उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद में महिलाएं जैविक वर्मीकम्पोस्ट का सफल व्यवसाय करते हुए खुद को आर्थिक तौर पर प्रबल बना रही हैं। जी हां. यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि ग्रामीण इलाकों में रहकर महिलाएं अपने जीवन को आर्थिक आधार देने का कार्य़ सफलता पूर्वक करती आ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा मिली हुई ट्रेनिंग के बाद महिलाएं आर्थिक रूप से खुद को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही हैं और साथ ही खुद को टिकाऊ कृषि की तरफ आगे बढ़ा रही हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
उल्लेखनीय है कि पूजा यादव जैसी महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों में कई सदस्य हैं, जो कि गाय के गोबर को इकट्ठा करते हैं और संसाधित करने के बाद उससे वर्मीकम्पोस्टिंग बेड का प्रबंधन करते हैं। इस प्रक्रिया में गाय का गोबर इकट्ठा करना और उसे 40 से 15 दिनों तक सड़ने देना और फिर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने के लिए उसमें केंचुआ डालने का कार्य होता है। इस व्यवसाय में शामिल महिलाएं अपने खेतों के लिए उर्वरक की लागत बचा रही हैं और अच्छी खासी आय अर्जित कर रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार प्रति किलोग्राम उर्वरक की लागत लगभग 30 से 25 रुपए है, जिसे यह महिलाएं 55 से 60 रुपए में बेचती हैं। इससे महिलाओं को काफी अच्छा मुनाफा होता है। इस व्यवसाय के कारण महिलाओं को प्रति माह लगभग 8 हजार से 10 हजार रुपए की कमाई होती है। जिससे उनकी आर्थिक आजादी मजबूत हो रही है और कहीं न कहीं यह महिलाओं के लिए स्थायी विकल्प बन चुका है।
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