img
settings about us
  • follow us
  • follow us
write to us:
Hercircle.in@ril.com
terms of use | privacy policy � 2021 herCircle

  • होम
  • HERoes
  • bizruptors
  • कनेक्ट
  • एन्गेज
  • ग्रो

search

search
all
communities
people
articles
videos
experts
courses
masterclasses
DIY
Job
notifications
img
Priority notifications
view more notifications
ArticleImage
home / engage / प्रेरणा / ट्रेंडिंग

मलकानगिरी की आदिवासी महिलाएं दुर्लभ धान कालाजीरा और कलाबती की जैविक खेती कर बन रहीं आत्मनिर्भर

टीम Her Circle |  August 20, 2026

मलकानगिरी में आदिवासी महिलाओं के स्वयं-सहायता समूह, कालाजीरा और कलाबती जैसी दुर्लभ और खुशबूदार पारंपरिक धान की किस्मों की जैविक खेती करके स्थानीय आजीविका को बदल रहे हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।

ओडिशा की आदिवासी महिलाएं कमाल कर रही हैं। उनके लिए वहां का धान सिर्फ धान नहीं है, बल्कि सोना साबित हो रही है, क्योंकि दुर्लभ धान की जैविक खेती करके महिलाएं बहुत कमा रही हैं। जी हां, यह कमाल कर दिखाया है मलकानगिरी में आदिवासी महिलाओं के स्वयं-सहायता समूह ने। उन्होंने कालाजीरा और कलाबती जैसी दुर्लभ धान को नयी पहचान दे दी है। शानदार कमाई के साथ विदेशों में भी पहचान बन रही है। बता दें कि इसकी पहल सदस्यों को हर महीने ₹3,000 से ₹5,000 कमाने में मदद करती है और साथ ही जलवायु के अनुकूल स्थानीय फसलों को फिर से बढ़ावा देती है। यहां की स्थानीय न सिर्फ महिलाएं जैविक खेती करती हैं, बल्कि वे कटाई, मिलिंग और पैकेजिंग सहित पूरी प्रक्रिया को खुद संभालती हैं। बता दें कि 'मिशन शक्ति' और 'ORMAS' जैसे सरकारी कार्यक्रमों के सहयोग से, इन समूहों को आधुनिक इलेक्ट्रिक मिलिंग यूनिट, बीज और प्रशासनिक सुविधाएं मिलती हैं। वहीं प्रोसेस्ड कालाजीरा चावल स्थानीय सरकारी मेलों और बाज़ारों में लगभग ₹100 प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है। गौरतलब है कि चावल का राजकुमार" (Prince of Rice) कहे जाने वाले कालाजीरा के दाने जीरे जैसे दिखते हैं और इनका स्वाद नट्स जैसा और खुशबू बहुत हल्की और अच्छी होती है। उल्लेखनीय है कि आसानी से पचने वाला और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला यह चावल डायबिटीज के मरीज़ों के खान-पान और सेहत से जुड़ी पारंपरिक ज़रूरतों के लिए बहुत अच्छा है। इनकी सफलता की कहानी इसलिए भी सुनी जानी चाहिए, क्योंकि कालिमेला ब्लॉक के टेलेराई जैसे दूर-दराज इलाके, जो कभी गैर-कानूनी गांजे की खेती के दाग से जूझ रहे थे, अब सफलतापूर्वक टिकाऊ खेती के केंद्र बन गए हैं। वाकई में,उनकी मेहनत और विजन को सलाम है, जिन्होंने आत्मनिर्भरता के साथ अपनी जगह पर लगे काले धब्बे और कलंक को भी मिटाने का काम किया है।


*Image used is only for representational purpose.

शेयर करें
img
लिंक कॉपी किया!
edit
reply
होम
हेल्प
वीडियोज़
कनेक्ट
गोल्स
  • © herCircle

  • फॉलो अस
  • कनेक्ट
  • एन्गेज
  • ग्रो
  • गोल्स
  • हेल्प
  • हमें जानिए
  • सेटिंग्स
  • इस्तेमाल करने की शर्तें
  • प्राइवेसी पॉलिसी
  • कनेक्ट:
  • email हमें लिखें
    Hercircle.in@ril.com

  • वीमेंस कलेक्टिव

  • © 2020 her circle