इंसान अगर चाहे, तो क्या नहीं कर सकता, महिलाएं खुद अपनी पहचान बना रही हैं और अपने गांव की शिक्षा की स्थिति को भी सुधारने की कोशिश की है। बिहार के वैशाली जिले की कुछ ऐसी ही कहानी हैं, जहां महिलाओं ने खुद को ऐसी प्रेरणा स्रोत बनाया है कि उनकी कहानी अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। आइए जानें विस्तार से।
बिहार के वैशाली के मधुपुर गांव की महिलाओं की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने पशुपालन और डेयरी के जरिये अपने समुदाय को बदला, उनकी इस प्रेरणादायक कहानी को बिहार के स्कूल सिलेबस में शामिल किया गया है। यहां की ही रहने वालीं सुमन देवी को इसका मुख्य श्रेय दिया जा रहा है, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण को नयी परिभाषा से नवाजा है और इसे टेक्स्टबुक में महिला सशक्तिकरण के एक असल जिंदगी के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है। दरअसल, सुमन देवी ने 38 साल पहले एक गाय के साथ एक छोटी डेयरी शुरू की थी, जो अब एक बड़ी कोऑपरेटिव बन गई है और गांव की 80 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाओं को पशुपालन और दूध उत्पादन में सशक्त बना रही हैं। इसके माध्यम से महिलाओं को आय, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस गांव की 10 महिलाओं ने 500 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया और पशुपालन और डेयरी फार्मिंग में खुद से काम करना शुरू किया।
महिलाएं यहां काम करने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और घर के काम भी कर रही हैं। वे दूसरे घरों में दूध बेचने भी जाती हैं। शुरुआत में गांव के कई पुरुषों की तरफ से काफी विरोध हुआ, लेकिन शारदा देवी, मधुरानी और कई दूसरी महिलाओं ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ीं। और नतीजा यह हुआ कि वे आत्मनिर्भर बन गई हैं और वे हर महीने लगभग 30 हजार रुपये कमा रही हैं।
बता दें कि सुमन देवी का सफर उनकी शादी के बाद शुरू हुआ। उनके पति किसान थे और गुजारा करने के लिए उनके पास सिर्फ एक गाय थी, इसलिए परिवार को गुजारा चलाने में बहुत मुश्किल होती थी। ऐसे में सुमन देवी के दिमाग में यह बात आई कि क्यों न डेयरी शुरू की जाये। ऐसे उन्होंने धीरे-धीरे शुरुआत की और वर्ष 1987 में उन्होंने मधुपुर महिला दूध उत्पादक सहायक समिति (मधुपुर महिला दूध उत्पादक सहकारी समिति) की स्थापना की। एक महीने की ट्रेनिंग के साथ उन्होंने डेयरी शुरू की, और शुरू में सिर्फ 10 महिलाएं उनके साथ जुड़ीं। आज इन महिलाओं की संख्या 500 से भी अधिक हो चुकी है। यहां की महिलाओं ने बाकायदा जाकर पशु पालन में पूर्ण रूप से ट्रेनिंग ली है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है कि वे बच्चों के लिए प्रेरणा बनें और सभी महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनें।
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