राखी न केवल भाई-बहन के विश्वास और प्यार का त्योहार है, बल्कि कई ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का भी रास्ता बन चुका है। यही कार्य कर रही हैं, राजस्थान के भरतुर की महिलाएं। जी हां, राजस्थान के भरतपुर की महिलाएं गाय के गोबर के साथ ईको-फ्रेंडली राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता और पर्यावरण की सुरक्षा करने का भी काम कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि उनकी बनाई हुई राखियां पूरी तरह से प्राकृतिक है।
साथ ही एक तरह से यह राखियां सस्टेनेबल होने के साथ प्लास्टिक मुक्त रक्षाबंधन को भी बढ़ावा देती हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए ईको-फ्रेंडली राखी बनाना इसलिए भी आसान होता है कि अपने परिवार की देखभाल करते हुए महिलाएं राखियां घर पर ही रहकर बनाती हैं। घर बैठ कर यह महिलाएं अपनी आर्थिक संपन्नता को मजबूत कर रही हैं। गोबर से तैयार की गई यह खास तरह की राखियों को बनाने का तरीका भी काफी यूनिक है।
इस राखी को तैयार करने के लिए सबसे पहले गाय के गोबर को अच्छी तरह से साफ किया जाता है और फिर उसे राखी का आकार में ढाला दाता है। राखी के आकार में ढालने के बाद इन्हें सुखाने के लिए रखा जाता है। राखियों पर फूलों के साथ कई तरह के आकार बनाए जाते हैं, इससे राखियां काफी आकर्षित दिखाई देती हैं। महिलाओं के हाथों की कला राखी पर साफ तौर पर दिखाई देती है।
इन राखियों को बनाने वाली महिलाओं का कहना है कि गोबर से राखियां को तैयार करने से घर में बैठकर हमारी अच्छी आमदनी हो जाती है। साथ ही बाजार में भी इस तरह की राखियों की डिमांड है। कुल मिलाकर के देखा जाए, तो यह पहली बार नहीं है, जब गोबर का इस्तेमाल करके इस तरह की राखियां बनाई जा रही हैं, बल्कि इससे पहले गोबर से कई तरह के घर के सजावटी सामान को भी बनाया जाता है और इस तरह के काम से ग्रामीण महिलाएं अपने आर्थिक हालात को मजबूत करती रही हैं।