मिर्जापुर की ई-रिक्शा चालक चंदा शुक्ला बनीं प्रेरणा, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
मिर्जापुर की ई- रिक्शा चालक चंदा शुक्ला खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के साथ कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही हैं। मिर्जापुर की चंदा शुक्ला ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भी पालन कर रही हैं और इसके साथ 40 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग देने का भी काम कर रही हैं। यह काबिले तारीफ है कि चंदा शुक्ला अपने काम और परिवार को संभालने के साथ उन महिलाओं को भी ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग दे रही हैं, जो कि आर्थिक तौर पर अपने परिवार को संभालने का जज्बा रखती हैं। चंदा शुक्ला दर्जनों महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने की राह भी दिखाई है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की रहने वाली चंदा शुक्ला बीते चार सालों से ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन भी कर रही हैं। हर दिन ई-रिक्शा चलाकर रोजाना 600 से 800 रुपए की कमाई करती है। हालांकि उनकी पहचान केवल ई-रिक्शा चालक बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अब महिलाओं को आर्थिक तौर पर प्रबल बनाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। हालांकि इससे पहले अगर चंदा शुक्ला के निजी जीवन पर गौर किया जाए, तो शादी के बाद उनकी जिंदगी आसान नहीं रही है। घर के आर्थिक हालात खराब होने लगे। उन्होंने अपने गहने बेचकर पति को ई-रिक्शा खरीदने के लिए पैसे दिए। लेकिन इसके बाद उनके पति की तबीयत खराब हो गई और अपने परिवार को संभालने की सारी जिम्मेदारी उनके सिर पर आ गई। चंदा शुक्ला ने अपना हौसला नहीं खोया और खुद ई-रिक्शा चलाने का कार्य किया। पहली बार ई-रिक्शा चलाकर उन्होंने 35 रुपए की कमाई की। इसकी रकम भले ही छोटी थी, लेकिन उनका आत्मविश्वास वक्त के साथ आगे बढ़ता गया। चंदा ने यह ठान लिया कि उन्हें अन्य महिलाओं को भी अपनी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए उन्होंने निजी स्वयंसेवी संस्थाओं की सहायता से गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग भी दे रही हैं। वर्तमान में चंदा शुक्ला 40 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। चंदा अपने काम में माहिर हैं और वह महिलाओं को घरेलू और सरल तरीके से ट्रेनिंग देती हैं। इससे महिलाएं बिना किसी झिझक के ई-रिक्शा चलाने का कार्य करती हैं और चंदा शुक्ला की तरह खुद को भी आर्थिक तौर पर आजाद कर रही हैं।