प्रयागराज की ग्रामीण महिलाएं संगम जल की बोतलें भरकर आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रयागराज से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित जसरा गांव की महिलाएं अपने जीवन को आकार दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ब्लॉक मिशन की मैनेजर नमिता सिंह इसका प्रमुख हिस्सा है। आइए जानते हैं विस्तार से।
अर्थशास्त्र में डिग्री उपाधि प्राप्त नमिता सिंह ने सालों तक जमीनी स्तर पर काम किया है और ग्रामीण महिलाओं को ऐसे कौशल से युक्त किया है, जो अवधारणा में सरल प्रतीत हो सकती है। लेकिन प्रभाव में शक्तिशाली होती है। खासतौर पर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से संपर्क बनाना।
तकरीबन पांच साल पहले उन्होंने नारी शक्ति महिला प्रेरणा संकुल की स्थापना में सहायता की, जो कि एक स्वयं सहायता समूह है।
ज्ञात हो कि यह समूह गंगा और यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम से पानी संग्रहित करने के लिए खासतौर पर समर्पित है। इस पहल के शुरू होने से पहले जसरा की अधिकांश महिलाएं अपना दिन घरेलू कामों में ही बिताती थीं और आय के लिए भी सीमित साधन उनके पास थे। ऐसे में गंगा के पानी के जरिए उनके जीवन में आर्थिक सौभाग्य का प्रवाह हुआ है। वर्तमान में यह सभी महिलाएं घर पर अपना दैनिक काम पूरा करने के बाद स्थानीय पैकेजिंग प्लांट में एक साथ एकत्रित होते हैं और शाम तक एक साथ मिलकर काम करते हैं और संगम के पानी की बोतलों में भरकर वितरण के लिए तैयार करती हैं। जाहिर सी बात है कि एक छोटे से प्रयास के रूप से शुरू हुआ यह कदम आर्थिक आजादी को एक स्थायी मॅाडल में तब्दील कर रहा है।