नारी शक्ति के कई सारे उदाहरण बीते कई समय से देखने को मिल रहा है। बिजनेस से लेकर देश के लिए जंग लड़ने तक महिलाएं कभी-भी पीछे नहीं रही हैं। ऐसा ही कारनामा कर जमशेदपुर की दो महिलाओं ने कर दिखाया है। उन्होंने इतिहास रच दिया है। बाटिक प्रिंट को इसी के साथ पहचान दिला दी है। आइए जानते हैं विस्तार से।
जमशेदपुर की शोभा और डालियां ने बाटिक प्रिंट को एक नई पहचान दी है। दोनों ने मिलकर जमशेदपुर में बाटिक प्रिंट का काम शुरू किया और इस छोटी सी लेकिन पारंपरिक कला को अपने मेहनत के बलबूते विदेश तक पहुंचा दिया है। दोनों की हाथों की कला विदेश तक पहुंच गई है। यह एक सफल व्यवसाय भी बन गया है। अपने इस काम के बारे में शोभा का कहना है कि बाटिक प्रिंट एक पारंपरिक कला है। इसमें कपड़े पर डिजाइन बनाने का काम किया जाता है। इसमें पहले कपड़े पर मनचाहा डिजाइन बनाया जाता है और उसके बाद उसमें डाई को बुलाया जाता है। जिस भी जगह पर मोम लगी होती है, वहां पर रंग नहीं चढ़ता है और बाकी हिस्सों में रंग भर जाता है। इसके बाद अंत में मोम हटाकर कपड़े को अंतिम रूप दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि बाटिक प्रिंट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह काफी यूनिक होने के साथ पारंपरिक भी लगता है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि बाटिक प्रिंट का इतिहास काफी सालों पुराना है। पूजा-पाठ और इसके साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के खास मौके पर भी इसे पहनना अधिक पसंद किया जाता है।
दूसरी तरफ यह भी देखा गया है कि बाटिक प्रिंट टिकाऊ भी होता है। अगर बाटिक प्रिंट के बनाए गए कपड़े को सही तरीके से संभाला जाए, तो इसका रंग 10 से 12 साल तक भी फीका नहीं पड़ता है। हालांकि बाटिक प्रिंट से बने हुए कपड़े की कीमत अधिक नहीं होती है। एक खूबसूरत बाटिक प्रिंट की साड़ी हजार रूप में आसानी से मिल जाती है। ब्लाउज की कीमत 400 से 500 कीमत के बीच रहती है। इसके साथ सूट-सलवार और दुपट्टा के साथ शॉल को भी बाटिक प्रिंट से तैयार किया जाता है। अपने मेहनत के बलबूते पर शोभा और डालियां ने बाटिक प्रिंट को विदेश तक पहचान दिलाई है।