खुद के पैरों पर खड़ा होना महिला आजादी के साथ महिला सशक्तिकरण की तरफ भी पहला और जरूरी कदम है। ग्रामीण महिलाएं लगातार खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं। इसी फेहरिस्त में एक नाम नीमा पांडे का भी शामिल है। स्वरोजगार से अपनी जिंदगी बदलकर नीमा पांडे महिला शक्ति की मिसाल बन गई हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
सरकारी योजनाओं का इन दिनों महिलाओं को काफी लाभ मिल रहा है। नीमा पांडे ने भी इसका लाभ उठाया है। उत्तराखंड निवासी नीमा पांडे ने परिवार को संभालने के साथ खुद के हुनर को भी पहचान दिलाने का फैसला किया। इसमें कोई दोराय नहीं है कि देश के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को बल देने और उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए स्वयं सहायता समूह को संचालित किया गया है। जहां पर महिलाएं खाना बनाने से लेकर कपड़े की सिलाई के साथ तकनीकी से जुड़े हर कार्य की ट्रेनिंग आसानी से मुफ्त में ले सकती हैं।
उत्तराखंड के रुद्रपुर विकासखंड के ग्राम छत्तरपुर की निवासी नीमा पांडे ने भी इस योजना का लाभ उठाया। सीमित आय नीमा के लिए हमेशा से चुनौती रहा है। परिवार की जरूरत को पूरा करने के साथ नीमा ने खुद को भी शिक्षित करने का फैसला लिया। इसके तहत नीमा पांडे ने स्वयं सहायता समूह की कई सारी ट्रेनिंग का हिस्सा बनीं। साथ ही नियमित रूप से भाग लेना भी शुरू किया। स्वयं सहायता समूह के कई सारे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से नई जानकारियां भी हासिल की। साथ ही कर्ज और स्वरोजगार से मिलने वाले लाभ के बारे में भी संपूर्ण जानकारी हासिल की।
इसके बाद अपनी दिलचस्पी को आगे बढ़ाते हुए नीमा ने ब्यूटी पार्लर का स्टोर शुरू किया। इसमें स्वयं सहायता समूह ने आर्थिक तौर पर नीमा की मदद की। लेकिन उन्होंने खुद को पैरों पर खड़े करने के साथ अन्य महिलाओं के लिए कार्य करने का फैसला लिया। उन्होंने उत्तराखंड के ग्रामीण बैंक के साथ जुड़कर बैंक सखी के तौर पर काम करना शुरू किया। बैंक सखी के तौर पर नीमा कई सारे गांव में जाकर बैंक से जुड़ी योजनाओं और सेवाओं के बारे में ग्रामीण महिलाओं को जानकारी दी। इससे गांव की अन्य महिलाओं को भी खुद को आर्थिक तौर पर प्रबल बनाने का हौसला मिला।