झारखंड की रहनेवालीं वंदना टेटे अपनी टीम के साथ असुर रेडियो के माध्यम से आदिवासी समुदाय तक रेडियो पहुंचाकर उनकी आवाज को बुलंद कर रही हैं। आइए जानें विस्तार से।
वंदना टेटे ने हमेशा ही एक सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका होने के लिहाज से कई कदम आदिवासी समुदाय के लिए उठाने के प्रयास लगातार किये हैं। ऐसे में उन्होंने अपने रेडियो स्टेशन को जो सक्रिय रूप दिया है, वह अद्भुत है। दरअसल, 'असुर रेडियो' (विशेष रूप से असुर अखरा रेडियो या असुर आदिवासी मोबाइल रेडियो) झारखंड, भारत में एक सामुदायिक पहल है, जो लुप्तप्राय असुर जनजाति की भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित है। असुर जनजाति एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है। यहां सामग्री पहले से रिकॉर्ड की जाती है और लातेहार और गुमला जैसे जिलों के साप्ताहिक स्थानीय बाजारों (हाटों) में लाउडस्पीकरों के माध्यम से बजाई जाती है। वहीं यह असुर भाषा में लोकगीत, कहानियां और समाचार प्रसारित करता है, जिसके धाराप्रवाह बोलने वालों की संख्या 8,000 से भी कम है। साथ ही "असुर" नाम का उपयोग करके, समुदाय महिषासुर के वंशज के रूप में अपनी पहचान को पुनः प्राप्त कर रहा है, जिसे मुख्यधारा की कहानियों में अक्सर खलनायक के रूप में चित्रित किया जाता है। वंदना टेटे ने हमेशा इसका नेतृत्व किया है और इसकी प्रतिनिधि के रूप में हमेशा महत्वपूर्ण विषयों और मुद्दों को उठाया है। गौरतलब है कि असुर रेडियो (जिसे असुर अखरा मोबाइल रेडियो के नाम से भी जाना जाता है) भारत के झारखंड में असुर जनजाति की लुप्तप्राय भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए वर्ष 2020 में शुरू की गई एक अनूठी सामुदायिक नेतृत्व वाली मीडिया पहल है। इस रेडियो के प्रसारण में स्थानीय समाचार, लोकगीत, कहानियां और स्वास्थ्य संबंधी शैक्षिक संदेश शामिल होते हैं।
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