ग्रामीण महिलाओं के हौसले हमेशा से बुलंद रहते हैं। इसी वजह से हर तरह की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी महिलाएं अपना हौसला नहीं खोती हैं। इसी रास्ते पर अपने कदम बढ़ाते हुए मिसाल कायम की है आरुषि ने। साल 2020 में अपने पति के निधन के बाद आरुषि ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का फैसला किया और शक्ति रसोई की शुरुआत की। आइए जानते हैं विस्तार से।
प्रयागराज की आरुषि ने व्यक्तिगत त्रासदी को कई महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बनाकर शक्ति और आत्मनिर्भरता का परिचय दिया है। साथ ही महिला सशक्तिकरण की पहचान भी कायम की है। समाज की सारी विपरीत हालातों का अकेले मुकाबला करते हुए उन्होंने न सिर्फ खुद की गरिमा को हासिल किया, बल्कि अपने परिवार के लिए भी ढाल बनकर खड़ी हुई हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने शक्ति रसोई की योजना के तहत एक सफल रसोई की शुरुआत की।
हालांकि आरुषि के लिए यह राह लगातार मुश्किल होती रही, जब साल 2020 में उनके पति का निधन हो गया। खुद को आर्थिक और भावनात्मक तौर पर संभालने के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी आरुषि के कंधों पर आ गई। इस दौरान आरुषि के लिए भावनात्मक और आर्थिक बोझ असहनीय था।अपने शुरुआती दिनों के बारे में आरुषि का कहना है कि पति के देहांत के बाद ऐसा लगा कि जैसे मेरे पैरों के तले से जमीन खिसक गई। सामाजिक दबाव,आलोचना और भविष्य की चिंता भी मुझे लगातार परेशान किए जा रही थी। आर्थिक और भावनात्मक तौर पर मुझे गहरा झटका लगा। इन चुनौतियों के बाद भी मैंने अपना हौसला बनाए रखा और खुद से यह वादा किया कि मैं हर तरह के हालात का सामना करने के लिए तैयार हूं। साथ ही उन्होंने यह भी फैसला किया किया कि किसी भी हालात में अपनी बेटी की शिक्षा को वह अधूरा नहीं रखेंगी। इसी दौरान आरुषि को शक्ति रसोई के बारे में जानकारी हासिल हुई। शक्ति रसोई पहल के माध्यम से आरुषि को न केवल जीवनदान मिला, बल्कि एक नया भविष्य बनाने का मंच भी प्राप्त हुआ। राज्य सरकार की शक्ति रसोई पहल के जरिए आरुषि को खुद के लिए नया मंच भी प्राप्त हुआ।
सरकार की स्वयं सहायता समूह योजना के अंतर्गत यह पहल महिलाओं को वित्तीय सहायता और छोटे व्यवसाय स्थापित करने का अवसर दिया और सहायता प्रदान की। आरुषि ने इस अवसर का लाभ उठाया। जिससे उनका और अन्य महिलाओं के जीवन में बदलाव आया। आरुषि ने इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने जीवन की शुरुआत की। साथ ही इस रसोई योजना के कारण आरुषि को हिम्मत मिली और कई महिलाओं के लिए वह एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आयी हैं। कई महिलाओं को उन्होंने इसके लिए सहायता प्रदान की है। आरुषि का कहना है कि एक समय उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। लेकिन अब वह एक सफल व्यवसाय चला रही हैं। कई महिलाओं को उन्होंने अपने साथ इसमें शामिल किया.