहते हैं कि बूंद-बूंद से सागर भरता है। ऐसा ही काम बनारस की देवरानी और जेठानी की जोड़ी कर रही हैं। मोती के ज्वेलरी का बिजनेस करते हुए दोनों महिलाएं खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के दरवाजे खोल रही हैं। माना जाता है कि करोड़ों के बिजनेस भी संभाल रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।

बनारस की देवरानी नेहा-जेठानी सुनीता पटेल के नाम से लोकप्रिय महिलाओं ने कई महिलाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं। तकरीबन 10 साल पहले दोनों ने कांच के मोतियों से ज्वेलरी बनाने का काम शुरू किया। उनके ग्लास बीड्स के उत्पाद का यह टोटल कारोबार एक हजार करोड़ तक पहुंच चुका है। साथ ही उनके इस काम से 10 हजार से अधिक महिलाएं उनका साथ दे रही हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण भी कर रही हैं। 

नेहा और सुनीता की शिक्षा अधूरी रही है। लेकिन दोनों ने अपने परिवार को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए बिजनेस की सोच अपनाई। इसी के साथ बनारस की सालों पुरानी कला ग्लास बीड्स को अपनाने का फैसला लिया। इस कला के माध्यम से ग्लास बीड्स में कांच के मनके-मोती की माला और अन्य आभूषण बनाए जाते हैं। यह काफी चमकीले और खूबसूरत होते हैं। भारत के साथ विदेश में भी इनकी काफी डिमांड है। अमेरिका के साथ यूरोप में भी इस तरह की ज्वेलरी की काफी मांग है। नेहा ने अपने इस बिजनेस के बारे में बताया कि साल 2005 में उनकी शादी हुई। घर के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे। अधिक आमदनी के लिए घर में छोटे स्तर पर कांच के मोतियों का काम दूसरे कारोबारी से कच्चा माल लाकर किया जाता था।

 इसी को देखते हुए अपनी जेठानी के साथ मिलकर इस कारोबार में हाथ आजमाने का विचार आया। घर का काम निपटाने के बाद रात को 10 बजे के बाद अपनी जेठानी के साथ मिलकर मोतियों से गहने बनाने का काम दोनों ने सीखा। इसके बाद साल 2014 तक दोनों ग्लास बीड्स से ज्वेलरी बनाने में माहिर हो गईं। अपने इस काम से दोनों हर दिन हजार रुपए की बचत कर लेती हैं। ग्लास बीड्स से माला, मोती, नाक और कान के झुमके और घर की सजावट का काम भी बनाया जाता है। कई सारी महिलाओं के साथ मिलकर महीने में 60 से 70 हजार की कमाई हो जाती है। फिलहाल इस कारोबार से 4 हजार से अधिक परिवार जुड़ गए हैं। साल भर में करोड़ों की कमाई होती है।


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