बिहार में कामकाजी महिलाएं लगातार स्वरोजगार की तरफ बढ़ रही हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। जी हां, यह दिलचस्प बात सर्वे से सामने आई है कि बिहार में 10 में से 7 कामकाजी महिलाएं स्वरोजगार कर रही हैं और यह आंकड़े यानी कि डेटा आधिकारिक राज्य की रिपोर्टों में और भी ज्यादा सामने आया है, खासकर बिहार इकोनॉमिक सर्वे (ESR) 2024-25 में। जी हां, उल्लेखनीय है कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किए गए इस राष्ट्रीय स्तर के सर्वे में बताया गया है कि बिहार में स्वरोजगार में महिलाओं का अनुपात 83.7 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं इन सर्वे में, "सेल्फ-एम्प्लॉयड" यानी स्वरोजगार में "खुद का काम करने वाले" और पारिवारिक उद्यमों, जैसे कि पारिवारिक खेतों में "बिना वेतन वाले सहायक" के तौर पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। जबकि बिहार इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 में कुल महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जो पिछले सालों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में बढ़कर 33.5 प्रतिशत हो गई है और यह बढ़ोतरी लगभग पूरी तरह से महिलाओं के औपचारिक वेतन वाली नौकरी के बजाय सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट सेक्टर में आने के कारण हुई है। स्व रोजगार की यानी कि सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट की यह ऊंची दर रेगुलर, सैलरी वाली नौकरियों के बजाय बिना सैलरी वाले, इनफॉर्मल काम पर निर्भरता को दिखाती है। हालांकि यह ज्यादा भागीदारी को दिखाता है, लेकिन यह अक्सर औपचारिक औद्योगिक अवसरों की कमी को भी दिखाता है, जिसमें कई महिलाएं घरेलू कामों में योगदान देती हैं। गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में, 2017-18 और 2023-24 के बीच स्वरोजगार करने वाले कर्मचारियों का अनुपात 35.2 प्रतिशत से बढ़कर 84.8 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत, इसी अवधि में नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों में काफी गिरावट आई है, जो कि 27.9 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 3.6 प्रतिशत रह गया है। वही दिहाड़ी मजदूरों के लिए भी ऐसा ही ट्रेंड देखा गया है, जिनका हिस्सा भी 2017-18 में 36.9 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 11.6 प्रतिशत हो गया है। शहरी महिलाओं में स्वरोजगार तेजी से बढ़ा, 2017-18 में 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 61 प्रतिशत हो गया, जबकि दिहाड़ी रोजगार में गिरावट आई। नियमित वेतनभोगी रोजगार में भी काफी कमी आई, 2017-18 और 2020-21 के बीच 63.4 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत हो गया, जिसके बाद 2023-24 में थोड़ा सुधार होकर 30.3 प्रतिशत हो गया। हालांकि नियमित और दिहाड़ी रोजगार में गिरावट भी नजर आया।
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