वाराणसी के घाट पर बेकार पड़े कपड़ों से पर्यावरण के अनुकूल बैग बनाने का कार्य कई सारी महिलाएं कर रही हैं। वाराणसी के घाट के पास मौजूद गांव की महिलाएं इस कार्य को पूरा करने का कार्य लंबे समय से कर रही हैं। बेकार कपड़ों को इस्तेमाल में लाने के योग्य बनाने का काम आईएएस अधिकारी अक्षत वर्मा ने होम वेलफेयर फाउंडेशन के साथ मिलकर शुरू किया है। आइए जानते हैं विस्तार से।
फाउंडेशन से मिलने वाली ट्रेनिंग के बाद स्थानीय महिलाओं को बेकार कपड़ों के जरिए रोजगार का नया अवसर मिला है। स्थानीय महिलाओं ने 1 लाख पर्यावरण के अनुकूल बैग बनाया है। जिससे प्रदूषण कम करने रोजगार सृजित करने और स्थिरता को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं। बीते कई सालों से इस कार्य को किया जा रहा है और उ, क्योंकि लाखों श्रद्धालु घाटों पर दान किए गए कपड़े को छोड़ देत हैं और इन कपड़ों का ढेर बन जाता है। इसकी सफाई करना और घाट को साफ रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार वहां मौजूद जानवरों के लिए यह खतरा भी पैदा करता है, जो कि गलती से इन कपड़ों को खा जाते हैं।
ऐसे में इसे लेकर एक विचार किया गया कि इन बेकार पड़े कपड़ों को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने देने की बजाय, सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। इसके बाद ही इन कपड़ों के थैले बनाने का सुझाव सामने आया और उस पर अमल करने का काम शुरू किया गया। ग्रामीण महिलाओं के उनके स्वयं सहायता समूह ग्रीन आर्मी ने बेकार कपड़ों को उपयोगी कपड़े की थैली में बदलने की जिम्मेदारी ली। इन महिलाओं ने हाथ से 1 लाख थैले बनाएं, जिन्हें दुकानदारों और स्थानीय लोगों को मुफ्त में वितरित किया गया। इसके साथ ही प्लास्टिक बैग का एक टिकाऊ विकल्प उपलब्ध हुआ। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2023 में शुरू की गई इस पहल ने एक साथ कई सारे मसालों को सुलझाया है। घाटों की सफाई और पुराने कपड़ों का नए तरीके से इस्तेमाल के साथ 50 से अधिक स्थानीय महिलाओं को रोजगार प्रदान करके महिला सशक्तिकरण की तरफ सराहनीय कदम उठाया है।